
उदयपुर। राजनीति के रंगमंच पर जब शह-मात का खेल गहरा जाए, तो सस्पेंस थ्रिलर फिल्मों की तरह क्लाइमेक्स का इंतजार सबको होता है। उदयपुर की सियासत में पिछले कई दिनों से तहलका मचाने वाली ब्लॉकबस्टर स्क्रिप्ट ‘उदयपुर फाइल्स’ (कथित वीडियोकांड) के क्लाइमेक्स पर मंगलवार को भाजपा के ‘डायरेक्टर-इन-चीफ’ यानी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने आखिरकार पर्दा गिरा ही दिया। इस सस्पेंस से पर्दा उठते ही इस रील और रियल लाइफ ड्रामे के जितने भी ‘कलाकार और अदाकार’ थे, उनके चेहरों पर सुकून की मुस्कान तैर गई है।
चित्तौड़गढ़ से लेकर जयपुर तक की कुर्सी हिलाने वाले इस कथित वीडियोकांड पर जब प्रेस कॉन्फ्रेंस के ‘थिएटर’ में तीखे सवालों की बौछार हुई, तो मदन राठौड़ ने बेहद फिल्मी और टेक-सेवी (Tech-savvy) अंदाज में विलेन बने किरदारों का बचाव किया।
“पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त!” — जब तक अदालत न लिखे आखिरी सीन
मदन राठौड़ ने मीडिया के कैमरों के सामने साफ कर दिया कि बिना पुख्ता स्क्रिप्ट (सबूत) के किसी भी किरदार को सस्पेंशन का ‘कट’ नहीं झेलना पड़ेगा। उन्होंने कहा, “जब तक कोर्ट रूम ड्रामा में कोई मुल्जिम दोषी साबित नहीं हो जाता, तब तक सिर्फ हवा-हवाई बातों पर किसी का ‘कैरेक्टर असेसिनेशन’ (चरित्र हनन) नहीं किया जा सकता। बिना सबूत एक्शन लेना हमारी डिक्शनरी में नहीं है।”
‘एआई’ (AI) का ट्विस्ट: स्पेशल इफेक्ट्स से बदल दी कहानी
फिल्मों में जैसे वीएफएक्स (VFX) सब कुछ बदल देता है, वैसे ही प्रदेशाध्यक्ष ने इस पूरी कहानी में ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ का ऐसा तड़का लगाया कि सारे आरोप ‘स्पेशल इफेक्ट्स’ लगने लगे। उन्होंने पत्रकारों को चुनौती देते हुए कहा:
“यह एआई का जमाना है साहेब! मैं चाहूं तो अभी इसी वक्त तकनीक के सहारे खुद को परदे पर चलता हुआ दिखा सकता हूं, या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के गले मिलता हुआ ‘डीपफेक’ वीडियो स्क्रीन पर चला सकता हूं।”
जब मीडिया ने मीडिया रिपोर्ट्स और पुलिस डायरी का हवाला देते हुए ‘काउंटर पंच’ मारा कि ‘हुजूर, पुलिस की जांच में तो कहीं एआई (AI) का जिक्र तक नहीं है’, तो राठौड़ ने बड़े सधे हुए एक्टर की तरह “यह तफ्तीश का हिस्सा है” कहकर उस सीन को ही स्किप कर दिया। वहीं, जब 14 कद्दावर नेताओं की कथित ‘कास्टिंग लिस्ट’ (नामों की सूची) का सवाल आया, तो उन्होंने दो टूक कहा— “मेरी जानकारी में ऐसी कोई लिस्ट नहीं है, आप स्क्रिप्ट (लिस्ट) दे दो, मैं री-टेक (जांच) करवा लूंगा।” उनके मुताबिक, यह पूरी फिल्म सिर्फ भाजपा की इमेज को ‘फ्लॉप’ करने की एक साजिश है।
बैकस्टेज का सस्पेंस : जयपुर के ‘हाइ कमांड’ के आदेश पर किसका ‘प्रोटेक्शन’?
इस फिल्म का असली सस्पेंस तो बैकस्टेज (पर्दे के पीछे) चल रहा है। गपशप गली में चर्चा आम है कि इस कांड की रील जयपुर में प्रदेश प्रभारी राधा मोहन अग्रवाल के ‘सेंसर बोर्ड’ तक बहुत पहले ही पहुंच चुकी है। खबर तो यह भी थी कि उन्होंने और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ‘एक्शन’ के सीधे निर्देश दिए थे और कथित गुनहगारों से ‘इस्तीफे’ का क्लोजिंग शॉट भी साइन करवा लिया गया था। मगर, ऐन वक्त पर इस थ्रिलर में ट्विस्ट आ गया— आकाओं का ऐसा ‘गॉडफादर’ प्रोटेक्शन मिला कि किसी पर कोई आंच नहीं आई।
विधानसभा के रिकॉर्ड में दर्ज है यह ‘क्लासिक’ ड्रामा
भले ही भाजपा संगठन ने इस ‘उदयपुर फाइल्स’ पर ‘द एंड’ का बोर्ड टांगने की पूरी कोशिश कर दी हो, लेकिन विपक्षी खेमे के ‘डायरेक्टर’ यानी नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली इस मुद्दे को ठंडे बस्ते में डालने के मूड में नहीं हैं। वे पहले ही राजस्थान विधानसभा के पटल पर इस ‘मूवी’ का ट्रेलर चलाकर सरकार को कटघरे में खड़ा कर चुके हैं, जो अब सदन के ऐतिहासिक रिकॉर्ड का हिस्सा बन चुका है।
फिलहाल के लिए, इस पॉलिटिकल थ्रिलर का ‘सीक्वल’ भले ही टल गया हो, लेकिन जनता इस सस्पेंस के अगले पार्ट का इंतजार जरूर कर रही है!
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