
उदयपुर | जब-जब समाज ने कहा कि “ये काम तुम्हारे बस का नहीं”, तब-तब हिंदुस्तान की बेटियों ने अपनी मेहनत से ज़मीन का सीना चीरकर नया इतिहास लिखा है। कभी पुरुषों का गढ़ मानी जाने वाली खदानों (माइंस) की गहराइयों में अब सिर्फ मशीनों का शोर नहीं, बल्कि उन 745 महिलाओं के हौसलों की गूंज है, जिन्होंने अपनी पहचान बनाने के लिए मुश्किल रास्तों को चुना।
अंधेरी खदानों में उम्मीद की रोशनी
हिंदुस्तान जिंक में आज 26.3 प्रतिशत महिलाएं कार्यरत हैं, लेकिन यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है। यह उन 314 महिला इंजीनियरों के सपनों की उड़ान है, जो दिन के उजाले से दूर, सैकड़ों मीटर नीचे अंडरग्राउंड खदानों में काम करती हैं। जब ये महिलाएं नाइट शिफ्ट में हेलमेट लगाकर माइन रेस्क्यू टीम का हिस्सा बनती हैं, तो वे केवल अपना काम नहीं कर रहीं होतीं, बल्कि सदियों पुरानी उस सोच को दफन कर रही होती हैं जिसने उन्हें “कमजोर” समझा था।
‘शी नोज द ग्राउंड शी स्टैंड्स ऑन’ : हर महिला की एक अनकही कहानी
कंपनी द्वारा शुरू किया गया 25 दिन का कैंपेन “शी नोज द ग्राउंड शी स्टैंड्स ऑन” उन महिलाओं को समर्पित है जो जानती हैं कि वे जिस ज़मीन पर खड़ी हैं, उसे उन्होंने अपने संघर्ष से जीता है।
एक मां का संघर्ष : एक ओर जहां ये महिलाएं जटिल रोबोटिक्स और ऑटोमेशन संभालती हैं, वहीं दूसरी ओर घर की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाती हैं।
छात्रों के लिए प्रेरणा: इस अभियान के जरिए जब कॉलेज की छात्राओं ने इन “जिंक वीमेन” को लीड करते देखा, तो उनकी आंखों में भी एक नया आत्मविश्वास चमक उठा। यह केवल विज्ञान की बात नहीं है, यह उस भरोसे की बात है जो एक महिला दूसरी महिला को देती है।
सीईओ का भावुक संदेश : “समानता हमारा आधार है”
हिंदुस्तान जिंक के सीईओ अरुण मिश्रा ने इन महिलाओं के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य केवल 2030 तक 30% भागीदारी तक पहुँचना नहीं है, बल्कि एक ऐसा सुरक्षित घर जैसा माहौल देना है जहाँ हर बेटी निडर होकर नेतृत्व कर सके। कंपनी की ‘नो-क्वेश्चन आस्क्ड’ और चाइल्डकेयर सब्बाटिकल जैसी नीतियां इसी ममता और सुरक्षा के भाव को दर्शाती हैं।
एक सुरक्षित आंचल : काम और परिवार का संगम
इन महिलाओं के लिए कंपनी की टाउनशिप केवल घर नहीं, एक छोटा सा संसार है। जहाँ उनके बच्चों के लिए डेकेयर और स्कूल हैं, वहीं उनके मानसिक स्वास्थ्य का भी ख्याल रखा जाता है। जब एक महिला स्पाउस हायरिंग पॉलिसी के तहत अपने जीवनसाथी के साथ एक ही परिसर में रहती है, तो उसका कार्यस्थल उसके लिए परिवार बन जाता है।
आगामी 8 मार्च को जब यह कैंपेन खत्म होगा, तब दुनिया देखेगी कि माइनिंग जैसे सख्त उद्योग में भी कोमल हाथों ने कितनी मजबूती से अपनी पकड़ बनाई है। यह कहानी उन सभी लड़कियों के लिए है जो बड़े सपने देखती हैं—क्योंकि अब ज़मीन के नीचे की गहराई हो या आसमान की ऊँचाई, उनके लिए कुछ भी असंभव नहीं।
About Author
You may also like
-
युद्ध डायरी : कुवैत में अमेरिकी लड़ाकू विमान क्रैश, इराक के इरबिल एयरपोर्ट पर हमला और जॉर्डन में खतरे के सायरन
-
महायुद्ध अपडेट : तेहरान के बीचों-बीच बमबारी से हाहाकार, ईरान में अस्थायी परिषद ने संभाली कमान, खाड़ी देशों की आपात बैठक
-
महायुद्ध की शुरुआत : ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत की पुष्टि; परिवार का खात्मा, इजराइल पर मिसाइल वर्षा और वैश्विक उबाल
-
विश्व युद्ध की आहट? इसराइल और अमेरिका का ईरान पर बड़ा हमला, तेहरान समेत कई शहरों में भारी धमाके
-
Arvind Kejriwal Acquitted in Liquor Policy Case; Court Terms CBI Probe Misleading