
उदयपुर/जयपुर। राजस्थान में शासकीय व्यवस्थाओं को पारदर्शी, ईमानदार और जनता के प्रति जवाबदेह बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में एक ऐतिहासिक अभियान चल रहा है। राज्य सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ (भ्रष्टाचार के प्रति कतई बर्दाश्त नहीं) नीति के तहत राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में बड़ी वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ एक व्यापक और कठोर कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई के तहत उदयपुर के अस्पतालों पर विशेष रूप से गाज गिरी है, जहां राजकोष के संरक्षण और पारदर्शिता को सर्वोपरि रखा गया है।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसार के निर्देशन में विभाग ने व्यवस्थाओं के शुद्धिकरण के लिए कमर कस ली है। इसी कड़ी में ऑडिट के आधार पर कड़ी कार्रवाई करते हुए प्रदेश के 24 अस्पतालों पर करीब 3 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है:
उदयपुर में सख्त कदम : इस कार्रवाई के दायरे में उदयपुर का पारस जेके हॉस्पिटल भी प्रमुखता से शामिल है। उदयपुर सहित पूरे राज्य में की गई यह रिकवरी कार्रवाई यह सुनिश्चित करती है कि किसी भी स्तर पर जनता के पैसे का दुरुपयोग न हो।
51 अस्पताल निलंबित : बीते तीन महीनों में पूरी सजगता बरतते हुए प्रदेश भर में 51 अस्पतालों को योजना से निलंबित किया गया है, ताकि एक पारदर्शी और साफ-सुथरा सिस्टम काम कर सके।
गहन परीक्षण के बाद निर्णय : अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. निधि पटेल द्वारा गहन परीक्षण, साक्ष्यों और अभिलेखों की विस्तृत सुनवाई के बाद ही यह सुधारात्मक निर्णय लिया गया है।
व्यवस्थाओं का शुद्धिकरण: संसाधन और राजकोष का संरक्षण
जिस प्रकार हम अपने प्राकृतिक संसाधनों, जैसे उदयपुर की झीलों और नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए सख्त नियम और रीसाइक्लिंग तकनीकों को अपनाते हैं, ठीक उसी तरह मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार शासकीय व्यवस्थाओं को भी ‘प्रदूषण-मुक्त’ और स्वच्छ बनाने में जुटी है।
प्रमुख शासन सचिव श्रीमती गायत्री राठौड़ ने बताया कि ऑडिट के दौरान दस्तावेजों की डुप्लीकेसी, आवश्यकता से अधिक जांचें कराने और अनुचित क्लेम जैसी अनियमितताएं पाई गईं। इन पर रोक लगाना ठीक वैसा ही है जैसे जल स्रोतों की बर्बादी को रोककर जल सुरक्षा सुनिश्चित करना। राजकोष की एक-एक पाई को बचाना भी आर्थिक और सामाजिक पर्यावरण को सशक्त करने का एक जरिया है।
एक पारदर्शी और सुरक्षित कल की ओर कदम
“योजना के संचालन में पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता है। राज्य सरकार का उद्देश्य है कि राजकोष की एक-एक पाई पात्र लाभार्थियों के हित में ही व्यय हो। भविष्य में भी वित्तीय गड़बड़ी पाए जाने पर ऐसी ही कठोर कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।” — हरजीलाल अटल, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी)
उदयपुर सहित पूरे प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ उठाए गए ये सकारात्मक कदम साबित करते हैं कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का विजन पूरी तरह से एक सुरक्षित, न्यायपूर्ण और समृद्ध राजस्थान के निर्माण का है। जब व्यवस्थाएं साफ और सुरक्षित होंगी, तभी समाज का वास्तविक और सतत विकास संभव हो पाएगा।
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