
जयपुर/उदयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उदयपुर के कन्हैयालाल हत्याकांड को लेकर केंद्र सरकार और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के हालिया बयानों पर पलटवार किया है। गहलोत ने अपने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर एक के बाद एक पोस्ट करते हुए भाजपा पर इस जघन्य हत्याकांड के राजनीतिक इस्तेमाल और जांच में जानबूझकर देरी करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में दिए गए उस बयान पर, जिसमें उन्होंने राजस्थान पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे, गहलोत ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि घटना के बाद राजस्थान पुलिस ने महज 4 घंटों के भीतर हत्यारों को दबोच लिया था।
भाजपा ने चुनाव जीतने के लिए ‘5 लाख बनाम 50 लाख’ का जो नैरेटिव फैलाया था, वह पूरी तरह झूठ है। सच्चाई यह है कि उनकी सरकार ने परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा और दोनों बेटों को सरकारी नौकरी दी थी।
NIA की जांच पर उठाए सवाल
अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह को घेरते हुए पूछा कि 2022 में जांच हाथ में लेने वाली एनआईए (NIA) 2026 तक भी दोषियों को सजा क्यों नहीं दिला पाई? उन्होंने लिखा “यह एक ‘ओपन एंड शट’ केस था। अगर यह मामला राजस्थान पुलिस के पास रहता, तो आज हत्यारे फांसी के फंदे पर होते। लेकिन जब से एनआईए ने केस लिया, जांच की रफ्तार सुस्त हो गई और आज साल 2026 में भी परिवार न्याय की भीख मांग रहा है।”
आरोपियों के राजनीतिक जुड़ाव पर आशंका
गहलोत ने अपने बयान में सबसे बड़ा प्रहार आरोपियों के कथित भाजपा कनेक्शन पर किया। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपियों के भाजपा कार्यकर्ताओं के रूप में पहचान और पार्टी नेताओं के साथ उनकी तस्वीरों के कारण ही जांच एजेंसियां उन पर सख्त कार्रवाई करने से हिचक रही हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या अपने कार्यकर्ताओं को बचाने के लिए केंद्र सरकार इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल रही है?
जनता की जवाबदेही का दावा
गहलोत ने कहा कि चुनाव के समय इस मुद्दे को भुनाने वाले गृह मंत्री अब राजस्थान आने पर इस पर चुप्पी साध लेते हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि राजस्थान की जनता यह सब देख रही है और आने वाले समय में भाजपा को इस “राजनीतिक अवसरवाद” का जवाब देना होगा।
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