
वॉशिंगटन/तेहरान/इस्लामाबाद
मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर है। एक तरफ इजराइल और हिज़्बुल्लाह के बीच भीषण गोलाबारी जारी है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका और ईरान के बीच पर्दे के पीछे चल रही कूटनीति अब सार्वजनिक बयानों की भेंट चढ़ती दिख रही है।
1. अब्बास अराग़ची का मिशन रूस
ईरान के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची पाकिस्तान का अपना दूसरा दौरा समाप्त कर अब रूस (Moscow) के लिए रवाना हो गए हैं। वहां वे रूसी अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय संबंधों और अमेरिका-इजराइल युद्ध पर चर्चा करेंगे। अराग़ची ने पिछले दो दिनों में दो बार पाकिस्तान का दौरा किया, जिससे संकेत मिलते हैं कि इस्लामाबाद इस समय ‘मैसेंजर’ की भूमिका निभा रहा है।
2. ट्रंप ने रोकी बातचीत की रफ्तार
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिकी दूतों की पाकिस्तान यात्रा रद्द करने के बाद सीधे संवाद की उम्मीदें धुंधली पड़ गई हैं। ट्रंप ने अब सुझाव दिया है कि ईरान चाहे तो फोन पर बात कर सकता है। पूर्व अमेरिकी अधिकारियों ने दोनों देशों की ‘मैसेज डिसिप्लिन’ यानी सार्वजनिक बयानबाजी को ‘भयानक’ बताया है, जो कूटनीति के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
3. लेबनान में फिर से विस्थापन और मौतें
इजराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू के “सख्त” हमलों के आदेश के बाद दक्षिण लेबनान में स्थिति भयावह हो गई है।
इजराइली सेना ने नए निकासी आदेश जारी किए हैं, जिसके बाद बड़ी संख्या में लोग घर छोड़कर भाग रहे हैं।
टायर (Tyre) शहर के पास एक कॉफी स्टैंड पर हुए हमले में एक की मौत और कई के घायल होने की खबर है।
हिज़्बुल्लाह ने दावा किया है कि इजराइल ने युद्धविराम का 500 से ज्यादा बार उल्लंघन किया है।
4. हॉर्मुज संकट का ‘रूस’ को फायदा
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जारी नाकाबंदी के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति दबाव में है और तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस संकट से रूस को आर्थिक फायदा हो रहा है, क्योंकि वैश्विक बाजार अब रूसी तेल की ओर रुख कर रहे हैं।
5. अरब देशों की चिंता
जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी समझौते में अरब देशों की सुरक्षा की गारंटी दी जानी चाहिए। वहीं, कतर के प्रधानमंत्री ने समुद्र में आवाजाही की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) सुनिश्चित करने और इसे दबाव के हथियार के रूप में इस्तेमाल न करने की अपील की है।
6. ईरान की अर्थव्यवस्था पर चोट
अमेरिकी नाकाबंदी और हवाई हमलों ने ईरान की अर्थव्यवस्था को ढलान पर ला दिया है। खबर है कि अमेरिकी हवाई हमलों में ईरान के ‘पिस्ता गोदामों’ को भी निशाना बनाया गया है, जिससे वहां के कृषि निर्यात को भारी नुकसान पहुँच रहा है।
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