
उदयपुर। उदयपुर के जीबीएच अमेरिकन हॉस्पिटल एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है। 12 दिन के नवजात शिशु की मौत के बाद अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा हुआ। परिजनों ने डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर इलाज में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।
जानकारी के अनुसार शिशु को आंख में तकलीफ की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का कहना है कि बच्चा भर्ती के दौरान सामान्य स्थिति में था, लेकिन रात के बाद अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। सुबह बच्चा अचेत अवस्था में मिला और कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि नर्सिंग स्टाफ द्वारा रात में दिए गए हाईडोज इंजेक्शन से बच्चे की हालत बिगड़ी, जिसकी समय रहते निगरानी और उपचार नहीं किया गया।
मासूम की मौत के बाद परिजन आक्रोशित हो गए और उन्होंने NICU के बाहर डॉक्टरों व नर्सिंग स्टाफ को बुलाने की मांग की। अस्पताल परिसर में तनाव की स्थिति बन गई और बात धक्का-मुक्की तक पहुंच गई। हालात बेकाबू होते देख प्रतापनगर थाना पुलिस को मौके पर बुलाना पड़ा। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद मामला शांत हुआ, लेकिन परिजनों ने थाने में शिकायत दर्ज कराकर अस्पताल स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
यह घटना निजी अस्पतालों में नवजातों के इलाज, दवाइयों की डोजिंग और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। NICU जैसे संवेदनशील विभाग में यदि दवाओं की मात्रा और बच्चे की स्थिति पर सतत नजर नहीं रखी गई, तो यह सीधी लापरवाही मानी जा सकती है। परिजनों का कहना है कि उन्हें इलाज की सही जानकारी नहीं दी गई और न ही किसी जोखिम के बारे में पहले से अवगत कराया गया।
हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। GBH ग्रुप के डॉ. आनंद झा का कहना है कि डॉक्टरों और स्टाफ ने बच्चे को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए और लापरवाही का आरोप निराधार है। बावजूद इसके, सवाल यह है कि अगर इलाज में कोई चूक नहीं थी तो कुछ ही घंटों में बच्चे की हालत अचानक कैसे बिगड़ गई।
फिलहाल मामला पुलिस जांच के दायरे में है, लेकिन यह घटना एक बार फिर निजी अस्पतालों की जवाबदेही, पारदर्शिता और मरीजों के परिजनों से संवाद की कमी को उजागर करती है। एक नवजात की मौत केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता पर बड़ा सवाल है।
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