
वॉशिंगटन/इस्लामाबाद।
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम को स्थायी शांति में बदलने की कूटनीतिक कोशिशों को शनिवार को उस वक्त गहरा धक्का लगा, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने विशेष दूतों का पाकिस्तान दौरा अचानक रद्द कर दिया। ट्रंप ने साफ लहजे में कहा कि वह लंबी हवाई यात्राओं में समय बर्बाद नहीं करना चाहते और ईरान का नेतृत्व फिलहाल ‘भ्रम’ की स्थिति में है।
ईरानी विदेश मंत्री का दौरा: अब्बास अराघची इस्लामाबाद में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री और सैन्य नेतृत्व को 10 सूत्रीय मांग पत्र सौंपकर ओमान के लिए रवाना हो गए हैं।
ट्रंप का ‘ट्रुथ सोशल’ प्रहार: ट्रंप ने पोस्ट किया, “मैंने अपने प्रतिनिधियों का इस्लामाबाद दौरा रद्द कर दिया है। यात्रा में बहुत समय बर्बाद हो रहा था… उनके नेतृत्व में भारी अंतर्कलह और भ्रम है। किसी को नहीं पता इंचार्ज कौन है!”
सारे पत्ते अमेरिका के पास: ट्रंप ने दावा किया कि वर्तमान नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) के कारण अमेरिका बेहद मजबूत स्थिति में है और ईरान को बातचीत के लिए खुद आगे आना होगा।
1. हॉर्मुज जलडमरूमध्य और तेल का संकट:
अमेरिकी नौसेना वर्तमान में हॉर्मुज जलडमरूमध्य से ईरानी समुद्री सुरंगों (Mines) को हटाने का काम कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि नाकेबंदी के कारण ईरान का 90% आयात-निर्यात ठप है। उधर, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इसे अपनी “निश्चित रणनीति” बताते हुए चेतावनी दी है कि वे वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकते हैं।
2. लेबनान में बढ़ती हिंसा:
सीजफायर के बावजूद इजरायल ने दक्षिण लेबनान में अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दी हैं। शनिवार को एक हवाई हमले में 12 लोग घायल हुए, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। इजरायल का दावा है कि वह अपनी ‘फॉरवर्ड डिफेंस लाइन’ को सुरक्षित कर रहा है।
3. कूटनीति बनाम गतिरोध:
पाकिस्तान पिछले कई दिनों से दोनों देशों को एक मेज पर लाने की कोशिश कर रहा था। लेकिन व्हाइट हाउस ने स्पष्ट कर दिया है कि वह केवल तभी बात करेगा जब ईरान अपने परमाणु हथियारों की महत्वाकांक्षा और “आतंकवादी गतिविधियों” को छोड़ने का ठोस आश्वासन दे।
विश्लेषण: अब आगे क्या?
विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप के इस फैसले से युद्ध विराम के टूटने का खतरा बढ़ गया है। अल जजीरा से बात करते हुए विश्लेषकों ने कहा कि यदि अमेरिका ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रखता है, तो ईरान अरब देशों से होने वाली तेल आपूर्ति को बाधित कर वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें बढ़ा सकता है।
“हमने शांति का ढांचा पेश कर दिया है, अब यह देखना बाकी है कि क्या अमेरिका कूटनीति के प्रति गंभीर है या नहीं।” — अब्बास अराघची, ईरानी विदेश मंत्री
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