फोटो एंड रिपोर्ट कमल कुमावत, उदयपुर
अगर किसी मंचन को बॉक्स ऑफिस की भाषा में ‘फुल पैसा वसूल’ और रोंगटे खड़े कर देने वाला ड्रामा कहा जाए, तो उदयपुर के सूरजपोल स्थित निम्बार्क महाविद्यालय में चल रही रामलीला का सातवां दिन इसका सटीक उदाहरण है। श्रीराम लीला समिति द्वारा आयोजित इस मंचन ने साबित कर दिया कि जब कंटेंट में दम हो और कलाकारों की डिलीवरी में जान, तो दर्शक न सिर्फ सीट से चिपके रहते हैं बल्कि क्लाइमेक्स में तालियों और आंसुओं के साथ रिस्पॉन्ड करते हैं।
गुरुवार की शाम का स्क्रीनप्ले बेहद टाइट और ग्रिपिंग था। शुरुआत शांत और सौम्य ऋषि मिलन से हुई, जिसने माहौल को खूबसूरती से सेट किया। लेकिन असली ड्रामा तब शुरू हुआ जब शूर्पणखा के नासिका भंग और खर-दूषण वध का सीक्वेंस आया—कलाकारों की एनर्जी और बॉडी लैंग्वेज ने स्टेज पर जबरदस्त थ्रिल और पेस पैदा कर दिया।
इसके बाद आया शो का सबसे बड़ा इमोशनल टर्निंग पॉइंट—सीता हरण और जटायु-रावण का क्लैश। रावण की क्रूरता के सामने धर्म की रक्षा के लिए बूढ़े जटायु की भिड़ंत का एक्शन कोरियोग्राफी इतना प्रभावी था कि पूरा हॉल स्तब्ध रह गया।
लेकिन फिल्म के ‘प्री-इंटरवल’ या यूं कहें कि इस एपिसोड का सबसे बड़ा ‘टीयर-जर्कर’ सीन था प्रभु श्रीराम और मरणासन्न जटायु का मिलन। जब पंख कटे जटायु ने प्रभु की गोद में दम तोड़ा और बैकग्राउंड में मानस की चौपाई—”नाथ जुग जुग जियो तुव दासा…” गूंजी, तो शायद ही कोई ऐसा दर्शक रहा हो जिसकी आंखें नम न हुई हों। यह प्योर इमोशनल कनेक्ट था, जो आज के दौर के बड़े-बड़े सिनेमाई पर्दों पर भी कम ही देखने को मिलता है।
पुष्टिमार्गीय श्री कृष्ण लीला संस्थान (वृंदावन) के 40 कलाकारों की टोली, जिसका निर्देशन वेदप्रकाश भारद्वाज, सीताराम भारद्वाज और घनश्याम शर्मा की तिकड़ी कर रही है, हर फ्रेम में जान फूंक रही है। संवाद अदायगी, टाइमिंग और कैरेक्टर ग्रैस्पिंग लाजवाब है। समिति अध्यक्ष धर्मनारायण जोशी ने भी इस बात को रेखांकित किया कि रामकथा का यह कैनवास आज के समाज के लिए कितना रिलेवेंट है।
शो में पहुंचे वीआईपीज और रिएक्शन
मंचन के दौरान सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. कैलाश डागा, बार काउंसिल सदस्य रतन सिंह राव, प्रताप गौरव केंद्र के रमन सूद सहित शहर के कई प्रबुद्ध चेहरे मौजूद रहे। प्रो. डागा ने इसे कनेक्ट करते हुए सटीक ऑब्जर्वेशन दिया कि जिस तरह भगवान राम ने वनवासियों को जोड़कर अन्याय के खिलाफ मोर्चा खोला, उसी तरह मेवाड़ की माटी पर महाराणा प्रताप ने भी उसी पदचिह्न पर चलकर इतिहास रचा।
आगे क्या है लाइन-अप? (अपकमिंग अट्रैक्शन्स)
आयोजन समिति के डॉ. विजय प्रकाश विप्लवी के अनुसार, शो का पेस अब और तेज होने वाला है:
शुक्रवार (16 अक्टूबर): स्क्रीन पर दिखेगा शबरी मिलन, राम-सुग्रीव अलायंस, सीता की खोज और सबसे बड़ा विजुअल स्पेक्टेकल—’हनुमान द्वारा लंका दहन’।
शनिवार (17 अक्टूबर): हाई-ड्रामा सीन्स—सेतुबंध निर्माण, विभीषण शरणागति, अंगद-रावण का माइंडगेम डायलॉग और दिल दहला देने वाला ‘लक्ष्मण शक्ति’ सीक्वेंस।
कुल मिलाकर, निम्बार्क कॉलेज के इस मंच पर आस्था, उच्च-स्तरीय अभिनय और संवेदनाओं की ऐसी जुगलबंदी चल रही है जिसे मिस करना किसी भी कला और संस्कृति प्रेमी के लिए घाटे का सौदा होगा!
