हल्दीघाटी केवल युद्ध नहीं, जन-जन के स्वाभिमान का संग्राम था : डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़

उदयपुर। जिले के रामा ग्राम में प्रातःस्मरणीय वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप और उनके सहयोगी शूरवीर राणा पूंजा की नवनिर्मित प्रतिमाओं का भव्य अनावरण समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर मेवाड़ के पूर्व राज परिवार के सदस्य डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने हल्दीघाटी के संघर्ष को जन-जन का संग्राम बताया।

समारोह के मुख्य अतिथि सूरजकुंड के अवधेश चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज और डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ थे। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री बाबूलाल खराड़ी, सांसद मन्नालाल रावत, विधायक प्रतापलाल गमेती सहित कई भाजपा जिलाध्यक्ष और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में जुटे ग्रामीण समुदाय ने इस आयोजन को एक उत्सव का रूप दे दिया।

समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने कहा कि हल्दीघाटी का युद्ध केवल सैन्य संघर्ष नहीं था, बल्कि मेवाड़ की 36 कोमों की एकजुटता का प्रमाण था। उन्होंने राणा पूंजा के योगदान को अतुलनीय बताते हुए कहा:

“जब भी मुगल सेना अरावली की पहाड़ियों में प्रताप के करीब पहुँचने की कोशिश करती, राणा पूंजा और उनके वीर भील सैनिक चट्टान बनकर खड़े हो जाते थे। यही कारण है कि मेवाड़ के राज्य चिह्न में राजपूत सैनिक के साथ भील योद्धा को भी बराबर का सम्मान दिया गया है।”

डॉ. मेवाड़ ने केवल वीरों ही नहीं, बल्कि अश्व चेतक और गजराज रामप्रसाद के बलिदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि चेतक ने युद्धभूमि में स्वामी की रक्षा करते हुए प्राण त्यागे, वहीं हाथी रामप्रसाद ने स्वामी के वियोग में अन्न-जल छोड़ दिया। इतिहास में पशुओं के ऐसे बलिदान विरले ही मिलते हैं।

अंत में, डॉ. मेवाड़ ने रामा ग्राम के निवासियों की एकजुटता की सराहना की और आयोजन समिति को इस गौरवशाली कार्य के लिए बधाई दी। उन्होंने ग्राम की सुख-समृद्धि और निरंतर प्रगति की मंगलकामना करते हुए अपना संबोधन समाप्त किया।

 

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