
उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर के सिटी पैलेस स्थित ऐतिहासिक माणक चौक में आज ‘परम्परा और आस्था का अद्भुत संगम’ देखने को मिला। मेवाड़ के 77वें श्री एकलिंग दीवान और महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउण्डेशन के अध्यक्ष डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने शताब्दियों पुरानी राजमर्यादा के अनुसार होलिका पूजन और प्रज्वलन किया।
राजसी वैभव और ‘महाराणा सल्यूट’
महोत्सव की शुरुआत तब हुई जब डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ पारंपरिक राजसी वेशभूषा और अपने लवाजमे (दलबल) के साथ माणक चौक पहुंचे। वहां मौजूद पैलेस गार्ड्स ने उन्हें गौरवशाली “महाराणा सल्यूट” प्रदान किया, जो मेवाड़ की प्राचीन सैन्य और राजकीय परंपरा का प्रतीक है।
वैदिक रीति से होलिका पूजन
विद्वान पंडितों के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच डॉ. लक्ष्यराज सिंह ने होलिका का विधिवत पूजन किया।
विधि-विधान: उन्होंने होलिका को पारंपरिक ओढ़नी ओढ़ाई, पुष्पमाला और श्रीफल अर्पित किए।
प्रज्वलन: राजपरिवार के सदस्यों के साथ होलिका की परिक्रमा करने के बाद शास्त्रोक्त विधि से अग्नि प्रज्वलित की गई।
साधु-संतों का समागम और ‘आसका’
इस अवसर पर मेवाड़ अंचल के विभिन्न मठों और मंदिरों से पधारे संतों, महंतों और साधुओं का विशेष सम्मान किया गया। डॉ. लक्ष्यराज सिंह ने उनका माल्यार्पण कर श्रीफल भेंट किए। पूज्य संतों ने मेवाड़ की सुख-समृद्धि के लिए आशीर्वाद स्वरूप “आसका” (पवित्र आशीर्वाद) प्रदान की।
‘गैर’ नृत्य और मेवाड़ी संस्कृति की झलक
होलिका दहन के पश्चात माणक चौक लोक संस्कृति के रंगों में सराबोर हो गया।
लोक कला: पारंपरिक ‘गैर’ नृत्य का आयोजन हुआ, जिसमें कलाकारों ने मेवाड़ी फाग और गीतों पर झूमते हुए अपनी कला का प्रदर्शन किया।
फूल फाग: फूलों की होली (फूल फाग) खेलकर मेवाड़ी संस्कृति की जीवंतता को प्रस्तुत किया गया।
यह आयोजन न केवल एक त्यौहार है, बल्कि मेवाड़ की उस सांस्कृतिक विरासत का प्रमाण है जो आधुनिकता के दौर में भी अपनी जड़ों, मर्यादा और आध्यात्मिक मूल्यों को पूरी गरिमा के साथ सुरक्षित रखे हुए है।
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