
मुंबई। भारत में तलाक को अब एक अंत नहीं, बल्कि एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। हाल ही में ‘रिबाउंस’ मैट्रिमोनी ऐप द्वारा 5,834 लोगों पर किए गए एक अध्ययन में यह सामने आया है कि 5 में से 3 तलाकशुदा सिंगल्स के लिए अब ऐसे ‘डील-ब्रेकर्स’ (रिश्ता खत्म करने की शर्तें) हैं, जो उनकी पहली शादी के दौरान अस्तित्व में नहीं थे।
अध्ययन के अनुसार, दूसरी बार डेटिंग कर रहे लोग अब अत्यधिक भावनात्मक साक्षर (Emotionally Literate) हो चुके हैं। वे पुराने पैटर्न को दोहराने के बजाय सचेत होकर अपने पार्टनर का चुनाव कर रहे हैं।
प्रमुख नए ‘डील-ब्रेकर्स’ (Deal Breakers):
भावनात्मक उपलब्धता (Emotional Availability): लगभग 44% महिलाओं और 32% पुरुषों के लिए पार्टनर का भावनात्मक रूप से मौजूद न होना अब असहनीय है। लोग अब ‘व्यस्त शेड्यूल’ के बहाने को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। उनका मानना है कि संवाद में निरंतरता और स्पष्टता अनिवार्य है।
वित्तीय पारदर्शिता (Financial Transparency): 30 से 40 वर्ष की आयु के 60% लोगों के लिए पैसा अब कोई शर्मिंदगी वाला विषय नहीं है। वे पार्टनर की कमाई से ज्यादा उनकी खर्च करने की आदतों और कर्ज की स्थिति को लेकर स्पष्टता चाहते हैं। यह ‘लालच’ नहीं बल्कि भविष्य की सुरक्षा के लिए एक ‘प्रैक्टिकल’ कदम है।
सूक्ष्म अनादर (Subtle Disrespect): 31% महिलाओं ने बताया कि पहली शादी में ‘मजाक’ के नाम पर किए जाने वाले अपमान या उनकी बात को बीच में काटने जैसी आदतों को उन्होंने झेला, लेकिन अब यह एक बड़ा रेड फ्लैग (Red Flag) है। भावनाओं का मजाक उड़ाना या पार्टनर को ‘ओवरथिंकर’ कहकर टाल देना अब समझौता करने योग्य नहीं रहा।
निष्कर्ष: विशेषज्ञों का मानना है कि दूसरी बार डेटिंग कर रहे लोग अब “बस बसने” (Settling) के बजाय “समानता और सम्मान” (Compatibility and Respect) पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
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