वैश्विक स्तर पर बढ़ा भरोसा: हिंदुस्तान जिंक की रामपुरा आगुचा खदान बनी देश की पहली ‘जिंक मार्क’ सर्टिफाइड माइन

उदयपुर। विश्व की सबसे बड़ी एकीकृत जिंक उत्पादक कंपनी हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड (Vedanta Group) ने जिम्मेदार खनन और टिकाऊ उत्पादन (Sustainability) के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल किया है। कंपनी की दुनिया की सबसे बड़ी भूमिगत जिंक-सीसा खदान, रामपुरा आगुचा माइन, अब भारत की पहली ‘जिंक मार्क सर्टिफाइड’ खदान बन गई है। यह गौरव हासिल करने के बाद वैश्विक बाजारों और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के बीच हिंदुस्तान जिंक का भरोसा और अधिक मजबूत हो गया है।

आपको बता दें कि ‘जिंक मार्क’ वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त एक प्रतिष्ठित एश्योरेंस फ्रेमवर्क है। यह अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित पर्यावरण, सामाजिक और शासन (ESG) मानदंडों, जिम्मेदार सोर्सिंग प्रथाओं और पूरी मूल्य श्रृंखला (Value Chain) में पारदर्शिता के आधार पर ही जिम्मेदार जिंक उत्पादन को प्रमाणित करता है।

स्मेल्टिंग से लेकर माइनिंग तक: शुरू से अंत तक जिम्मेदार उत्पादन

यह सर्टिफिकेशन न केवल हिंदुस्तान जिंक बल्कि पूरे भारतीय खनन क्षेत्र के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। हाल ही में कंपनी ने अपने चंदेरिया स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स के लिए भी जिंक मार्क सर्टिफिकेशन प्राप्त किया था। अब रामपुरा आगुचा खदान को यह दर्जा मिलने से हिंदुस्तान जिंक देश की पहली ऐसी कंपनी बन गई है, जो माइनिंग से लेकर स्मेल्टिंग तक, अपनी पूरी उत्पादन श्रृंखला में पूरी तरह जिम्मेदार तरीके से तैयार जिंक उपलब्ध कराती है।

यह प्रतिष्ठित सर्टिफिकेशन ‘कॉपर मार्क एश्योरेंस फ्रेमवर्क‘ के तहत एक स्वतंत्र तृतीय-पक्ष (Third-Party) मूल्यांकन के बाद प्रदान किया गया है। इस कड़े मूल्यांकन ने पुष्टि की है कि रामपुरा आगुचा माइन प्रमुख पर्यावरणीय और सामाजिक मापदंडों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तय नियमों का पूरी तरह पालन कर रही है।

वैश्विक ग्राहकों की बदलती मांग पर खरी उतरी कंपनी

आज के दौर में दुनिया भर के उद्योग स्थायी खरीद और जिम्मेदार सोर्सिंग को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं। अब वैश्विक ग्राहक केवल उत्पाद की गुणवत्ता ही नहीं देखते, बल्कि यह भी देखते हैं कि धातुओं का उत्पादन और प्रबंधन किस प्रकार किया गया है। ऐसे में यह सर्टिफिकेशन उन ग्राहकों के लिए हिंदुस्तान जिंक की साख को और मजबूत करता है, जो पारदर्शी और ईएसजी अनुरूप कच्चे माल की तलाश में हैं।

हिंदुस्तान जिंक स्टील गैल्वनीकरण, इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमोबाइल, रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस मैन्यूफेक्चरिंग जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को अपनी सेवाएं देती है। इन सभी सेक्टर्स में कम कार्बन उत्सर्जन वाले पदार्थों की मांग लगातार बढ़ रही है और यह सर्टिफिकेशन कंपनी को वैश्विक खरीद मानकों के अनुरूप बनाता है।

“यह पहचान पारदर्शिता और ईएसजी उत्कृष्टता के प्रति हमारे दृष्टिकोण को दर्शाती है” — अरुण मिश्रा (सीईओ)

इस गौरवशाली उपलब्धि पर हिंदुस्तान जिंक के सीईओ अरुण मिश्रा ने कहा, “रामपुरा आगुचा माइन को जिंक मार्क सर्टिफिकेशन मिलना, हमारी पूरी वैल्यू चेन में जिम्मेदार उत्पादन और ईएसजी उत्कृष्टता के प्रति एकीकृत दृष्टिकोण को दर्शाता है। जैसे-जैसे वैश्विक सप्लाई चेन विकसित हो रही हैं, ग्राहक तेजी से ऐसी धातुओं की तलाश कर रहे हैं जो उनकी स्थिरता प्राथमिकताओं के अनुकूल हों। यह पहचान कंपनी में ग्राहकों के विश्वास को मजबूत करती है कि वह उच्च-गुणवत्ता वाले जिंक के लिए एक भरोसेमंद वैश्विक भागीदार है।”

भविष्य की तैयारी: तकनीक-आधारित खनन और ‘नेट जीरो’ का लक्ष्य

रामपुरा आगुचा माइन आधुनिक टेक्नोलॉजी, बेहतरीन संचालन और टिकाऊ संसाधन प्रबंधन के माध्यम से लगातार नए मानक स्थापित कर रही है। कंपनी का लक्ष्य डीकार्बोनाइजेशन, सर्कुलर इकोनॉमी, जैव विविधता संरक्षण और जल सकारात्मकता (Water Positivity) के जरिए पर्यावरण को सुरक्षित रखना है।

एसएण्डपी ग्लोबल कॉर्पोरेट सस्टेनेबिलिटी एसेसमेंट 2025 द्वारा लगातार तीन बार विश्व की सबसे सस्टेनेबल मेटल और माइनिंग कंपनी के रूप में मान्यता प्राप्त हिंदुस्तान जिंक ने एशिया के पहले कम-कार्बन वाले जिंक ब्रांड ‘इकोज़ेन’ (EcoZen) की भी शुरुआत की है। कंपनी वर्ष 2050 या उससे पहले पूरी तरह ‘नेट जीरो’ (Net Zero) उत्सर्जन हासिल करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है।

About Author

Leave a Reply