
उदयपुर/चित्तौड़गढ़। पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ औद्योगिक विकास (Sustainable Development) की दिशा में राजस्थान से एक बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आ रही है. विश्व की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड जिंक उत्पादक कंपनी हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने राज्य में 250 हेक्टेयर क्षेत्र के विशाल इकोलॉजिकल रेस्टोरेशन प्रोजेक्ट के लिए द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (TERI) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं [cite: उदयपुर, 6 जून 2026।, हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने राजस्थान में 250-हेक्टेयर के इकोलॉजिकल रेस्टोरेशन प्रोजेक्ट को विकसित करने के लिए द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट के साथ एमओयू साइन किया।].
यह प्रोजेक्ट चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित कंपनी के चंदेरिया लेड जिंक स्मेल्टर कॉम्प्लेक्स में लागू किया जाएगा [cite: यह प्रोजेक्ट हिंदुस्तान जिंक के चंदेरिया लेड जिंक स्मेल्टर कॉम्प्लेक्स में विकसित किया जाएगा।, चित्तौड़गढ़ जिले में हिंदुस्तान जिंक के चंदेरिया स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स में शुरू होने वाली यह पहल…]. इसके तहत किसी औद्योगिक परिसर में विश्व का सबसे बड़ा ग्रीन कवर एरिया (हरित क्षेत्र) विकसित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है.
‘सस्टेनेबिलिटी गोल 2030’ की दिशा में बड़ा कदम
इस बड़े प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य औद्योगिक जमीन को प्राकृतिक इकोसिस्टम में बदलकर जैव विविधता (Biodiversity) और क्लाइमेट रेजिलिएंस को बढ़ावा देना है [cite: औद्योगिक जमीन को प्राकृतिक इकोसिस्टम में बदलने की बड़े पैमाने की पहल, जिससे बायोडायवर्सिटी और क्लाइमेट रेजिलिएंस को मिलेगा बढ़ावा।]. यह साझेदारी हिंदुस्तान जिंक के ‘सस्टेनेबिलिटी गोल 2030’ को हासिल करने में मील का पत्थर साबित होगी, जिसका लक्ष्य प्रकृति-सकारात्मक (Nature-Positive) परिणामों को सपोर्ट करना है [cite: यह सहयोग हिंदुस्तान जिंक के सस्टेनेबिलिटी गोल 2030 को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा।, साथ ही लंबे समय में नेट पॉजिटिव इम्पैक्ट और प्रकृति-सकारात्मक नतीजों को सपोर्ट करने की दिशा में लगातार काम करना है।].
प्रोजेक्ट की मुख्य वैज्ञानिक विशेषताएं:
मल्टी-लेयर्ड अप्रोच: प्रोजेक्ट के तहत वैज्ञानिक पद्धति से स्थानीय इलाके के अनुकूल पेड़, झाड़ियाँ, जड़ी-बूटियाँ और घास लगाई जाएगी। यह प्रोजेक्ट एक वैज्ञानिक, मल्टी-लेयर्ड इकोलॉजिकल रेस्टोरेशन अप्रोच को अपनाएगा, जिसमें स्थानीय इलाके के अनुकूल पेड़, झाड़ियाँ, जड़ी-बूटियाँ और घास शामिल होंगे।
इकोसिस्टम मैनेजमेंट: इसमें जल निकायों (Water Bodies) और जलीय इकोसिस्टम को पुनर्जीवित करने के साथ-साथ बाहरी नुकसानदेह प्रजातियों का प्रबंधन भी शामिल है.
