सलूंबर में 5 मासूमों की मौत पर जूली ने सरकार को ललकारा— शर्म करो! लाशों पर राजनीति बंद करो, वोटों की फिक्र है पर मासूमों की जान की नहीं

सलूंबर/उदयपुर।

राजस्थान के सलूंबर जिले के लसाड़िया में रहस्यमयी बीमारी से हुई 5 मासूमों की मौत ने सूबे की सियासत में उबाल ला दिया है। शनिवार को पीड़ित परिजनों का दर्द बांटने पहुंचे नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया। जूली ने तीखे शब्दों में कहा कि यह सरकार संवेदनहीनता की पराकाष्ठा पार कर चुकी है— “5 घर उजड़ गए, लेकिन सत्ता के मद में चूर नेताओं के पास यहां आने का वक्त नहीं है।”

मौके से ही सेक्रेटरी को फोन: जूली का ‘ऑन द स्पॉट’ एक्शन

लालपुरा गांव की गलियों में सिसकते परिवारों के बीच पहुंचे जूली ने वहीं से स्वास्थ्य विभाग की प्रधान सचिव गायत्री राठौड़ को फोन मिला दिया। जूली ने सचिव से जवाब मांगा कि आखिर अब तक क्या कार्रवाई हुई? उन्होंने दो टूक कहा कि स्टाफ की कमी और खाली पदों की वजह से ग्रामीण राजस्थान ‘डेथ जोन’ बनता जा रहा है।

अंधविश्वास पर प्रहार और ज्ञापन का अंबार

परिजनों से मुलाकात के दौरान जूली ने एक बड़ी सीख भी दी। उन्होंने लोगों से अपील की कि— “देवी-देवताओं और अंधविश्वास के चक्कर में जान जोखिम में न डालें, मरीज को सबसे पहले डॉक्टर के पास ले जाएं।” इस दौरान पीसीसी सदस्य जगजीतेंद्र सिंह शक्तावत ने क्षेत्र की जर्जर सड़कों और समस्याओं का ज्ञापन सौंपा, जिसे जूली ने विधानसभा में गूंजने का वादा किया।

सरकार पर जूली के 3 तीखे प्रहार:

मदद का इंतजार: 5 बच्चों की मौत हो गई, लेकिन अब तक पीड़ित परिवारों को मुख्यमंत्री राहत कोष से फूटी कौड़ी तक नहीं मिली है। आदिवासी समाज को केवल वोट बैंक समझा जा रहा है।

सत्ता पक्ष नदारद: जूली ने आरोप लगाया कि सरकार इस गंभीर विषय को हल्के में ले रही है। सत्ता पक्ष का कोई बड़ा नेता हाल जानने तक नहीं पहुंचा।

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा बजट: आदिवासी क्षेत्र के विकास का पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है। न नरेगा का भुगतान हो रहा है और न ही सड़कें सुरक्षित हैं।

“सिर्फ जांच की बात करने से काम नहीं चलेगा। टीएसपी क्षेत्र का पैसा खर्च नहीं हो रहा और मासूम दम तोड़ रहे हैं। सरकार को दो साल बनाम पांच साल का राग छोड़कर काम करके दिखाना होगा।” — टीकाराम जूली, नेता प्रतिपक्ष

 

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