सहकार से समृद्धि कॉन्फ्रेंस : सहकारिता क्षेत्र को मजबूत, पेशेवर और व्यावसायिक मॉडल के रूप में विकसित करना जरूरी – डॉ. आशीष कुमार भूटानी

उदयपुर। सहकारिता क्षेत्र को सुदृढ़, आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा लेक सिटी उदयपुर में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की दो दिवसीय “सहकार से समृद्धि” कॉन्फ्रेंस का शुक्रवार को समापन हुआ। इस कॉन्फ्रेंस में देशभर से आए प्रतिनिधियों की सहभागिता के साथ सहकारिता के भविष्य के रोडमैप पर गहन मंथन किया गया।

कॉन्फ्रेंस के दौरान आयोजित 12 विभिन्न सत्रों में “सहकार से समृद्धि” से जुड़ी योजनाओं, उपलब्धियों और चुनौतियों की समीक्षा की गई तथा सहकारिता क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए ठोस रणनीतियों पर विचार-विमर्श हुआ।


पारंपरिक सोच से आगे बढ़े सहकारिता मॉडल
समापन सत्र को संबोधित करते हुए सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने कहा कि सहकारिता क्षेत्र को अब पारंपरिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाकर एक मजबूत, पेशेवर और व्यावसायिक मॉडल के रूप में विकसित करना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस के दौरान हुई गहन चर्चाएं, प्रस्तुतियां और फीडबैक सत्र अत्यंत उपयोगी रहे हैं।

डॉ. भूटानी ने कहा कि प्राथमिक कृषि साख समितियां (पैक्स) सहकारी व्यवस्था की रीढ़ हैं। इनके कम्प्यूटरीकरण और डिजिटलीकरण से पारदर्शिता, कार्यकुशलता और विश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।


विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना पर कार्य
सहकारिता मंत्रालय की प्रमुख पहल अनाज भंडारण योजना का उल्लेख करते हुए डॉ. भूटानी ने बताया कि सहकारिता के माध्यम से विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना पर कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत

• सितंबर 2026 तक 5 लाख मीट्रिक टन,

• सितंबर 2027 तक 50 लाख मीट्रिक टन

भंडारण क्षमता वृद्धि का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

उन्होंने तय समय-सीमा में लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए नियमित निगरानी और प्रभावी क्रियान्वयन पर बल दिया।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और नई पहलें
डॉ. भूटानी ने सहकारी समितियों में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत नियमों के सरलीकरण, सदस्यता विस्तार, बेस्ट प्रैक्टिसेज के आदान-प्रदान तथा ‘भारत टैक्सी’ जैसी नई पहलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सहकारिता के समग्र विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को टीम भावना के साथ मिलकर कार्य करना होगा
राजस्थान में पैक्स सशक्तिकरण के प्रयास
कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन “सहकार से समृद्धि – पैक्स अहेड” सत्र में पैक्स के सुदृढ़ीकरण, कैशलेस पैक्स, सहकारिता स्टार्टअप इकोसिस्टम, जिला-विशिष्ट व्यवसाय योजनाएं, मॉडल सहकारी ग्राम और सदस्यता अभियानों पर विस्तृत चर्चा हुई।

इस सत्र में सहकारिता विभाग राजस्थान की शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार श्रीमती आनंदी ने अपने प्रस्तुतीकरण में निमोद एवं रामगढ़ सहकारी समितियों के सफल मॉडलों का उल्लेख करते हुए राज्य में पैक्स सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला।
अन्य सत्रों में नवाचार और अनुभव साझा
कॉन्फ्रेंस के विभिन्न सत्रों में तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, नाबार्ड और एफसीआई द्वारा भी प्रस्तुतीकरण दिए गए।

उत्तर-पूर्वी राज्यों में सहकारिता विकास, सफल सहकारिताओं के अनुभव, प्रौद्योगिकी आधारित मत्स्य एवं डेयरी समितियों के नवाचार, स्वयं सहायता समूहों एवं एफपीओ को पैक्स से जोड़ने, माइक्रो एटीएम, रूपे किसान क्रेडिट कार्ड वितरण तथा एनसीडीसी की सहकारिता प्रोत्साहन योजनाओं पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
समापन अवसर पर सहकारिता मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री सिद्धार्थ जैन ने कॉन्फ्रेंस की सफलता के लिए सभी प्रतिभागियों, वक्ताओं और सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त करते हुए सहकारिता क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण के लिए नई ऊर्जा के साथ कार्य करने का आह्वान किया।

कॉन्फ्रेंस के पश्चात प्रतिनिधियों ने उदयपुर एवं राजसमंद जिले की विभिन्न सहकारी समितियों का भ्रमण कर जमीनी स्तर पर किए जा रहे कार्यों की जानकारी भी प्राप्त की।

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