मैदान पर 15 साल की बेटियों का महा-धमाका : जिंक फुटबॉल गर्ल्स एकेडमी ने पहले ही सीज़न में जीता ‘ए’ डिवीज़न का खिताब, रचा इतिहास

जयपुर। कहते हैं कि अगर हौसलों में उड़ान और पैरों में रफ्तार हो, तो उम्र महज़ एक संख्या बनकर रह जाती है। राजस्थान की खेल दुनिया से एक ऐसी ही गौरवान्वित और दिल छू लेने वाली खबर सामने आई है। हिंदुस्तान ज़िंक की ज़िंक फ़ुटबॉल एकेडमी (ZFA) की बेटियों ने अपने पहले ही सीज़न में धमाका करते हुए राजस्थान लीग सीनियर विमेंस ‘ए’ डिवीज़न 2025-26 का चैंपियन बनकर इतिहास रच दिया है।
ज़ावर (उदयपुर) स्थित एकेडमी की इन नन्हीं परियों ने न सिर्फ राज्य-स्तरीय खिताब पर कब्ज़ा किया, बल्कि इंडियन विमेंस लीग 2 (IWL-2) के लिए क्वालीफाई कर राष्ट्रीय मंच पर भी अपना टिकट पक्का कर लिया है।
सिर्फ 15 साल की उम्र… और सीनियर लीग में मचाया तहलका
इस ऐतिहासिक जीत की सबसे खूबसूरत और हैरान कर देने वाली बात इस टीम की उम्र है। जहाँ इस सीनियर टूर्नामेंट में राज्य की दिग्गज और अनुभवी महिला खिलाड़ी खेल रही थीं, वहीं जिंक एकेडमी ने टूर्नामेंट की सबसे युवा टीम उतारी थी।
औसत उम्र सिर्फ 15 साल 8 महीने: इस टीम की खिलाड़ियों की औसत उम्र 16 साल भी नहीं थी, लेकिन मैदान पर उनका खेल किसी मँझे हुए अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी जैसा था।
लड़कों के बाद अब लड़कियों का राज: हाल ही में जिंक एकेडमी की पुरुषों की टीम ने भी मेन्स ‘ए’-डिवीज़न का खिताब जीता था। अब एकेडमी की इन बेटियों ने लड़कों की उसी सफलता को दोहराते हुए दोहरा इतिहास रच दिया है।
आखिरी मैच में 8-0 से रौंदा : अंतरा डोलुई की जादुई हैट्रिक
लीग के आखिरी मैच में ज़िंक एकेडमी के सामने रियल जयपुर एफसी की चुनौती थी और खिताब जीतने के लिए यह मैच हर हाल में जीतना जरूरी था। दबाव वाले इस मुकाबले में इन बेटियों की परिपक्वता और हिम्मत देखने लायक थी।
मैदान पर उतरते ही मिडफील्डर अंतरा डोलुई ने मैच के तीसरे, 20वें और 35वें मिनट में गोल दागकर एक शानदार हैट्रिक पूरी की और प्रतिद्वंद्वी टीम की कमर तोड़ दी। इसके बाद विंगर डांगी मार्डी ने दो बेहतरीन गोल (15वें और 36वें मिनट) किए। प्रियंका (27′), जोहा (46′) और स्थानीय आदिवासी प्रतिभा बिंदिया कुमारी मीणा (57′) के गोलों ने रियल जयपुर एफसी पर 8-0 की ज़बरदस्त और एकतरफा जीत पक्की कर दी।
ग्रामीण भारत की प्रतिभाओं का डंका : 8 मैचों में दागे 24 गोल
राजस्थान फ़ुटबॉल एसोसिएशन द्वारा आयोजित इस कड़े मुकाबले में राज्य की 5 शीर्ष टीमों ने हिस्सा लिया था। पूरे टूर्नामेंट में जिंक एकेडमी का जलवा रहा। टीम ने अपने 8 मैचों में से 7 में जीत दर्ज की और सिर्फ एक मैच हारा। इस दौरान बेटियों ने विरोधी टीमों के गोलपोस्ट पर 24 गोल दागे और पूरे टूर्नामेंट में सिर्फ 5 गोल खाए।
मिट्टी की महक, सोने की चमक: इस चैंपियनशिप की सबसे बड़ी खोज ज़ावर की स्थानीय और ग्रामीण प्रतिभाएं रहीं। गीत मीणा, बिंदिया कुमारी मीणा, मनीषा पटेल और सविता कालबेलिया जैसी स्थानीय बेटियों ने पूरे सीज़न में मुख्य भूमिका निभाई। इस जीत ने साबित कर दिया कि अगर सही मौका और सुविधाएं मिलें, तो देश के सुदूर गांवों में भी विश्व-स्तरीय खेल प्रतिभाएं छुपी हुई हैं।
12 महीने में चौथी बड़ी ट्रॉफी: दिलीप सिंह शेखावत ने दी बधाई
साल 2025 में शुरू हुई ‘ज़िंक फ़ुटबॉल गर्ल्स एकेडमी’ के लिए यह पहला ही साल था, लेकिन यह साल ट्रॉफियों से लबालब रहा। इस राज्य खिताब को जीतने से पहले ये लड़कियाँ ‘दून कप’, ‘अस्मिता लीग कप’ और ‘डीएवी अंडर-19 नेशनल्स’ भी अपने नाम कर चुकी हैं। यानी 12 महीने से भी कम समय में यह इस युवा टीम की चौथी बड़ी खिताबी जीत है।
इस ऐतिहासिक सफलता पर राजस्थान फुटबॉल एसोसिएशन के सेक्रेटरी दिलीप सिंह शेखावत ने बधाई देते हुए कहा:
“मुझे बेहद खुशी है कि उदयपुर की इस अत्याधुनिक एकेडमी की सबसे युवा टीम ने राजस्थान की शीर्ष टीमों को हराकर सीनियर महिला लीग जीती है। इसमें कोई शक नहीं कि ये प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ी राजस्थान और पूरे भारत में फ़ुटबॉल के एक सुनहरे और उज्ज्वल भविष्य का चेहरा हैं।”

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