विश्व युद्ध का खतरा टला! राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर होने वाले नए हमले रोके, बोले- डील पक्की, जल्द होगी घोषणा

  • ट्रंप की घुड़की और ‘एस्केलेट टू डी-एस्केलेट’ रणनीति आई काम; ईरान के तेल ठिकानों और द्वीपों को जब्त करने की दी थी धमकी

  • तेहरान में युद्ध समाप्ति की आहट से राहत, लेकिन इजरायल के रुख और सुरक्षा गारंटी को लेकर संशय बरकरार

 वॉशिंगटन/तेहरान। मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) से इस वक्त दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर लगातार तीसरे दिन होने वाले तय सैन्य हमलों (Scheduled Strikes) को अचानक रद्द करने का एलान किया है। व्हाइट हाउस में एक ब्रीफिंग के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि तेहरान के साथ एक बड़ा ऐतिहासिक समझौता (Tehran Deal) लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुका है, जिस पर सभी पक्षों ने सहमति जता दी है। ट्रंप ने कहा कि इस समझौते पर हस्ताक्षर करने के ‘समय और स्थान’ की घोषणा जल्द ही की जाएगी।

इस घोषणा से कुछ ही घंटे पहले ट्रंप ने ईरान को ‘बहुत गंभीर’ परिणाम भुगतने की चेतावनी दी थी और धमकी दी थी कि अमेरिकी सेना ईरान के सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘खार्ग द्वीप’ (Kharg Island) और उसके अन्य तेल बुनियादी ढांचों पर कब्जा कर लेगी।

क्या काम कर गई ट्रंप की ‘दबाव बनाकर शांत करने’ की रणनीति?

नाटो डिफेंस कॉलेज के अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ रिचर्ड वीट्ज ने ‘अल जजीरा’ को बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के खिलाफ “एस्केलेट टू डी-एस्केलेट” (तनाव बढ़ाकर शांत करना) की रणनीति का इस्तेमाल किया है।

  • रणनीति का गणित: इस रणनीति के तहत किसी सीमित या तीव्र संघर्ष को खत्म करने के लिए सामने वाले को बड़े और विनाशकारी हमले की धमकी दी जाती है ताकि उसे समझौते की मेज पर लाया जा सके।

  • दबाव का असर: ट्रंप द्वारा ईरान के द्वीपों और तेल ठिकानों को जब्त करने की ताजा धमकी इसी रणनीति का हिस्सा थी, जो फिलहाल कारगर साबित होती दिख रही है। हालांकि, इस समझौते की बारीक शर्तें क्या हैं और इन्हें कैसे लागू किया जाएगा, इस पर अभी भी थोड़ी अनिश्चितता बनी हुई है।

ईरान की प्राथमिकताएं: प्रतिबंधों से राहत और सुरक्षा की गारंटी

दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय ने अभी तक किसी अंतिम और निश्चित फैसले की पुष्टि नहीं की है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस डील में तेहरान की दो मुख्य शर्तें हैं:

  1. सुरक्षा गारंटी: अमेरिका की ओर से यह लिखित आश्वासन कि भविष्य में ईरान पर कोई हमला नहीं होगा। हालांकि, अमेरिका अपने स्तर पर यह गारंटी दे सकता है, लेकिन वह इजरायल की तरफ से ऐसी कोई गारंटी नहीं दे सकता। ऐसे में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस डील को स्वीकार करेंगे या नहीं, यह एक बड़ा सवाल है।

  2. प्रतिबंधों से मुक्ति: युद्ध और अमेरिकी आर्थिक नाकेबंदी (Blockade) के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। ऐसे में ईरान तुरंत अपनी फ्रीज की गई संपत्तियों को बहाल कराना और प्रतिबंधों में छूट चाहता है।

युद्ध के मोर्चे से जुड़ी अन्य बड़ी हलचलें:

  • हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव: इस शांति वार्ता के दावों के बीच भी जमीनी स्तर पर तनाव कम नहीं हुआ है। गुरुवार रात ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे वाणिज्यिक जहाजों पर आत्मघाती ड्रोन से हमला करने का प्रयास किया, जिसे अमेरिकी सेना ने मार गिराया। ईरान ने इस पूरे समुद्री रास्ते को बंद घोषित कर रखा है।

  • इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष पर अंतरराष्ट्रीय फंड: इजरायल-फिलिस्तीन विवाद के बीच ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और ब्रिटेन ने मिलकर 4 मिलियन डॉलर का एक संयुक्त शांति कोष (Peace Fund) लॉन्च किया है। यह फंड ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ (दो-राष्ट्र सिद्धांत) को बढ़ावा देने के लिए जमीनी स्तर पर काम करने वाले युवा और महिला संगठनों की मदद करेगा।

तेहरान की जनता को शांति का इंतजार

ईरान की राजधानी तेहरान से आ रही रिपोर्टों के अनुसार, आम जनता इस संभावित शांति समझौते से बेहद खुश है क्योंकि युद्ध के कारण उन्होंने भारी आर्थिक तंगी का सामना किया है और कई नागरिकों की जान भी गई है। हालांकि, ईरान का नेतृत्व अपनी जनता को यह समझाने में जुटा है कि उनके द्वारा दिए गए बलिदान व्यर्थ नहीं जाएंगे और इस समझौते के बाद ईरान अंतरराष्ट्रीय मंच पर और अधिक संप्रभु व मजबूत होकर उभरेगा।

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