भील बस्ती का वो अंधेरा राज : शराब, लात-घूंसे और 24 घंटे में बेनकाब हुए कातिल

क्राइम डेस्क, उदयपुर।

तारीख: 11 मई 2026। सुबह के करीब 6 बज रहे थे। उदयपुर के सायरा थाना इलाके की भील बस्ती में अभी सूरज की किरणें ठीक से बिखरी भी नहीं थीं कि लाडूराम हांफता हुआ धर्मेश के घर पहुंचा। उसके चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थीं। उसने जो कहा, उसे सुनकर धर्मेश के पैरों तले जमीन खिसक गई—”तुम्हारे पिता मोहनलाल की लाश पास के खेत में लहूलुहान हालत में पड़ी है…”

सनसनीखेज ‘ब्लाइंड मर्डर’ और पुलिस की एंट्री

सूचना मिलते ही सायरा थाना इलाके में हड़कंप मच गया। 29 साल का धर्मेश भागता हुआ खेत में पहुंचा, तो वहां उसके पिता मोहनलाल (निवासी रावो का सायरा) मृत पड़े थे। उनके शरीर पर चोटों के गहरे और बेरहम निशान थे। चीख-पुकार के बीच गांव वालों की भीड़ जुट गई।

इधर, वारदात की खबर मिलते ही जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन के निर्देश पर सायरा थानाधिकारी कानाराम सिरवी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। लाश की हालत देखकर साफ था कि यह कोई हादसा नहीं, बल्कि एक बेरहम कत्ल था। पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि कातिल का कोई सुराग नहीं था, कोई चश्मदीद नहीं था। यह एक पूरी तरह से ‘ब्लाइंड मर्डर’ था। पुलिस ने तुरंत बी.एन.एस. 2023 की धारा 103(1) के तहत हत्या का मुकदमा (मामला संख्या 127/2026) दर्ज किया।

24 घंटे का ‘काउंटडाउन’: कड़ियों से कड़ियां जुड़ीं

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गोपाल स्वरूप मेवाड़ा और वृत्ताधिकारी गोपाल चन्देल खुद इस केस की मॉनिटरिंग कर रहे थे। थानाधिकारी कानाराम सिरवी ने अपनी टीम के साथ मिलकर भील बस्ती और आसपास के इलाकों में जाल बिछाया। एक तरफ मुखबिरों को एक्टिव किया गया, तो दूसरी तरफ साइंटिफिक और टेक्निकल इनपुट (सर्विलांस) का सहारा लिया गया।

जांच में सामने आया कि मोहनलाल पेशे से कारीगर थे और आखिरी बार 10 मई की रात को भील बस्ती की तरफ जाते देखे गए थे। पुलिस ने जब संदिग्धों की लिस्ट बनाई, तो बस्ती के ही दो नामों पर आकर सुई अटक गई—एक 42 साल की महिला डाली बाई और दूसरा 60 साल का बुजुर्ग देवाराम।

कड़ाई से पूछताछ और खौफनाक सच का खुलासा

पुलिस ने बिना वक्त गंवाए दोनों को हिरासत में लिया। शुरुआत में तो दोनों ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन जब पुलिसिया अंदाज में कड़ाई से पूछताछ हुई, तो उनके सब्र का बांध टूट गया। उन्होंने जो सच उगला, उसने सबको चौंका दिया।

क्या हुआ था उस काली रात को?

आरोपियों ने कुबूल किया कि 10 मई की रात मोहनलाल शराब के नशे में धुत था। भील बस्ती में किसी बात को लेकर मोहनलाल की डाली बाई और देवाराम से बहस हो गई। शराब के नशे में बात इतनी बढ़ी कि दोनों आरोपियों के सिर पर खून सवार हो गया। उन्होंने मोहनलाल पर लात और घूसों की बरसात कर दी। अधेड़ उम्र के मोहनलाल इस बर्बर हमले को झेल नहीं पाए और पीटते-पीटते बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े।

जब मोहनलाल ने हिलना-डुलना बंद कर दिया, तो दोनों आरोपी डर गए। पकड़े जाने के खौफ में उन्होंने बेहोश मोहनलाल को घसीटा और पास के एक सुनसान खेत में फेंक कर अपने-अपने घर लौट गए। पूरी रात मोहनलाल तड़पते रहे और समय पर इलाज न मिलने के कारण खेत में ही उनका दम टूट गया।

कानून के शिकंजे में कातिल

सायरा पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए वारदात के महज 24 घंटे के भीतर दोनों आरोपियों को बेनकाब कर सलाखों के पीछे भेज दिया:

डाली बाई (42 वर्ष), पत्नी स्व. रामलाल उर्फ रामाराम।

देवाराम (60 वर्ष), पिता लालाराम।

इन जांबाजों ने सुलझाई गुत्थी : इस अंधे कत्ल का पर्दाफाश करने वाली टीम में थानाधिकारी कानाराम सिरवी के साथ सहायक उप-निरीक्षक राजेन्द्र सिंह, शम्भु सिंह और कांस्टेबल रूपाराम (557), धर्मेन्द्र (2606), भावेश (590) व नरपतराम (272) शामिल रहे।

एक मामूली सी कहासुनी ने एक हंसते-खेलते परिवार के मुखिया को छीन लिया, लेकिन सायरा पुलिस की मुस्तैदी ने कातिलों को उनके अंजाम तक पहुंचाकर यह साफ कर दिया कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं।

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