
गाजा। गाजा में जारी संघर्ष के बीच हमास ने शुक्रवार को चार इसराइली बंधकों के शव इसराइली सेना को सौंप दिए। यह पहली बार है जब युद्धविराम लागू होने के बाद हमास ने मृत बंधकों के शव लौटाए हैं। इस घटनाक्रम को दोनों पक्षों के बीच चल रही वार्ता के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री कार्यालय की पुष्टि
इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने एक बयान जारी कर कहा कि इन शवों को औपचारिक पहचान के लिए जाफ़ा स्थित अबू कबीर फोरेंसिक संस्थान भेजा गया है। परीक्षण और जांच पूरी होने के बाद मृतकों की आधिकारिक पुष्टि की जाएगी और फिर उनके परिवारों को सूचित किया जाएगा।
हमास का दावा – ‘इसराइली हमलों में हुई मौत’
हमास ने एक बयान में दावा किया है कि जिन चार बंधकों के शव लौटाए गए हैं, वे इसराइली हवाई हमलों में मारे गए थे। हालांकि इसराइल ने इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
युद्ध के बीच कैदियों और बंधकों की अदला-बदली
इसराइल और हमास के बीच अब तक 24 बंधकों और 1,000 से अधिक कैदियों की अदला-बदली हो चुकी है। यह सिलसिला हाल के संघर्षविराम के बाद शुरू हुआ था, जिसमें दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता कर रहे कतर और मिस्र की अहम भूमिका रही है।
छह और बंधकों की रिहाई की उम्मीद
खबरों के मुताबिक, हमास ने संकेत दिया है कि वह शनिवार को छह और इसराइली बंधकों को रिहा करेगा। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि क्या इसके बदले में हमास की कोई शर्तें हैं।
क्या शांति वार्ता आगे बढ़ेगी?
विश्लेषकों का मानना है कि बंधकों और कैदियों की अदला-बदली से संघर्षविराम को और मजबूत करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसराइल और हमास के बीच पूर्ण शांति समझौते की संभावना फिलहाल धुंधली नजर आ रही है, क्योंकि दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े हुए हैं।
गौरतलब है कि गाजा में हालिया संघर्ष के बाद से अब तक हजारों लोग मारे जा चुके हैं, और अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों पक्षों से शांति बहाल करने की अपील कर रहा है।
About Author
You may also like
स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से ही क्यों फहराया जाता है तिरंगा? जानिए इसके पीछे का ऐतिहासिक महत्व और परंपरा
2047 तक बनकर रहेगा विकसित भारत, 140 करोड़ देशवासियों के पुरुषार्थ से हासिल होगा लक्ष्य : लाल किले से पीएम मोदी का आह्वान
80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर रोशनी से जगमगाई दिल्ली विधानसभा: स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने दी शुभकामनाएं
बंटवारा 1947 : असग़र वजाहत के कालजयी नाटक से रूपहले पर्दे तक, विभाजन का अनकहा दर्द और अनअटैच्ड औरतों की त्रासदी
उदयपुर : सहेलियों के संग सावन की रंगत, फोटो जर्नलिस्ट कमल कुमावत के कैमरे से देखिए हरियाली अमावस्या मेले के मनमोहक रंग
