
मुंबई। महाराष्ट्र के नगर निगम चुनावों के शुरुआती रुझानों ने राज्य की शहरी राजनीति की तस्वीर लगभग साफ कर दी है। 29 में से 23 नगर निगमों में बीजेपी और उसके सहयोगी दलों (बीजेपी+) की बढ़त यह संकेत दे रही है कि महानगरों में मतदाताओं का भरोसा फिलहाल ‘महायुति’ के साथ मजबूती से जुड़ा हुआ है।
सबसे ज्यादा चर्चा बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की है। करीब तीन दशक तक ठाकरे गुट के वर्चस्व वाली इस देश की सबसे अमीर नगर निगम में बीजेपी-शिंदे शिवसेना गठबंधन की बढ़त सत्ता परिवर्तन की आहट दे रही है। यदि यह रुझान नतीजों में बदलता है तो इसका असर सिर्फ मुंबई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राज्य की पूरी राजनीति पर पड़ेगा।
मुंबई के साथ-साथ पुणे और नागपुर में बीजेपी गठबंधन की मजबूत स्थिति यह बताती है कि शहरी मतदाता विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर और स्थिर शासन को प्राथमिकता दे रहा है। पुणे में 90 से अधिक सीटों पर बढ़त और नागपुर में 113 सीटों के साथ एकतरफा प्रदर्शन बीजेपी की संगठनात्मक ताकत और नेतृत्व की स्वीकार्यता को रेखांकित करता है।
वहीं कांग्रेस के लिए लातूर और चंद्रपुर में बहुमत राहत जरूर है, लेकिन यह राहत ग्रामीण या सीमित क्षेत्रों तक सिमटी दिखाई देती है। बड़े शहरी केंद्रों में पार्टी की कमजोर मौजूदगी यह सवाल खड़ा करती है कि क्या कांग्रेस शहरी मतदाताओं से अपना खोया संवाद फिर से बना पाएगी।
चुनावी रुझानों के बीच पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज के आरोपों ने सियासी तापमान जरूर बढ़ाया है, लेकिन फिलहाल इससे नतीजों की दिशा प्रभावित होती नहीं दिख रही। कुल मिलाकर, ये नगर निगम चुनाव आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों का संकेतक बनकर उभरे हैं, जिनमें शहरी महाराष्ट्र का झुकाव साफ तौर पर ‘महायुति’ के पक्ष में नजर आ रहा है।
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