
उदयपुर | होली केवल रंगों का ही नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने का भी पर्व है। प्रकृति रिसर्च सोसाइटी, उदयपुर के अध्यक्ष प्रो. पी. आर. व्यास ने इस वर्ष “इको-फ्रेंडली होली” मनाने का आह्वान किया है। उन्होंने बताया कि किस प्रकार हम अपनी परंपराओं को निभाते हुए पर्यावरण और स्वास्थ्य की रक्षा कर सकते हैं।
क्या है इको-फ्रेंडली होली?
इको-फ्रेंडली होली का अर्थ है—हानिकारक रसायनों के बजाय प्राकृतिक रंगों का चुनाव, जल का न्यूनतम उपयोग और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना उत्सव मनाना। यह न केवल हमारी त्वचा के लिए सुरक्षित है, बल्कि बेजुबान जानवरों और धरती के लिए भी अनुकूल है।
प्रो. व्यास द्वारा सुझाए गए प्रमुख उपाय :
1. ‘गौकाष्ठ’ से बचाएं पेड़, शुद्ध करें हवा
होलिका दहन के लिए पेड़ों की लकड़ियां काटने के बजाय गाय के गोबर से बने कंडों या ‘गौकाष्ठ’ (वैदिक लकड़ी) का उपयोग करें। यह न केवल पेड़ों की कटाई रोकता है, बल्कि जलने पर वातावरण को शुद्ध भी करता है। ध्यान रखें कि होलिका में प्लास्टिक, रबर या कोई भी जहरीला पदार्थ न जलाएं।
2. रसोई के सामान से बनाएं ऑर्गेनिक रंग
बाजार के सिंथेटिक रंगों में सीसा और क्रोमियम जैसे तत्व होते हैं। इसके विकल्प के रूप में घर पर ही रंग तैयार किए जा सकते हैं:
पीला: हल्दी और बेसन का मिश्रण।
हरा: पालक का पेस्ट या सूखी मेहंदी।
गुलाबी/लाल: चुकंदर का रस या टेसू (पलाश) के फूल।
पीला/नारंगी: गेंदे के फूलों का पाउडर।
3. ‘वॉटरलेस’ होली और जल संरक्षण
पानी की बर्बादी रोकने के लिए सूखी होली (Dry Holi) खेलें। पानी के गुब्बारों का पूरी तरह त्याग करें, क्योंकि ये न केवल कचरा फैलाते हैं बल्कि राहगीरों को चोट भी पहुँचा सकते हैं। हजारों लीटर पानी बचाकर हम भविष्य के जल संकट को कम कर सकते हैं।
4. पशुओं के प्रति दिखाएं करुणा
गली के कुत्ते, गाय या अन्य जानवरों पर रंग न डालें। रसायनों वाले रंग उनकी त्वचा और आंखों में जलन पैदा करते हैं और चाटने पर उनके शरीर के भीतर जहर का काम कर सकते हैं।
5. सामाजिक और सामुदायिक जिम्मेदारी
होली के उत्सव को सेवा से जोड़ें। वंचित महिलाओं द्वारा बनाए गए हर्बल गुलाल खरीदें ताकि उन्हें रोजगार मिल सके। साथ ही, उत्सव के बाद गलियों और सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी न छोड़ें।
प्रो. पी. आर. व्यास के अनुसार, इको-होली का उद्देश्य पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए प्यार, स्वास्थ्य और सद्भावना का संदेश फैलाना है। प्राकृतिक रंगों की महक और साफ-सुथरा परिवेश ही इस त्योहार की असली खूबसूरती है।
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