उदयपुर फाइल्स : पीएम मोदी के आगमन से पहले विधानसभा में टीकाराम जूली का दावा-“मेरे पास हैं वो 5 वीडियो, क्या पुलिस का ‘ऑपरेशन डिलीट’ फेल?

उदयपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा से पहले उदयपुर फाइल्स की गूंज राजस्थान की विधानसभा के गलियारों में सुनाई दी। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने दावा किया है कि -“मेरे पास हैं वो 5 वीडियो, पुलिस के ‘ऑपरेशन डिलीट’ से पहले कथित वीडियो की कॉपी निकल गई थी। फिल्म के पहले हिस्से में हमने देखा कि कैसे रात के अंधेरे में पुलिस और कुछ ‘नकाबपोश’ हमलावर एक वकील के घर पर धावा बोलते हैं। अब पार्ट-2 में इस कहानी के विलेन और साइड-कैरक्टर्स पर से पर्दा हटने वाला है।

‘सब्बल और हथौड़ा’ – ये पुलिस है या स्पेशल फोर्स?

सीसीटीवी फुटेज में दिख रहा मंजर किसी बॉलीवुड फिल्म के अंडरवर्ल्ड सीन से कम नहीं है। रात के 4 बजे, डीएसपी गोपाल चंदेल की मौजूदगी में दो लड़के हाथों में हथौड़ा और सब्बल लेकर गलियों में घूम रहे हैं। सवाल यह है कि क्या अब राजस्थान पुलिस अपराधियों को पकड़ने के लिए ‘प्राइवेट बाउंसर्स’ का सहारा ले रही है? नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सीधा वार किया है— “अगर ये लड़के पुलिस के साथ नहीं थे, तो कानून की नाक के नीचे हथियार लेकर कैसे घूम रहे थे?”

कौन है वो ‘सूट-बूट’ वाला मिस्ट्री मैन?

वीडियो में एक छोटी हाइट का व्यक्ति सूट-बूट पहनकर पुलिस के साथ घर की ओर जाता दिख रहा है। पुलिस की इस ‘मिडनाइट रेड’ में इस ‘सिविलियन’ की क्या भूमिका थी? क्या यह किसी बड़े नेता का ‘खास आदमी’ था जो सबूतों को अपनी आंखों के सामने नष्ट होते देखना चाहता था? जूली का दावा है कि पुलिस की पूरी स्क्रिप्ट इसी ‘डिलीट मिशन’ के इर्द-गिर्द बुनी गई थी।

इंटरवल ट्विस्ट : “कॉपी मेरे पास है, फिक्र मत करो!”

विपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने फिल्म में तड़का लगाते हुए साफ कर दिया है कि पुलिस भले ही हार्ड डिस्क और डीवीआर ले गई हो, लेकिन ‘असली फिल्म’ की कॉपी उनके पास सुरक्षित है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि जल्द ही 4-5 ऐसे वीडियो सामने आएंगे, जो सत्ता पक्ष के कई दिग्गजों का असली चेहरा बेनकाब कर देंगे।

सत्ता पक्ष की खामोशी में छिपा है कौन सा राज?

हैरानी की बात यह है कि जिस मामले में बीजेपी की महिला नेता ने एआई (AI) वीडियो और ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाया है, उस पर पार्टी के बड़े सूरमाओं ने चुप्पी साध ली है। क्या यह खामोशी तूफान से पहले की शांति है? या फिर डर इस बात का है कि ‘उदयपुर फाइल्स’ के पन्ने खुले तो कई रसूखदारों के ‘आपत्तिजनक’ सच बाहर आ जाएंगे?

 

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