समिति अध्यक्ष धर्मनारायण जोशी ने मंचन के दौरान मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों व चरित्र की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पुष्टिमार्गीय श्री कृष्ण लीला संस्थान वृंदावन के प्रमुख वेदप्रकाश भारद्वाज, सीताराम भारद्वाज एवं घनश्याम शर्मा के सान्निध्य में 40 कलाकार रामलीला का सजीव मंचन कर रहे हैं।
अतिथियों का सम्मान
—महासचिव भंवर लाल शर्मा ने बताया कि अतिथि के रूप में सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कैलाश डागा, राजस्थान बार काउन्सिल के सदस्य एडवोकेट रतन सिंह राव, प्रताप गौरव केन्द्र के पदाधिकारी रमन सूद, बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष महेन्द्र नागदा, मनीष शर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता ऋषभ जैन, वन्दना उदावत, पूर्व राज्य मंत्री हरीश राजानी, सिंधी समाज के वरिष्ठ संरक्षक प्रतापराय चुघ, पानेरियों की मादड़ी ग्रामसभा के अध्यक्ष बंशीलाल मेनारिया, पूर्व अध्यक्ष रामनारायण मेनारिया, उदयलाल मेनारिया, पिछोलिया नागदा समाज के अध्यक्ष मांगीलाल नागदा, पालीवाल प्रिंटर्स के ख्यालीलाल पालीवाल, पार्षद कुलदीप मेहता, पारीक समाज के संरक्षक हरिशंकर तिवारी, राजकुमार पारीक, निम्बार्क संस्थान के धर्मनारायण नागदा, सामाजिक कार्यकर्ता हिम्मतराम जोशी, शैव्यानारायण जोशी, इतिहास संकलन समिति चित्तौड़ प्रांत के संगठन मंत्री रमेशचंद्र शुक्ल का सम्मान किया गया।
सभी अतिथियों का सम्मान अध्यक्ष धर्मनारायण जोशी, डॉ. विजय विप्लवी, समन्वयक अशोक बाबेल, हरीश मारवाड़ा, प्रवक्ता कौशल मूंदड़ा, चेतन माली, चैनशंकर दशोरा, धरणीधर तिवारी, जगन्नाथ शर्मा, निर्मल चौबीसा, दीपक डांगी, अरुण त्रिवेदी, एडवोकेट दिनेश गुप्ता आदि कार्यकर्ताओं ने किया।
महाराणा प्रताप ने भी किया श्री राम का अनुसरण – कुलगुरु
-सुविवि के कुलगुरु प्रो. कैलाश डागा ने कहा कि भगवान श्रीराम ने अपने आसपास वन में रहने वालों को संगठित करके अन्याय के विरुद्ध संघर्ष किया और कालांतर में मेवाड़धरा पर प्रातःस्मरणीय महाराणा प्रताप ने भी इसी मार्ग का अनुसरण किया। बार काउंसिल के सदस्य रतन सिंह राव ने इस अवसर कहा कि रामचरित प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणादायक पाथेय है। यह आयोजन समाज में संस्कार जागरण का सार्थक प्रयास है।
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