जब परम्परा बनी पूजा और श्रद्धा बनी विरासत… मेवाड़ की सदियों पुरानी राजपरम्परा के तहत डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने श्री जगन्नाथ रायजी को अर्पित किए पोशाक एवं भोग
उदयपुर। मेवाड़ की पावन धरती पर एक बार फिर वह दिव्य क्षण साकार हुआ, जब
उदयपुर। मेवाड़ की पावन धरती पर एक बार फिर वह दिव्य क्षण साकार हुआ, जब