
उदयपुर। दुनिया के सबसे बड़े एकीकृत जिंक उत्पादक और शीर्ष पांच चांदी उत्पादकों में से एक, हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड ने अपने जिंकसिटी-उदयपुर स्थित जिंक स्मेल्टर देबारी से चित्तौड़गढ़ स्थित विश्व के सबसे बड़े सिंगल-लोकेशन इंटीग्रेटेड जिंक-लेड स्मेल्टर तक 40 इलेक्ट्रिक बल्कर ट्रकों का संचालन शुरू किया। यह पहल कंपनी के सस्टेनेबल लॉजिस्टिक्स और 2050 तक नेट जीरो उत्सर्जन के विज़न को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह फ्लीट एनविरो व्हील्स मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड के साथ साझेदारी में संचालित की जा रही है, जिसमें 10 इलेक्ट्रिक बल्करों का पहला बैच सफलतापूर्वक परिचालन में है और शेष वाहन आने वाले महीनों में शामिल होंगे। रिन्यूएबल एनर्जी से संचालित ये इलेक्ट्रिक वाहनों से कार्बन उत्सर्जन में महत्वपूर्ण कमी आएगी, वाहन उपलब्धता बढ़ेगी और समग्र परिवहन सुरक्षा तथा दक्षता में सुधार होगा।
साथ ही, हिन्दुस्तान जिंक ने कर्मचारियों के परिवहन के लिए इलेक्ट्रिक बसों को तैनात करने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए। यह कदम पारंपरिक डीजल-संचालित वाहनों से इलेक्ट्रिक विकल्पों की ओर बदलाव को दर्शाता है और स्कोप 3 उत्सर्जन को कम करने के साथ-साथ कर्मचारियों के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और सस्टेनेबल आवागमन सुनिश्चित करता है।
कंपनी के सीईओ, अरुण मिश्रा, ने कहा, “हम अपनी लॉजिस्टिक रणनीति के मूल में सस्टेनेबिलिटी को शामिल कर, एक स्वच्छ और भविष्य के लिए तैयार पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। ये इलेक्ट्रिक मोबिलिटी समाधान न केवल हमारे कार्बन फुटप्रिंट को कम कर रहे हैं, बल्कि परिचालन दक्षता, कार्यबल सुरक्षा और दीर्घकालिक मूल्य भी बढ़ा रहे हैं। यह हमारी व्यापक रणनीति के अनुरूप है, जो भारत में हरित औद्योगिक विकास को सक्षम बनाने पर केंद्रित है।”
हिन्दुस्तान जिंक लगातार ऊर्जा दक्षता और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। कंपनी ने 530 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा आपूर्ति एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं और पिछले वित्त वर्ष में इसका पहला प्रवाह शुरू किया। इसके अतिरिक्त, कैप्टिव पावर प्लांट में टर्बाइन का नवीनीकरण, सेलहाउस दक्षता वृद्धि, वेरिएबल फ्रीक्वेंसी ड्राइव्स की स्थापना और पारंपरिक ईंधन से स्वच्छ विकल्पों की ओर बदलाव जैसी परियोजनाओं में महत्वपूर्ण निवेश किया गया है।
एनविरो व्हील्स मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ, प्रवीण सोमानी, ने कहा, “हिन्दुस्तान जिंक का यह प्रयास भारत के विनिर्माण क्षेत्र में मील का पत्थर है। हम उनके ग्रीन लॉजिस्टिक्स और कार्बन उत्सर्जन कम करने के दृष्टिकोण के प्रति प्रतिबद्ध हैं और भारत के सतत विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में हमारी साझेदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।”
यह पहल हिन्दुस्तान जिंक की डीकार्बोनाइजेशन रणनीति का हिस्सा है, जिसमें एलएनजी और बैटरी चालित ट्रकों का एकीकरण, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग और उन्नत ऊर्जा दक्षता प्रौद्योगिकियों को अपनाना शामिल है।
उल्लेखनीय है कि हिन्दुस्तान जिंक हाल ही में इंटरनेशनल काउंसिल ऑन माइनिंग एंड मेटल्स 2025 में शामिल होने वाली पहली भारतीय कंपनी बन गई। यह कंपनी साइंस बेस्ड टारगेट इनिशिएटिव के तहत 1.5 डिग्री सेल्सियस ग्लोबल वार्मिंग सीमा के लक्ष्यों को सुरक्षित करने वाली धातु और खनन क्षेत्र की पहली भारतीय कंपनी भी है। लगातार दूसरे वर्ष, हिन्दुस्तान जिंक को एसएंडपी ग्लोबल सस्टेनेबिलिटी ईयरबुक में शीर्ष 1 प्रतिशत कंपनियों में शामिल किया गया और वैश्विक स्तर पर 62 उद्योग क्षेत्रों में से शीर्ष 66 कंपनियों में शुमार किया गया।
हिन्दुस्तान जिंक की यह पहल पर्यावरण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता, स्वच्छ और दक्ष लॉजिस्टिक्स समाधान और हरित औद्योगिक विकास को सशक्त बनाने की दिशा में उनके प्रयासों का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
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