नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मोबाइल, लैपटॉप और टीवी हमारी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि तकनीक से यह निरंतर जुड़ाव हमारे स्वास्थ्य पर भारी पड़ रहा है? मानसिक शांति और शारीरिक ऊर्जा को पुनर्जीवित करने के लिए ‘डिजिटल डिटॉक्स’ अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि एक आवश्यकता बन गया है।
स्क्रीन टाइम का स्वास्थ्य पर प्रभाव
नेशनल हेल्थ मिशन के आंकड़ों के अनुसार, अत्यधिक स्क्रीन टाइम न केवल आंखों में थकान और सिरदर्द पैदा करता है, बल्कि यह तनाव, अनिद्रा और घटती रचनात्मकता का भी मुख्य कारण है। गैजेट्स पर हमारी अति-निर्भरता हमें मानसिक रूप से थका रही है।
डिजिटल डिटॉक्स क्या है और इसके लाभ?
डिजिटल डिटॉक्स का सीधा अर्थ है—एक निश्चित समय के लिए सोशल मीडिया, स्मार्टफोन और अन्य डिजिटल उपकरणों से पूर्णतः दूरी बनाना। इसके लाभ जादुई हैं:
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तनाव में कमी: निरंतर नोटिफिकेशन के शोर से दिमाग को शांति मिलती है।
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बेहतर नींद: नीली रोशनी (Blue Light) से दूरी नींद की गुणवत्ता (Sleep Quality) सुधारती है।
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रिश्तों में प्रगाढ़ता: स्क्रीन के बजाय अपनों को समय देने से आपसी जुड़ाव बढ़ता है।
डिटॉक्स के आसान और प्रभावी तरीके
विशेषज्ञों के अनुसार, आप इन छोटे बदलावों से शुरुआत कर सकते हैं:
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स्क्रीन-फ्री ऑवर: दिन भर में कम से कम एक घंटा ‘नो स्क्रीन टाइम’ घोषित करें।
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नो-डिजिटल ज़ोन: बेडरूम और डाइनing टेबल को गैजेट-मुक्त रखें।
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प्रकृति से जुड़ाव: पार्क में टहलें या पौधों की देखभाल करें; प्रकृति मानसिक थकान मिटाने की सबसे अच्छी औषधि है।
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किताबों का शौक: ई-बुक्स के बजाय कागजी किताबें पढ़ें, यह मस्तिष्क को सुकून देता है।
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सचेत भोजन (Mindful Eating): खाना खाते समय फोन को पूरी तरह दूर रखें।
निष्कर्ष: डिजिटल डिटॉक्स की शुरुआत धीरे-धीरे करें। पहले दिन में केवल 30 मिनट से शुरू करें और इसके सकारात्मक बदलाव महसूस होने पर समय बढ़ाएं। खुद को तकनीक से ‘अनप्लग’ करना, असल में खुद को जीवन से ‘प्लग-इन’ करना है।
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