उदयपुर में कन्हैयालाल के बेटे के विरोध के बाद बड़ा फैसला : डीएसपी गोविंद सिंह की ज्वाइनिंग पर लगी रोक

उदयपुर। बांसवाड़ा से उदयपुर ट्रांसफर होकर आए पुलिस उपअधीक्षक (DSP) गोविंद सिंह राजपुरोहित की ज्वाइनिंग पर भारी विरोध के बाद फिलहाल रोक लगा दी गई है। बहुचर्चित कन्हैयालाल हत्याकांड के समय लापरवाही बरतने के आरोप में निलंबित (सस्पेंड) हो चुके अधिकारी की उदयपुर में तैनाती की खबर मिलते ही पीड़ित परिवार और समाज में आक्रोश फैल गया था।

पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी की गई 141 डीएसपी की ट्रांसफर लिस्ट में उदयपुर गिर्वा के डीएसपी गोपाल चंदेल को बांसवाड़ा साइबर क्राइम भेजा गया था, जबकि बांसवाड़ा साइबर क्राइम से गोविंद सिंह राजपुरोहित का ट्रांसफर उदयपुर गिर्वा के पद पर किया गया था।

इस आदेश के आते ही दिवंगत कन्हैयालाल के बेटे यश तेली ने अपने समाज के लोगों के साथ बुधवार को उदयपुर आईजी गौरव श्रीवास्तव से मुलाकात की। पीड़ित परिवार ने आईजी को ज्ञापन सौंपकर मांग की कि गोविंद सिंह की ज्वाइनिंग किसी भी सूरत में उदयपुर जिले में नहीं होनी चाहिए, जिसके बाद प्रशासन ने तुरंत कदम उठाते हुए ज्वाइनिंग पर रोक लगा दी।

“पिताजी ने सुरक्षा मांगी थी, सीआई रहते हुए की लापरवाही”

आईजी से मुलाकात के बाद कन्हैयालाल के बेटे यश तेली ने तत्कालीन पुलिस व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा: “जब मेरे पिताजी की निर्मम हत्या हुई, उस समय गोविंद सिंह धानमंडी थाने के सीआई (CI) थे। मेरे पिताजी ने खुद थाने जाकर इनसे सुरक्षा की गुहार लगाई थी, लेकिन इन्होंने हमारी बात को अनसुना कर दिया। इन्होंने केस में घोर लापरवाही बरती और कोई ठोस सुरक्षा देने के बजाय दोनों पक्षों में महज एक समझौता करवाकर मामले को रफा-दफा कर दिया था। इसी ढिलाई की वजह से आरोपियों के हौसले बुलंद हुए और मेरे पिताजी की हत्या कर दी गई।”

विवादों के बाद पुलिस महकमे में हलचल

हत्याकांड में लापरवाही के चलते पूर्व में सस्पेंड हो चुके अधिकारी की दोबारा उसी शहर (उदयपुर) में अहम पद पर पोस्टिंग दिए जाने से सरकार और पुलिस मुख्यालय के फैसले पर सवाल उठने लगे थे। फिलहाल कानून-व्यवस्था और जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए अधिकारी की ज्वाइनिंग को होल्ड पर डाल दिया गया है, और अब इस मामले में अग्रिम आदेशों पर सबकी नजरें टिकी हैं।

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