MLSU के पूर्व कुलपति प्रो.अमेरिका सिंह निम्स यूनिवर्सिटी जयपुर के सलाहकार नियुक्त

उच्च शिक्षा के उत्कृष्टता केंद्र बनाने के साथ निम्स को विश्व के 100 और देश के 10 सर्वश्रेठ विश्वविद्यालय की ग्लोबल रैकिंग में शामिल करने कि प्रो. सिंह की संकल्पना

जयपुर। राजस्थान प्रदेश की उच्च शिक्षा को नई दिशा देने में प्रो.अमेरिका सिंह का महत्वपूर्ण योगदान, प्रो. सिंह के पूर्व कुलपति के रूप में उच्च शिक्षा में किये गए नवाचार और नवीन परियोजनाओं ने उच्च शिक्षा के राष्ट्रीय परिदृश्य में की विशेष ख्याति अर्जित

संस्थागत उत्कृष्टता के साथ उच्च शिक्षा के वैश्विक स्टडी डेस्टिनेशन बनने की ओर निम्स अग्रसर : प्रो. अमेरिका सिंह, पूर्व कुलपति

जयपुर, 30 मार्च, वरिष्ठ शिक्षाविद एवं मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर अमेरिका सिंह को निम्स विश्वविद्यालय, जयपुर ने अपना सलाहकार नियुक्त किया हैं। उन्होंने चेयरमैन डॉ.बीएस तोमर, प्रेसिडेंट डॉ. संदीप मिश्रा और रजिस्ट्रार डॉ. संदीप त्रिपाठी का आभार व्यक्त किया। गौरतलब है की सुविवि के पूर्व कुलपति के रूप में प्रो. अमेरिका सिंह ने लिक से हटकर कुछ अलग करने की कार्य शैली और उच्च शिक्षा से जुड़े अपने व्यापक दृष्टिकोण के साथ सम्पूर्ण प्रदेश में अलग पहचान स्थापति की थी।अकादमिक नवाचार, नवीन योजनाओं-परियोजनाओं, विश्वविद्यालय की उत्कृष्टता सहित असंख्य उपलब्धियां अर्जित करते हुए प्रो सिंह ने सुविवि को देशभर ने एक नहीं पहचान दी। प्रदेश में प्रथम बार विज्ञान कांग्रेस का आयोजन एवं श्री कल्लाजी वैदिक निजी विश्वविद्यालय का सुविवि में विलय जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं का निर्माण, संविधान पार्क की स्थापना, फेकल्टी ऑफ़ इंजीनियरिंग, फेकल्टी ऑफ़ आर्कीटेक्चर, नार्थ कैम्पस श्रीनाथ सेंटर और एक्सीलेंस, 50 से अधिक नवीन पाठ्यक्रम, सुविवि के मुख्य द्वार के निर्माण के माध्यम से उच्च शिक्षा के राष्ट्रिय परिदृश्य में विशेष ख्याति अर्जित की।

इस अवसर पर प्रो. सिंह ने कहा कि निम्स अपनी संस्थागत प्रतिबद्धता के साथ आज देश भर में उच्च शिक्षा के राष्ट्रीय फलक पर नित नए आयाम स्थापित कर रहा हैं। आपार संभावना से भरे निम्स विश्वविद्यालय को उच्च शिक्षा का वैश्विक गंतव्य बनाने की दिशा में हम कार्य करेंगे। राजस्थान प्रदेश को देश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में ‘वैश्विक स्टडी डेस्टिनेशन’ बनाने की दिशा में निम्स अपनी अग्रणी भूमिका निभाएगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति वैश्विक सहयोग और भारतीय शैक्षणिक संस्थानों की अकादमिक उत्कृष्टता का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। भारत को हमेशा उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए एक वैश्विक गंतव्य के रूप में देखा गया है। हमारा भारत नालंदा और तक्षशिला जैसे पारंपरिक संस्थानों का केंद्र है, जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करते हुए इस समृद्ध शैक्षिक संस्कृति ने भारत को अपनी शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए दुनिया भर से लाखों लोगो को आकर्षित किया हैं। हमारा प्रयास रहेगा की पुनः इसी साख के साथ हम हमारे विद्यार्थियों को वही माहौल प्रदान करे। भारत हमेशा से ज्ञान का देश रहा है। भारत की प्राचीन और समृद्ध शिक्षा तथा सांस्कृतिक विरासत में छात्रों को आकर्षित करने की जबरदस्त क्षमता थी, इसी क्षमता के साथ हमें आगे बढ़ना होगा।

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