
उदयपुर। झीलों की नगरी में अब मनमानी का दौर खत्म होने वाला है। जिला कलेक्टर नमित मेहता ने मंगलवार को आयोजित मैराथन बैठकों में जिस तरह के ‘कलेक्टर तेवर’ दिखाए हैं, उसने पूरे सिस्टम को हिलाकर रख दिया है। झीलों में जहर घोलती नावें हों, फतहसागर पर बेलगाम दौड़ती गाड़ियां हों या पर्यटन के नाम पर सुस्त पड़ा भीतरी शहर—कलेक्टर ने हर मोर्चे पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ जैसे कड़े फैसले लिए हैं। कलेक्टर के इन फैसलों ने साफ़ कर दिया है कि अब उदयपुर में केवल नियम चलेंगे, किसी का रसूख नहीं।
1. झीलों पर डेथ वारंट : प्रदूषण फैलाने वाली नावों को अब सीधे सीज किया जाएगा
झीलों की शुद्धता से खिलवाड़ करने वालों के लिए अब कोई माफी नहीं होगी। कलेक्टर मेहता ने परिवहन विभाग को दो टूक निर्देश दिए हैं कि पेट्रोल-डीजल चालित नावों के लाइसेंस पर तत्काल प्रभाव से ताला लगा दिया जाए।
सीधे सीजिंग की तैयारी: जो नावें वर्तमान में चल रही हैं, उन्हें सिर्फ नोटिस नहीं मिलेगा, बल्कि अब उन्हें क्रमबद्ध तरीके से सीज (Seize) कर झील से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।
होटल माफिया को चेतावनी: बड़ी होटलों को सख्त अल्टीमेटम दिया गया है—अगर पेट्रोल-डीजल नावें बंद नहीं हुईं, तो प्रशासन कठोर कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा। झीलों में अब सिर्फ ‘इको-फ्रेंडली’ और सोलर नावों का भविष्य होगा।
2. फतहसागर पर रफ्तार की नकेल : अब 30 से ऊपर गए तो खैर नहीं
पर्यटकों और पैदल घूमने वालों की जान जोखिम में डालकर फतहसागर पर स्टंट करने वालों का इलाज कलेक्टर ने खोज लिया है।
30km/h की लक्ष्मण रेखा : फतहसागर रिंग रोड पर अब स्पीड लिमिट 30 किमी प्रति घंटा फिक्स कर दी गई है। आदेश की अवहेलना करने वालों के खिलाफ भारी जुर्माने और कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
नो-व्हीकल जोन का दांव : पायलट प्रोजेक्ट के तहत वीकेंड पर शाम के समय
फतहसागर की पाल को ‘नो व्हीकल जोन’ बनाया जाएगा। यानी अब सड़कों पर गाड़ियों का शोर नहीं, पर्यटकों का सुकून होगा।
3. नाइट टूरिज्म और हेरिटेज वॉक: रात में भी चमकेगा भीतरी शहर
उदयपुर को केवल किताबी ‘स्मार्ट सिटी’ नहीं, बल्कि असलियत में ग्लोबल डेस्टिनेशन बनाने के लिए कलेक्टर ने नाइट कल्चर पर जोर दिया है।
नाइट बाजार और फूड कोर्ट: जगदीश चौक से बड़ी पोल तक नाइट मार्केट और रानी रोड पर अत्याधुनिक नाइट फूड कोर्ट विकसित होगा, जहाँ राजस्थानी जायके के साथ लोक कला का संगम होगा।
हेरिटेज हाउस और वॉक: मार्च से पेशेवर ‘हेरिटेज वॉक’ शुरू होगी। इसके लिए पुरानी लाइब्रेरी को ‘हेरिटेज हाउस’ में तब्दील करने का क्रांतिकारी फैसला लिया गया है।
4. ग्राउंड रियलिटी : पार्किंग के लिए ‘नोहरों’ का इस्तेमाल और ‘पिंक टायलेट’
शहर की सबसे बड़ी समस्या पार्किंग का समाधान अब भीतरी शहर के ‘नोहरों’
(सामुदायिक भवनों) में होगा। इसके अलावा महिलाओं की गरिमा के लिए झील किनारे ‘पिंक टायलेट’ का निर्माण और पर्यटकों की सुरक्षा के लिए पर्यटन पुलिस की मुस्तैदी बढ़ाने के निर्देश देकर कलेक्टर ने हर पहलू को छुआ है।
बड़ा सवाल : क्या धरातल पर उतरेगी कलेक्टर की सख्ती?
कलेक्टर नमित मेहता के फैसले निस्संदेह ‘गजब’ और ‘अभूतपूर्व’ हैं। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या नीचे बैठा प्रशासनिक अमला इन आदेशों को रसूखदारों के दबाव में आए बिना लागू कर पाएगा? क्या प्रशासन होटल संचालकों और बेलगाम वाहन चालकों पर शिकंजा कसने की हिम्मत दिखा पाएगा? जनता की नजर अब कलेक्टर की सख्त मॉनिटरिंग पर टिकी है।
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