वर्दी के पीछे छिपा भ्रष्टाचार : व्यहार में नंबर वन प्रतापनगर थाने का ASI एक लाख रुपए रिश्वत लेते गिरफ्तार, ACB ने ऐसे ढहाया घमंड का किला

उदयपुर/जयपुर। कानून के रखवाले ही जब ‘भक्षक’ बन जाएं, तो समाज का रक्षक कौन होगा? उदयपुर के प्रतापनगर थाने में तैनात सहायक उप निरीक्षक (ASI) सुनील विश्नोई का भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने जो किला ढहाया है, उसने राजस्थान पुलिस की साख पर एक ऐसा बदनुमा दाग लगा दिया है जिसे धोना आसान नहीं होगा। यह सिर्फ 1,00,000 रुपए की रिश्वत का मामला नहीं है, बल्कि वर्दी की आड़ में चल रहे उस ‘नेक्सस’ और ‘रसूख’ के घमंड का खात्मा है, जिसे यह भ्रष्टाचारी अधिकारी अमर समझ बैठा था।

उदयपुर के गलियारों में सुनील विश्नोई सिर्फ एक एएसआई नहीं, बल्कि एक ‘पावर ब्रोकर’ के रूप में जाना जाता था। उसका पीआर (Public Relations) इतना खतरनाक और प्रभावी था कि बड़े-बड़े पुलिस अधिकारी उसकी उंगलियों के इशारे पर नाचते थे। क्या पत्रकार, क्या नामचीन बिजनेसमैन और क्या सत्ता के गलियारों में बैठे सफेदपोश राजनेता— सुनील विश्नोई के ‘याराना संबंध’ हर उस जगह थे जहां से पावर ऑपरेट होती थी। इसी रसूख के दम पर वह लंबे समय से थानों में अपनी मनमर्जी चला रहा था और खुद को कानून से ऊपर समझने की भूल कर बैठा था। लेकिन एसीबी की इस चोट ने उसके इस सारे ‘नेटवर्क’ को एक झटके में नेस्तनाबूद कर दिया है।

बलात्कार के झूठे केस का खौफ और 3 लाख का ‘ब्लैकमेलिंग बिजनेस’

सुनील विश्नोई ने खाकी को उगाही का धंधा बना लिया था। मामला सिर्फ एक मामूली नोकझोंक का था। लेकिन इस शातिर एएसआई और इसके गुर्गे कांस्टेबलों (शंकरलाल और बनवारीलाल) ने परिवादी को थाने बुलाकर ऐसा खौफ पैदा किया कि अच्छे-अच्छे कांप जाएं। परिवादी को सीधे धमकी दी गई कि एक युवती उसके खिलाफ छेड़छाड़ और बलात्कार (Rape) का केस दर्ज करा रही है।

एक निर्दोष को जेल और बदनामी का डर दिखाकर इस ‘खाकीधारी गुंडे’ ने मामले को रफा-दफा करने और राजीनामा कराने के एवज में पूरे 3 लाख की डिमांड ठोक दी। परिवादी ने जब हाथ-पैर जोड़े, मिन्नतें कीं, तब जाकर इस निर्दयी अधिकारी ने सौदा 1,30,000 में तय किया।

एसीबी का ‘सटीक जाल’: रिसॉर्ट की पार्किंग में ही दबोचा घमंड

भ्रष्टाचार की इस गंदी गंध जब एसीबी के महानिदेशक गोविंद गुप्ता और उनकी टीम तक पहुंची, तो इस अधिकारी के रसूख को ताक पर रखकर एक ऐसा चक्रव्यूह रचा गया जिससे निकलना नामुमकिन था। 9 मई को शिकायत मिलने के बाद जब गोपनीय सत्यापन हुआ, तो यह लालची अधिकारी सत्यापन के दौरान ही 25,000 की एडवांस ले चुका था।

इसके बाद डॉ. रामेश्वर सिंह (उप महानिरीक्षक) के सुपरविजन में एसीबी उदयपुर के अनंत कुमार की टीम ने इस शिकारी का शिकार करने की ठानी। रविवार को न्यू भूपालपुरा के ‘ऑर्बिट रिसोर्ट’ की कार पार्किंग में जैसे ही एएसआई सुनील विश्नोई ने परिवादी से ₹1,00,000 की रिश्वत की रकम अपने हाथों में ली, वैसे ही घात लगाकर बैठी एसीबी की टीम ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया। जिस हाथ से वह रसूखदारों से हाथ मिलाता था, आज उन्हीं हाथों में एसीबी ने कानून की हथकड़ी पहना दी।

घर की तलाशी शुरू : खुलेंगे कई और रसूखदारों के राज

एसीबी की अतिरिक्त महानिदेशक श्रीमती स्मिता श्रीवास्तव और महानिरीक्षक पुलिस श्रीमती एस परिमला के कड़े निर्देशों के बाद अब इस भ्रष्टाचारी की कुंडली खंगाली जा रही है। सुनील विश्नोई से बंद कमरे में कड़ी पूछताछ जारी है। इसके साथ ही एसीबी की टीमें उसके आलीशान रिहायशी मकान की गहन तलाशी ले रही हैं।

माना जा रहा है कि इस तलाशी में न सिर्फ अकूत काली कमाई का खुलासा होगा, बल्कि डायरियों और दस्तावेजों से उदयपुर के उन कई बड़े चेहरों (पत्रकारों, राजनेताओं और अधिकारियों) के नाम भी बेनकाब हो सकते हैं, जो इस भ्रष्टाचारी के ‘प्रभावी पीआर’ के पार्टनर थे।

 

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