
उदयपुर/राजसमंद।
गुरूजनों का अभिभावकों जैसा स्नेह और घर से दूर घर सा माहौल…यह सिर्फ शब्द नहीं हैं, बल्कि उन 1600 से अधिक ग्रामीण बच्चों के दिलों की आवाज़ है, जिनके जीवन में इस तपती गर्मी में उम्मीदों और ज्ञान का एक नया सवेरा हुआ है। हिंदुस्तान जिंक द्वारा चलाए जा रहे ‘शिक्षा संबल’ कार्यक्रम के ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण शिविर (समर कैंप) आज राज्य के 6 जिलों—उदयपुर, सलुम्बर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा और अजमेर के सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए भविष्य की मजबूत नींव साबित हो रहे हैं। इन शिविरों में बच्चों के चेहरों पर तैरती मुस्कान और आंखों में चमकता आत्मविश्वास इस बात की गवाही दे रहा है कि जब सही मार्गदर्शन मिलता है, तो हुनर खुद-ब-खुद निखर उठता है।
ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में अक्सर बच्चों को विज्ञान, गणित और अंग्रेजी जैसे कठिन विषयों में हिचकिचाहट या डर महसूस होता है। बच्चों के इसी डर को दूर करने और पढ़ाई में उनकी रुचि जगाने के लिए पिछले 20 वर्षों से शिक्षा संबल कार्यक्रम एक वरदान बना हुआ है। इस वर्ष के शिविरों में विशेषज्ञ अध्यापकों द्वारा खेल-खेल में और बेहद दिलचस्प तरीकों से इन विषयों की बुनियादी समझ विकसित की जा रही है। जहाँ सरकारी स्कूलों में पद रिक्त हैं, वहाँ हिंदुस्तान जिंक द्वारा विषय अध्यापकों के माध्यम से बच्चों की पढ़ाई को निर्बाध गति दी जा रही है।
समग्र शिक्षा को बढ़ावा देने के इसी सिलसिले में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, आगूचा में 9वें ग्रीष्मकालीन शिविर का औपचारिक उद्घाटन किया गया। इस गौरवमयी अवसर पर आईबीयू सीईओ (आगूचा) राममुरारी, एसीबीईओ शिवकुमार टेलर और आगूचा माइन के हेड सीएसआर भुवनेश शर्मा सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। आगूचा के इस गैर-आवासीय शिविर में 10 उच्च माध्यमिक विद्यालयों के 200 से अधिक बच्चों ने पंजीकरण कराया है, जहां वे अपनी शैक्षणिक और व्यक्तिगत क्षमताओं को निखार रहे हैं।
विद्या भवन के आंगन में ‘आवासीय शिविर’ की अनूठी दुनिया
विद्या भवन सोसायटी उदयपुर के सहयोग से आयोजित 9वां आवासीय ग्रीष्मकालीन शिविर विद्या भवन सीनियर सेकेंडरी स्कूल में शुरू हो चुका है। 20 मई से 19 जून 2026 तक चलने वाले इस अनूठे आवासीय प्रशिक्षण शिविर में चंदेरिया, दरीबा, देबारी, कायड़, आगूचा और जावर जैसी सभी 6 लोकेशंस से आए 340 से अधिक बच्चे एक छत के नीचे रहकर ज्ञान अर्जित कर रहे हैं। इनमें कक्षा 10 के लगभग 240, कक्षा 8 के 50 और कक्षा 12 (विज्ञान संकाय) के 50 होनहार छात्र शामिल हैं। इसके अलावा विभिन्न लोकेशंस पर चल रहे गैर-आवासीय कैंपों में भी 1200 से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं।
रोबोटिक्स, मिट्टी कला और डिजिटल कक्षाएं: सर्वांगीण विकास पर जोर
10 वर्ष पूर्व एक छोटे से प्रायोगिक तौर पर शुरू हुआ यह आवासीय शिविर आज अपनी अभूतपूर्व सफलता की कहानी खुद बयां कर रहा है। बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए इस बार शिविर में आधुनिक और पारंपरिक कलाओं का एक खूबसूरत संगम देखने को मिल रहा है। बच्चे जहाँ एक तरफ डिजिटल कक्षाओं और ऑडियो-विजुअल सामग्री के माध्यम से पढ़ाई कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ रोबोटिक्स जैसी उभरती तकनीकों से रूबरू हो रहे हैं। इतना ही नहीं, मिट्टी कला, पॉटरी, वेस्ट मटेरियल से क्रिएटिव निर्माण, खेलकूद, बौद्धिक प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक गतिविधियों के जरिए उनके व्यक्तित्व का कायाकल्प किया जा रहा है। हिंदुस्तान जिंक का यह प्रयास केवल साक्षर बनाना नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवेश के इन बच्चों को आत्मनिर्भर, सजग और आत्मविश्वास से भरपूर इंसान बनाना है।
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