
कोटा/उदयपुर। राजस्थान के शिक्षा और औद्योगिक केंद्र कोटा में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का एक अद्भुत संगम देखने को मिला। श्री मंगलमय चमत्कारी धाम हनुमान सेवा समिति की ओर से कॉमर्स कॉलेज ग्राउंड में आयोजित एक भव्य समारोह में श्री नर्मदेश्वर महादेव शिवलिंग की विधिवत स्थापना की गई। इस ऐतिहासिक और पावन अवसर पर मेवाड़ राजवंश की महान सनातन परंपराओं की झलक भी देखने को मिली।
इस धार्मिक अनुष्ठान में मेवाड़ के 77वें श्री एकलिंग दीवान, डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ मुख्य यजमान के रूप में सम्मिलित हुए। वैदिक मंत्रोच्चार और पूर्ण विधि-विधान के बीच उनके कर-कमलों द्वारा श्री नर्मदेश्वर महादेव शिवलिंग को गर्भगृह में स्थापित किया गया। इस दौरान पूरा परिसर ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय एकलिंगनाथ’ के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
भक्ति ही अविद्या के अंधकार को मिटाती है : डॉ. लक्ष्यराज सिंह
स्थापना समारोह के बाद उपस्थित विशाल जनसमूह और शिवभक्तों को संबोधित करते हुए डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने अध्यात्म का संदेश दिया। उन्होंने कहा:
“भगवान आशुतोष शिव जब अपने भक्त की सच्ची भक्ति से प्रसन्न होते हैं, तभी वे उसे दिव्य शक्ति प्रदान करते हैं। यही शक्ति अविद्या के अंधकार का नाश करती है और भक्त के इष्ट प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करती है।”
1500 वर्षों की ‘दीवान परंपरा’ का किया जिक्र
अपने संबोधन में उन्होंने मेवाड़ और भगवान शिव के अटूट संबंध पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मेवाड़ पर महादेव की सदैव विशेष कृपा रही है। भगवान शिव का ‘श्री एकलिंग स्वरूप’ ही मेवाड़ का वास्तविक राजा (अधिपति) है।
उन्होंने बताया कि मेवाड़ के महाराणाओं ने कभी खुद को राजा नहीं माना, बल्कि स्वयं को प्रभु श्री एकलिंगनाथ जी का सेवक और न्यासी (ट्रस्टी) समझा। पिछले लगभग 1500 वर्षों से मेवाड़ का राजवंश ‘एकलिंग दीवान’ के रूप में राज्य की धरोहर, प्राचीन संस्कृति और सनातन परंपराओं के संरक्षण के लिए समर्पित भाव से काम कर रहा है।
कोटा के लिए सुख-समृद्धि की कामना
समारोह के समापन पर उन्होंने आयोजन समिति और समस्त कोटा वासियों को इस भव्य धार्मिक उत्सव के लिए बधाई दी। साथ ही, उन्होंने श्री नर्मदेश्वर महादेव से कोटा क्षेत्र में सुख, समृद्धि, शांति और निरंतर प्रगति की मंगलकामना की।
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