खानपान में ‘साइलेंट हीरो’ फाइबर की कमी पड़ सकती है भारी: जानें क्यों है यह स्वास्थ्य के लिए इतना जरूरी!

नई दिल्ली: शरीर को सुचारू रूप से चलाने और स्वस्थ रखने के लिए विटामिन और खनिजों की आवश्यकता तो होती ही है, लेकिन एक ‘साइलेंट हीरो’ ऐसा भी है जिसकी अक्सर अनदेखी की जाती है – वह है फाइबर। यह ‘साइलेंट हीरो’ शरीर की गंदगी को बाहर निकालने से लेकर पाचन तंत्र और हृदय स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

आज की आधुनिक जीवनशैली में प्रोटीन और कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों पर तो खूब ध्यान दिया जाता है, लेकिन फाइबर के महत्व को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों ही फाइबर को अत्यंत महत्वपूर्ण मानते हैं, क्योंकि इसके बिना न तो पाचन ठीक से होता है और न ही शरीर लंबे समय तक स्वस्थ रह पाता है। यही वजह है कि इसे ‘साइलेंट हीरो’ कहा गया है।

क्या है फाइबर और इसके स्रोत? फाइबर पौधों से प्राप्त होने वाला एक प्रकार का कार्बोहाइड्रेट है जो पचने में मदद करता है और आंतों से विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर निकालता है। यह भोजन को टूटकर कब्ज बनने से रोकता है और आंतों में ज्यादा देर तक जमा नहीं होने देता, जिससे पाचन तंत्र सक्रिय रहता है। आयुर्वेद में फाइबर को ‘आम’ (विषाक्त पदार्थों) का शत्रु माना गया है।

फाइबर के प्रकार: फाइबर मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है:

  1. घुलनशील फाइबर: यह पानी में घुल जाता है और रक्त में शुगर तथा कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है।

  2. अघुलनशील फाइबर: यह पानी में नहीं घुलता और मल को कठोर बनने से रोकता है, जिससे कब्ज की समस्या नहीं होती।

फाइबर की कमी के गंभीर परिणाम: शरीर में फाइबर की कमी से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • बार-बार कब्ज और गैस बनना

  • भोजन का ठीक से न पचना

  • तेजी से वजन बढ़ना

  • ब्लड शुगर का असंतुलन

  • बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल

  • थकान और सुस्ती

  • पाइल्स और फिशर जैसी पाचन संबंधी बीमारियां

फाइबर के प्रमुख स्रोत: फाइबर विभिन्न प्रकार के फलों और सब्जियों में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसके अतिरिक्त, चिया सीड्स, ओट्स, चना, राजमा और चोकर वाले आटे (साबुत अनाज) में भी भरपूर फाइबर होता है। स्वस्थ रहने के लिए रोजाना कम से कम 100 ग्राम फाइबर युक्त आहार का सेवन करना अत्यंत आवश्यक है।

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