
फ़ोटो : कमल कुमावत
उदयपुर। मेवाड़ की धरा पर रविवार को बड़गांव स्थित पंचायत समिति मैदान में आयोजित ‘विराट हिन्दू सम्मेलन’ सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का एक महाकुंभ बनकर उभरा। राष्ट्र संत महामंडलेश्वर ईश्वरानन्द ब्रह्मचारी (उत्तम स्वामी महाराज) के ओजस्वी आह्वान और प्रबुद्ध वक्ताओं के वैचारिक मंथन ने समाज को अपनी जड़ों की ओर लौटने और वैश्विक चुनौतियों के बीच एकजुट होने का कड़ा संदेश दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत एक भव्य और ऐतिहासिक शोभायात्रा के साथ हुई, जिसने समूचे बड़गांव को सनातनी रंग में सराबोर कर दिया। बालकेश्वर महादेव मंदिर से शुरू हुई इस यात्रा में 2500 से अधिक मातृशक्ति ने सिर पर मंगल कलश धारण कर सनातन संस्कारों की अलख जगाई। भगवान श्रीराम, महाराणा प्रताप और छत्रपति शिवाजी के जयकारों के बीच गूंजते मेवाड़ी भजनों और सजी-धजी झांकियों ने शौर्य और भक्ति का अनूठा वातावरण निर्मित किया।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए उत्तम स्वामी महाराज ने एक महत्वपूर्ण सामाजिक विमर्श की नींव रखते हुए आह्वान किया कि “प्रत्येक हिन्दू घर से निकलने से पहले तिलक अवश्य लगाए।” उन्होंने सामाजिक दूरियों को मिटाने के लिए ‘पंगत की संगत’ का मंत्र देते हुए सामूहिक भोजन और भजन की परंपरा को पुनर्जीवित करने पर जोर दिया। बांग्लादेश की वर्तमान घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि हिन्दू समाज ने कभी किसी को गुलाम नहीं बनाया, लेकिन आज उसे संगठित होकर अपने अस्तित्व की रक्षा करनी होगी।
मुख्य अतिथि और वरिष्ठ पत्रकार रूबिका लियाकत ने मातृशक्ति के सम्मान को कुटुंब का आधार बताया। उन्होंने पश्चिमी विचारधारा के उस नैरेटिव पर कड़ा प्रहार किया जो भारतीय महिला को पराधीन मानता है। रूबिका ने तर्क दिया कि सनातन संस्कृति में संस्कारों का प्रथम स्रोत ही ‘माता’ है, और जहाँ नारी की पूजा होती है, वहीं खुशहाली का वास होता है। उन्होंने आधुनिक भोगवाद और अहंकार से बचकर परिवार को संस्कारित बनाने की अपील की।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय गौ सेवा प्रमुख अजीत महापात्र ने हिन्दुत्व को ‘विश्व शांति का आधार’ करार दिया। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया आज भारतीय विवाह संस्था और उपनिषदों की ओर आकर्षित हो रही है। उन्होंने समाज से कुरीतियों को त्यागने और ‘स्व’ के बोध के साथ नागरिक कर्तव्यों के प्रति सजग होने का आह्वान किया। आयोजन समिति के अध्यक्ष ओमशंकर श्रीमाली और संयोजक डॉ. अनिल मेहता ने सम्मेलन की भूमिका रखते हुए स्वदेशी भाव के जागरण पर बल दिया। कार्यक्रम के अंत में पंच परिवर्तन के तहत पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन और सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर युवाओं और महिलाओं ने विचार रखे, जिसने इस धार्मिक आयोजन को एक रचनात्मक सामाजिक दिशा प्रदान की।

सभा के आरम्भ में अतिथियों के स्वागत में आयोजन समिति के अध्यक्ष ओमशंकर श्रीमाली ने स्वागत उद्बोधन दिया। वहीं हिन्दू सम्मेलन की भूमिका रखते हुए आयोजन समिति के संयोजक डॉ. अनिल मेहता ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्ष की कठिन किंतु परिणामकारी यात्रा ने देश में स्व का भाव और स्वदेशी का भाव जागृत किया है।
इससे पूर्व, कार्यक्रम में पधारे अतिथियों का पारम्परिक रूप से शॉल, उपरणा, श्रीफल एवं स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया गया। वहीं वरिष्ठ पत्रकार रुबिका लियाकत को विशेष रूप से चुनरी ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।
महामण्डलेश्वर ईश्वरानन्द ब्रहाचारी उपाख्य उत्तम स्वामी महाराज का स्वागत आयोजन समिति के अध्यक्ष ओमशंकर श्रीमाली के नेतृत्व में वेलाराम गमेती (भोपा जी), चोसरदास, जयन्त कोठारी एवं नरेन्द्र सुधार द्वारा किया गया। वरिष्ठ पत्रकार रुबिका लियाकत का स्वागत केसर देवी, बबली बाई, नीरू श्रीमाली, कोयल, दिव्या दीपाली योगी एवं श्रीमती गीता गुप्ता ने किया। वहीं अजीत महापात्र का स्वागत डॉ. अनिल मेहता, मांगीलाल प्रजापत, डालचन्द एवं उदय सिंह द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के आरम्भ में पंच परिवर्तन विषय पर विषय प्रवर्तन किया गया। इस क्रम में मीना सिंघवी ने कुटुम्ब प्रबोधन पर अपने विचार रखे, कल्पना प्रजापत ने स्वत्त्व के जागरण पर प्रकाश डाला, डॉ. कामिनी सुथार शर्मा ने पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता को रेखांकित किया, वैशाली गमेती ने नागरिक शिष्टाचार पर विचार व्यक्त किए, जबकि लविश श्रीमाली ने सामाजिक समरसता विषय पर अपना वक्तव्य रखा।
कार्यक्रम के दौरान स्वस्ति वाचन एवं गणेश वंदना विद्यानिकेतन बड़गांव के विद्यार्थियों द्वारा की गई, जिसने सम्पूर्ण वातावरण को आध्यात्मिक और संस्कारमय बना दिया। कार्यक्रम के अन्त में आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों, अतिथियों एवं सहभागियों के प्रति आभार प्रदर्शन जयंत कोठारी द्वारा किया गया।
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