उदयपुर के लिए एक फैसला…जो आने वाली पीढ़ियों की सांसों को सुरक्षा की गारंटी देगा

 

उदयपुर। कहते हैं कि जब नीयत नेक हो, तो कायनात भी साथ देने लगती है। उदयपुर की आबो-हवा में आज एक ऐसी ही नई उम्मीद घुली है। 21वीं सदी के इस पहले पच्चीस सालों के सफर में आज एक ऐसा फैसला लिया गया है, जो आने वाली पीढ़ियों की सांसों को सुरक्षा की गारंटी देगा। हमारे अपने आरएनटी मेडिकल कॉलेज और एमबी अस्पताल की सूरत अब बदलने वाली है—न सिर्फ पत्थरों से, बल्कि सेवा के उस जज्बे से जो इसे ‘जिंक सिटी’ के दिल की धड़कन बना देगा।

एक रिश्ता… भरोसे और सेवा का

हिन्दुस्तान जिंक ने अपनी मिट्टी का कर्ज चुकाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। जब हिंदुस्तान जिंक के सीईओ अरुण मिश्रा और आरएनटी के प्रिंसिपल विपिन माथुर ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए, तो वह सिर्फ एक कागज नहीं था, वह उदयपुर की उम्मीदों का एक नया ‘मास्टर प्लान’ था।

“मजबूत समाज के लिए बेहतर स्वास्थ्य बुनियादी जरूरत है,” अरुण मिश्रा के इन शब्दों में एक ज़िम्मेदारी का अहसास झलकता है। वहीं विपिन माथुर ने पुराने रिश्तों को याद करते हुए जब आभार जताया, तो लगा जैसे बरसों पुराना कोई साथ और भी गहरा हो गया हो।

धड़कनों को मिलेगा नया जीवन

सोचिए, जब किसी अपने का दिल घबराता है, तो वक्त कितनी तेजी से भागता है। अब उस भागते वक्त को थामने के लिए यहाँ अत्याधुनिक कैथ लैब होगी। एंजियोग्राफी हो या एंजियोप्लास्टी, अब उदयपुर के किसी भी बेटे या बेटी को बड़े शहरों की तरफ महँगे इलाज के लिए नहीं भागना पड़ेगा। डॉ. मुकेश शर्मा, डॉ. कीर्ति और डॉ. हरचरण जैसे अनुभवी हाथों को जब आधुनिक तकनीक का साथ मिलेगा, तो हर धड़कन सुरक्षित महसूस करेगी।

मिलकर लिखेंगे नया इतिहास

इस ऐतिहासिक मौके पर अनुपम निधि (सीएसआर हेड, वेदांता), मुबारिक खान, राजीव पिट्टी और मैत्रेयी सांखला की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि यह कायाकल्प सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक साझा सपना है। साल 2025 के आंकड़े बताते हैं कि यहां 95,000 से ज्यादा लोगों ने अपनी उम्मीदें तलाशीं। अब यह नया ‘हब’ उन हजारों आंखों के आँसू पोंछने और उन्हें नया जीवन देने का काम करेगा।

धड़कनों को मिलेगा आधुनिक कवच : अत्याधुनिक कैथ लैब
दिल की बीमारियों का बढ़ता ग्राफ आज एक बड़ी चुनौती है। इसे समझते हुए, हिन्दुस्तान जिंक यहां एक अत्याधुनिक कार्डियक कैथटेराइजेशन लेबोरेटरी (कैथ लैब) स्थापित करेगा।

सुविधाएं : यहां कोरोनरी एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी और स्टेंट प्लेसमेंट जैसी जटिल प्रक्रियाएं अत्याधुनिक मशीनों से होंगी।

प्रभाव : हार्ट अटैक जैसी आपातकालीन स्थिति में मरीजों को अब ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर तुरंत और किफायती इलाज मिल सकेगा, जिससे मृत्यु दर को कम करने में बड़ी सफलता मिलेगी।

साझेदारी के साक्षी बने दिग्गज

इस ऐतिहासिक समझौते पर हिन्दुस्तान जिंक के सीईओ अरुण मिश्रा और आरएनटी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. विपिन माथुर ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर चिकित्सा और कॉर्पोरेट जगत की कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं, जिनमें:

चिकित्सा दल : हेड कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. मुकेश शर्मा, एडिशनल प्रिंसिपल डॉ. कीर्ति और डॉ. हरचरण।

कॉर्पोरेट दल : वेदांता समूह की सीएसआर हेड अनुपम निधि, हिन्दुस्तान जिंक के चीफ कमर्शियल ऑफिसर मुबारिक खान, हेड फाइनेंस कंट्रोलर राजीव पिट्टी और हेड कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन मैत्रेयी सांखला।

नेतृत्व के विचार : “सेवा ही सर्वोपरि”
अरुण मिश्रा (CEO, हिन्दुस्तान जिंक): “हमारा मानना है कि एक मजबूत समाज की नींव बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं पर टिकी होती है। यह प्रोजेक्ट राजस्थान के चिकित्सा ढांचे को सशक्त करने की हमारी प्रतिबद्धता का हिस्सा है।”

डॉ. विपिन माथुर (प्रिंसिपल, आरएनटी) : “हिन्दुस्तान जिंक और हमारा साथ बहुत पुराना है। विभाग को एक अतिरिक्त कैथ लैब मिलने से हम राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत और भी अधिक मरीजों का नि:शुल्क और विश्वस्तरीय इलाज कर पाएंगे।”

आँकड़ों की जुबानी : क्यों जरूरी था यह बदलाव?

वर्ष 2025 के आंकड़े आरएनटी की महत्ता को दर्शाते हैं:

ओपीडी : 95,000 से अधिक मरीज।

भर्ती मरीज : करीब 5,000।

जांचें : 18,000 इको और 4,000 टीएमटी।

सर्जरी : वर्तमान में उपलब्ध एकमात्र कैथ लैब पर अत्यधिक दबाव था, जहां 2,600 एंजियोग्राफी और 1,350 एंजियोप्लास्टी की गईं। नई लैब इस भार को कम कर मरीजों को राहत देगी।

मेडिकल टूरिज्म और सामुदायिक विकास

इस कायाकल्प से उदयपुर न केवल स्थानीय निवासियों बल्कि पड़ोसी जिलों और राज्यों के लिए भी मेडिकल टूरिज्म का एक बड़ा केंद्र बनेगा। हिन्दुस्तान जिंक की यह पहल उनके उस व्यापक विजन का हिस्सा है जिसके तहत वे 2,300 गांवों के 23 लाख लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं।

यह महज एक अस्पताल का नवीनीकरण नहीं है, बल्कि उदयपुर के हर उस नागरिक के लिए सुकून की खबर है जो कल की बेहतर और सुरक्षित सेहत का सपना देखता है। जब कॉर्पोरेट उत्तरदायित्व और सरकारी समर्पण मिलते हैं, तो बदलाव इसी तरह धरातल पर उतरता है।

 

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