
तेहरान। आयतुल्ला सैय्यद मुजतबा खमेनेई के ईरान के नए सर्वोच्च नेता के रूप में चयन ने पश्चिमी मीडिया और रणनीतिकारों के उन तमाम अनुमानों को ध्वस्त कर दिया है, जो ईरान के पतन की भविष्यवाणी कर रहे थे। ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ से लेकर ‘बीबीसी’ तक की कवरेज अब एक “संस्थानिक बेचैनी” को दर्शा रही है, जहाँ उन्हें मजबूरन ईरान की राजनैतिक स्थिरता को स्वीकार करना पड़ रहा है।
पश्चिमी मीडिया का बदला हुआ सुर
पश्चिमी मीडिया आउटलेट्स, जो पहले ईरान में गुटबाजी और विद्रोह की उम्मीद जता रहे थे, अब अपनी रिपोर्टिंग में निम्नलिखित तथ्यों को स्वीकार कर रहे हैं:
संस्थानिक मजबूती (The Economist) : ‘द इकोनॉमिस्ट’ ने स्वीकार किया कि यह नियुक्ति इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि इस्लामिक गणराज्य अभी भी “पूरी तरह बरकरार” (Still Intact) है। पत्रिका ने यह भी माना कि मुजतबा खमेनेई का व्यक्तित्व “विनम्र और शर्मीला” है, जो उन्हें एक गंभीर नेता बनाता है।
धार्मिक योग्यता (New York Times) : फर्नाज फसीही ने रिपोर्ट किया कि मुजतबा खमेनेई के पास पद संभालने के लिए “पूर्ण धार्मिक योग्यताएं” हैं। वे शिया मदरसों में लोकप्रिय शिक्षक रहे हैं, जो उनकी विद्वत्ता को दर्शाता है।
सैन्य और सुरक्षा अनुभव : विश्लेषकों के अनुसार, वे सुरक्षा और सैन्य तंत्र को चलाने में माहिर हैं, जो मौजूदा युद्ध की स्थिति में ईरान के लिए सबसे सटीक चयन है।
‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ बना ‘एपिक फेल्योर’
‘फाइनेंशियल टाइम्स’ के मुख्य विदेशी मामलों के टिप्पणीकार गॉर्डन राचमैन ने सोशल मीडिया पर एक कड़वा सच साझा किया:
“तेल $110 प्रति बैरल पर है और ईरान में एक और खमेनेई सत्ता में हैं। ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ अब ‘एपिक फेल्योर’ (महा-विफलता) में बदलने के कगार पर है।”
यह बयान दर्शाता है कि वाशिंगटन और तेल अवीव की ‘मैक्सिमम प्रेशर’ और सैन्य हमलों की रणनीति ने ईरान को तोड़ने के बजाय उसे और अधिक एकजुट कर दिया है।
निजी क्षति और राष्ट्रीय संकल्प
बीबीसी और टाइम मैगजीन ने एक मानवीय पहलू को रेखांकित किया है जो ईरान की भविष्य की नीति को प्रभावित करेगा।
प्रतिरोध का चेहरा : मुजतबा खमेनेई ने अमेरिकी-इजरायली हमलों में अपने पिता, माता और पत्नी को खो दिया है।
अटूट रुख : मीडिया का मानना है कि जिस व्यक्ति ने अपना सब कुछ खो दिया हो, उसके पश्चिमी दबाव के आगे झुकने की संभावना न के बराबर है। यह निजी दुख अब एक राष्ट्रीय “प्रतिरोध” के संकल्प में बदल चुका है।
युवा पीढ़ी का समर्थन
रॉयटर्स ने तेहरान की सड़कों पर उमड़ी भीड़ और युवाओं के उत्साह को कवर किया है। 21 वर्षीय छात्रा ज़हरा मीरबाघेरी का बयान पश्चिमी स्क्रिप्ट से बिल्कुल अलग था: “यह हमारे दुश्मनों के चेहरे पर एक तमाचा है जिन्होंने सोचा था कि मेरे पिता (पूर्व नेता) की हत्या से व्यवस्था ढह जाएगी।”
पश्चिमी मीडिया अब यह स्वीकार करने लगा है कि ईरान में सत्ता का हस्तांतरण बिना किसी आंतरिक कलह के, संवैधानिक और संस्थागत तरीके से संपन्न हुआ है। मुजतबा खमेनेई का नेतृत्व केवल निरंतरता नहीं, बल्कि क्रांतिकारी सिद्धांतों का और अधिक गहरा होना है।
About Author
You may also like
पेपर लीक के मुद्दे पर आखिर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, प्रधानमंत्री को भेजा त्यागपत्र
गोगुंदा में कलयुगी गुस्सा : मां और भाई की चीखों के बीच पलक झपकते ही उजाड़ दिया हंसता-खेलता संसार; तलवार के एक वार से ली युवक की जान
मॉर्निंग न्यूज बुलेटिन : सीजेपी का प्रधान के इस्तीफे की मांग से कोई सममझौता नहीं, जंतर-मंतर पर हुमा कुरैशी, दिल्ली मेट्रो के 16 स्टेशन बंद…जानिए सुबह की बड़ी खबरें
दिल्ली में सड़क से संसद तक महासंग्राम
स्वरूपसागर की लहरों में जब डिगने लगे सांसों के कदम : दो साहसी युवकों और कालिका गश्ती टीम ने पेश की इंसानियत की अनूठी मिसाल
