
जयपुर। राजस्थान के एक छोटे से कस्बे दूदू में बैठा एक शख्स सरकारी दफ्तर की टेबल के पीछे मुस्कुराता रहा — नाम हरिप्रसाद मीणा। ओहदा – अधिशाषी अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग। काम – सरकार की सड़कें बनवाना, इमारतें खड़ी करवाना। मगर खेल इसके बहुत आगे का था।
नक्शे पे सड़कें बनती रहीं… और बैंक में करोड़ों की रकम।
सूत्रों ने जब एसीबी को कान में कुछ फुसफुसाया, तो कहानी खुलने लगी — और सामने आई एक ऐसी हकीकत, जो किसी वेब सीरीज़ से कम नहीं।
लक्ज़री की लत :
हरिप्रसाद मीणा की पसंद सस्ती नहीं थी —
• दो चमचमाती ऑडी कारें,
• एक स्कॉर्पियो,
• एक फॉर्ड एण्डेवर,
• और एक रॉयल एनफील्ड —
कीमत करीब 2 करोड़ रुपये।
सरकारी तनख्वाह में ये सब कैसे? जवाब किसी के पास नहीं।
विदेशी उड़ानें और फाइव स्टार ठहराव:
जहां आम आदमी विदेश जाने से पहले बैंक बैलेंस चेक करता है, वहीं ये साहब 45 लाख उड़ाकर आ गए — बिना पलक झपकाए।
घर नहीं, महल चाहिए था :
• जयपुर के जगतपुरा में दो-दो लाइफस्टाइल अपार्टमेंट्स — यूनिक एम्पोरिया और यूनिक न्यू टाउन
• कीमत: करीब 1.5 करोड़ रुपये
• और दौसा के गांव बगड़ी में एक लक्ज़री फार्म हाउस — शहर से दूर, आलीशान सुकून का अड्डा।
बैंकिंग का भी शौक़ीन:
• कुल 19 बैंक खाते,
• करोड़ों की एंट्रियां,
• कई लोन लिए, और चमत्कारी ढंग से जल्दी चुका भी दिए।
सवाल वही — पैसे आए कहां से?
एसीबी की दस्तक :
फिर आया ऑपरेशन “AUDI” —
एक साथ जयपुर, दूदू और दौसा में 5 जगहों पर रेड।
दफ़्तर से लेकर फार्महाउस तक, किराए के मकान से लेकर अपार्टमेंट्स तक — हर जगह तलाशी।
यह कहानी सिर्फ एक अफसर की नहीं, यह उस सिस्टम की भी कहानी है जो तब तक आंखें मूंदे बैठा रहता है जब तक कोई “ऑडी” में बैठकर मुस्कराता नहीं।
एसीबी की इस रेड ने एक बार फिर बताया कि सड़क बनवाने वाला इंजीनियर अगर मन बना ले, तो खुद की ही रॉयल रोड बना सकता है — बस उसपर “ईमानदारी” की कोई गारंटी नहीं होती।
सोर्स : ACB मुख्यालय
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