जयपुर/उदयपुर।
राजस्थान के खनन क्षेत्र के लिए केंद्र सरकार और भारतीय खान ब्यूरो (IBM) ने एक बड़ा और राहत भरा निर्णय लिया है। नए नोटिफिकेशन के अनुसार, अब 5 हेक्टेयर या उससे कम क्षेत्रफल वाली छोटी खदानों के मालिकों को अपने माइनिंग प्लान (Mining Plan) की मंजूरी के लिए उच्च कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
अजमेर और उदयपुर क्षेत्रीय कार्यालयों को मिले अधिकार
भारतीय खान ब्यूरो के महानियंत्रक (Controller General) द्वारा जारी आदेश के अनुसार, क्वार्ट्ज, फेल्डस्पार, अभ्रक (Mica) और बेराइट्स की उन खदानों के प्लान अब सीधे क्षेत्रीय स्तर पर मंजूर किए जा सकेंगे जिनका क्षेत्रफल 5 हेक्टेयर तक है। इसके लिए प्रदेश को दो प्रशासनिक क्षेत्रों (Zones) में विभाजित किया गया है:
1. उदयपुर क्षेत्रीय कार्यालय का अधिकार क्षेत्र: उदयपुर संभाग और आसपास के जिलों के लिए अब मंजूरी प्रक्रिया स्थानीय स्तर पर ही संपन्न होगी। इसमें शामिल प्रमुख जिले हैं:
उदयपुर, सलूंबर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, निंबाहेड़ा, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, डूंगरपुर।
सिरोही, पाली, जालौर, बाड़मेर, बालोतरा, जैसलमेर और सोजत सिटी।
2. अजमेर क्षेत्रीय कार्यालय का अधिकार क्षेत्र: भीलवाड़ा सहित राज्य के अन्य सभी शेष जिले जो उदयपुर के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते, वे अजमेर क्षेत्रीय कार्यालय के अंतर्गत आएंगे।
केंद्रीकृत व्यवस्था से मिली मुक्ति
इससे पहले माइनिंग प्लान की मंजूरी की प्रक्रिया काफी हद तक केंद्रीकृत थी, जिसके कारण छोटी खदानों के पट्टाधारकों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी और फाइलों के निस्तारण में काफी समय लगता था। विकेंद्रीकरण के इस कदम से न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, बल्कि माइनिंग क्लीयरेंस में होने वाली देरी में भी कमी आएगी।
मुख्य लाभ:
समय की बचत: स्थानीय स्तर पर फाइलें प्रोसेस होने से ‘टर्नअराउंड टाइम’ में सुधार होगा।
प्रशासनिक सुगमता: छोटे उद्यमियों को बड़े दफ्तरों के चक्कर काटने से निजात मिलेगी।
पारदर्शिता: क्षेत्रीय स्तर पर भौगोलिक स्थितियों की बेहतर समझ होने से प्रक्रिया सुगम होगी।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है, जिससे प्रदेश के हजारों छोटे खनन पट्टाधारकों को सीधा लाभ पहुँचने की उम्मीद है।
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