
नई दिल्ली। भारत आज दुनिया के लिए किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य देखभाल का सबसे पसंदीदा गंतव्य बनकर उभरा है। विश्व स्तरीय चिकित्सा अवसंरचना, कुशल पेशेवरों और पारंपरिक ‘आयुष’ (AYUSH) पद्धतियों के अनूठे संगम ने भारत को मेडिकल वैल्यू ट्रैवल (MVT) के वैश्विक मानचित्र पर शीर्ष पर पहुंचा दिया है।
आंकड़ों में भारत की सफलता
भारत के प्रति अंतरराष्ट्रीय मरीजों का भरोसा इस कदर बढ़ा है कि वर्ष 2020 में भारत आने वाले मरीजों की संख्या जो महज 1,82,945 थी, वह 2024 तक बढ़कर 6,44,387 हो गई है। योग, आयुर्वेद और समग्र कल्याण प्रणालियों ने इस वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
‘वन अर्थ वन हेल्थ’: प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘वन अर्थ वन हेल्थ’ के मंत्र के साथ भारत की पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक आंदोलन बना दिया है। प्रधानमंत्री के अनुसार:
“भारत की आयुर्वेद और योग जैसी प्रणालियां आधुनिक दुनिया को प्राचीन भारत की देन हैं। ये न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य का भी समाधान प्रदान करती हैं।”
इस विश्वास को और मजबूत करने के लिए हाल ही में ‘आयुष गुणवत्ता मार्क’ का शुभारंभ किया गया है, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सेवाओं की गारंटी देता है।
नीतिगत पहल और सुगम पहुंच
भारत सरकार ने चिकित्सा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं:
आयुष वीजा: विदेशी नागरिकों के लिए विशेष आयुष वीजा की शुरुआत की गई है ताकि वे आसानी से भारत आकर उपचार करा सकें।
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI): चिकित्सा अवसंरचना में 100% FDI की अनुमति दी गई है।
बीमा कवरेज: लगभग 27 बीमा कंपनियां अब आयुष उपचारों को कवर कर रही हैं, जिससे विदेशी मरीजों का वित्तीय बोझ कम हुआ है।
कौशल विकास: स्वास्थ्य क्षेत्र कौशल परिषद ने 2021 से अब तक 37,000 से अधिक आयुष पेशेवरों को प्रमाणित किया है, जिससे सेवा की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।
एकीकृत स्वास्थ्य सेवा मॉडल
भारत की असली ताकत उसके एकीकृत दृष्टिकोण में है। यहाँ जटिल शल्य चिकित्सा (Modern Surgery) के साथ-साथ गंभीर बीमारियों, पुनर्वास और जीवनशैली विकारों के लिए आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसे साक्ष्य-आधारित समाधान एक ही छत के नीचे उपलब्ध हैं।
गुणवत्तापूर्ण मानकीकरण, डिजिटल सुविधा और किफायती लागत के कारण भारत न केवल एक उपचार केंद्र, बल्कि वैश्विक कल्याण (Wellness) की राजधानी के रूप में स्थापित हो चुका है। 2025 में होने वाले महाकुंभ जैसे आयोजनों के माध्यम से भारत अपनी इन सांस्कृतिक और चिकित्सा शक्तियों का वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रचार कर रहा है।
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