जोहरान ममदानी के बाद अमेरिका में अब्दुल का जलवा…आखिर क्यों भड़के ट्रंप?

वॉशिंगटन। अमेरिकी राजनीति में इन दिनों एक ही नाम की सबसे ज्यादा गूंज है—डॉ. अब्दुल अल-सैयद। मिशिगन के सीनेट चुनाव के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी की प्राइमरी में ऐतिहासिक जीत दर्ज कर अल-सैयद ने अमेरिका की सियासत में अपनी धमक साबित कर दी है। वे अमेरिकी सीनेट के लिए किसी भी प्रमुख राजनीतिक दल के पहले मुस्लिम उम्मीदवार बनकर उभरे हैं। स्विंग स्टेट मिशिगन में उनके बढ़ते प्रभाव और ‘वामपंथी जलवे’ ने न केवल डेमोक्रेटिक पार्टी के समीकरण बदल दिए हैं, बल्कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन खेमे की नींद भी उड़ा दी है। इससे पहले न्यूयार्क में जोहरान ममदानी मेयर चुने गए थे।

अल-सैयद का जलवा : क्यों खास है यह जीत?

मिशिगन के पूर्व स्वास्थ्य अधिकारी और पेशे से डॉक्टर/महामारी विज्ञानी अब्दुल अल-सैयद ने वामपंथी और प्रगतिशील नीतियों के दम पर चुनाव में अपनी मजबूत पकड़ बनाई।

दिग्गजों को पछाड़ा: अल-सैयद ने वॉशिंगटन के शीर्ष डेमोक्रेटिक नेतृत्व का समर्थन प्राप्त उम्मीदवार हेले स्टीवंस को करारी शिकस्त दी।

प्रगतिशील नेताओं का साथ : सीनेटर बर्नी सैंडर्स, एलिज़ाबेथ वॉरेन और सांसद अलेक्ज़ेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज़ जैसे अमेरिका के बड़े प्रगतिशील चेहरों का उन्हें खुलकर समर्थन मिला।

जनता से जुड़ते मुद्दे: अल-सैयद का मुख्य नारा “राजनीति से पैसे का असर ख़त्म करो और लोगों की जेब में पैसा पहुँचाओ” मतदाताओं के सिर चढ़कर बोला। वे ‘मेडिकेयर फॉर ऑल’ (सभी के लिए मुफ्त स्वास्थ्य सेवा), दवाओं की दरें घटाने और अमीरों पर अधिक टैक्स लगाने जैसी नीतियों के प्रखर समर्थक हैं।

न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी का समर्थन: हाल ही में न्यूयॉर्क के मेयर बने ज़ोहरान ममदानी ने भी अल-सैयद के पक्ष में जमकर माहौल बनाया है, जिससे अमेरिका के युवा व प्रगतिशील मतदाताओं में अल-सैयद का क्रेज़ और बढ़ गया है।

ट्रंप की बौखलाहट : किस बात से चिढ़े हैं पूर्व राष्ट्रपति?

अब्दुल अल-सैयद की बढ़ती लोकप्रियता और सीनेट में उनकी संभावित पहुंच से डोनाल्ड ट्रंप इस कदर चिढ़ गए हैं कि उन्होंने सार्वजनिक मंचों से लेकर सोशल मीडिया पर सीधे हमले तेज कर दिए हैं।

1. कम्युनिस्ट और ‘इज़राइल-विरोधी का ठप्पा

लास वेगास के एक कार्यक्रम में ट्रंप ने अल-सैयद पर निशाना साधते हुए कहा-अब्दुल अल-सैयद यहूदियों और इज़राइल से नफ़रत करते हैं। वे नफ़रत से भरे व्यक्ति हैं। उनकी राजनीति अमेरिका में तबाही, अपराध और शर्मिंदगी लाएगी।”

हालांकि, अल-सैयद ने सीएनएन के माध्यम से ट्रंप के आरोपों का खंडन करते हुए स्पष्ट किया है कि वे पूरी तरह से यहूदी-विरोधी (एंटीसेमिटिज़्म) विचारों की निंदा करते हैं, यहूदी मतदाताओं की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं और एक पूंजीवादी (Capitalist) विचारधारा में विश्वास रखते हैं।

‘फिलिबस्टर’ खत्म करने के रुख से डरे ट्रंप

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर अल-सैयद पर सबसे बड़ा हमला बोलते हुए लिखा कि अल-सैयद सीनेट की ‘फिलिबस्टर’ (Filibuster) परंपरा को खत्म करने के प्रति जुनूनी हैं।

ट्रंप का डर: ट्रंप का मानना है कि यदि अल-सैयद इसमें सफल हो जाते हैं, तो डेमोक्रेट्स को अतिरिक्त सीनेटर और प्रतिनिधि मिलेंगे, सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाकर 23 कर दी जाएगी और रिपब्लिकन पार्टी लंबे समय के लिए सत्ता से बाहर हो सकती है।

अल-सैयद का करारा जवाब

ट्रंप के तीखे हमलों पर तंज कसते हुए अल-सैयद ने एक्स (X) पर लिखा : अपने बारे में इससे अच्छा तो मैं भी नहीं बता सकता था।

साथ ही उन्होंने कहा कि देश इस समय महंगाई से जूझ रहा है और लोग 5 डॉलर प्रति गैलन पेट्रोल खरीदने पर मजबूर हैं, लेकिन ट्रंप और उनकी पार्टी केवल उनके (अल-सैयद) ऊपर ध्यान केंद्रित करने में व्यस्त हैं।

2028 के राष्ट्रपति चुनाव की पटकथा?

मिशिगन के इस सीनेट चुनाव के नतीजे यह तय करेंगे कि अमेरिकी सीनेट पर किस पार्टी का कब्जा होगा। यदि नवंबर में होने वाले आम चुनाव में अल-सैयद रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स को हरा देते हैं, तो यह अमेरिका के राजनीतिक इतिहास का बड़ा मोड़ होगा। यह जीत साबित करेगी कि स्विंग स्टेट्स में भी प्रगतिशील और वामपंथी नीतियां रंग ला सकती हैं, जो 2028 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी का चेहरा तय करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाएगा।

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