विशेषज्ञों की निगरानी: TERI के विषय-विशेषज्ञों द्वारा पौधों की प्रजातियों की पहचान करने से लेकर प्लानिंग, डिजाइनिंग और इम्प्लीमेंटेशन तक हर चरण की कड़ाई से मॉनिटरिंग की जाएगी। टीईआरई उपयुक्त स्थानीय और अनुकूलनशील पौधों की प्रजातियों की पहचान करने में भी मदद करेगा और प्लानिंग, डिजाइन और इम्प्लीमेंटेशन के चरणों में विषय-विशेषज्ञों को शामिल करेगा।
पहले चरण की बड़ी सफलता: 22.25 हेक्टेयर क्षेत्र में लहलहाए 56,400 पेड़
यह नया सहयोग दोनों संस्थाओं के पुराने और सफल ट्रैक रिकॉर्ड को आगे बढ़ाता है [cite: यह नया सहयोग चंदेरिया स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स में टीआरआई के साथ हिंदुस्तान जिंक के लंबे समय से चले आ रहे सहयोग को और आगे बढ़ाता है। चंदेरिया कॉम्प्लेक्स के जारोफिक्स यार्ड में TERI की माइकोराइजा टेक्नोलॉजी (Mycorrhiza Technology) का उपयोग करके पहले ही दो चरणों में 22.25 हेक्टेयर औद्योगिक बंजर जमीन को घने जंगल (ग्रीन कवर) में बदला जा चुका है। टीईआरई की माइकोराइजा टेक्नोलॉजी से 22.25 हेक्टेयर औद्योगिक बंजर जमीन को पहले ही सफलतापूर्वक रेस्टोर किया जा चुका है।, जारोफिक्स यार्ड में, दो चरणों में 22.25 हेक्टेयर क्षेत्र में रेस्टोरेशन का काम पहले ही पूरा हो चुका है।, टीईआरआई की माइकोराइजा टेक्नोलॉजी के उपयोग से इस पहल के तहत लगभग 56,400 स्थानीय पेड़ लगाए गए हैं, जिससे औद्योगिक क्षेत्र घनी हरियाली तैयार हुई है।
इसके अतिरिक्त, इसी परिसर में एक सुरक्षित लैंडफिल के ऊपर 6 हेक्टेयर का बायोडायवर्सिटी पार्क भी विकसित किया जा रहा है. इस तकनीक के जरिए अब तक लगभग 56,400 स्थानीय पौधे रोपे जा चुके हैं.
“सस्टेनेबल माइनिंग में ग्लोबल बेंचमार्क स्थापित करना हमारा लक्ष्य” — अरुण मिश्रा (CEO)
“हिंदुस्तान जिंक के कामकाज के मूल में सस्टेनेबिलिटी (स्थिरता) शामिल है। डीकार्बोनाइजेशन, जल प्रबंधन और जैव विविधता का संरक्षण हमारी प्राथमिकताएं हैं। TERI के साथ हमारी यह साझेदारी औद्योगिक जमीन को एक मजबूत और समृद्ध ग्रीन इकोसिस्टम में बदलने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इंटरनेशनल काउंसिल ऑन माइनिंग एंड मेटल्स (ICMM) में शामिल होने वाली पहली भारतीय कंपनी के रूप में, हम पर्यावरण और समुदायों के लिए स्थायी मूल्य बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।”
इस उपलब्धि पर हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के सीईओ अरुण मिश्रा ने कहा कि, “हिंदुस्तान जिंक में, हमारे कामकाज के तरीके में सस्टेनेबिलिटी सबसे महत्वपूर्ण है। पानी के सही प्रबंधन और सर्कुलरिटी से लेकर डीकार्बोनाइजेशन और बायोडायवर्सिटी के संरक्षण तक… टीईआरआई के साथ हमारी साझेदारी इस प्रतिबद्धता को दर्शाती है… आईसीएमएम में शामिल होने वाली पहली भारतीय कंपनी के तौर पर, हम सस्टेनेबल माइनिंग में ग्लोबल बेंचमार्क के साथ तालमेल बिठा रहे हैं…”
ESG और ग्रीन एनर्जी में शानदार परफॉर्मेंस
वेदांता ग्रुप की कंपनी हिंदुस्तान जिंक को हाल ही में S&P ग्लोबल कॉर्पोरेट सस्टेनेबिलिटी असेसमेंट 2025 में लगातार तीसरे वर्ष विश्व की सबसे सस्टेनेबल मेटल्स और माइनिंग कंपनी का गौरव प्राप्त हुआ है। वेदांता ग्रुप की कंपनी हिंदुस्तान जिंक को हाल ही में एसएण्डपी ग्लोबल कॉर्पोरेट सस्टेनेबिलिटी असेसमेंट 2025 में लगातार तीसरे वर्ष विश्व की सबसे सस्टेनेबल मेटल्स और माइनिंग कंपनी का दर्जा दिया गया। कंपनी पर्यावरण संरक्षण (ESG Roadmap) के लिए कई मोर्चों पर काम कर रही है:
रिन्यूएबल एनर्जी: कंपनी ने 530 मेगावाट का रिन्यूएबल एनर्जी एग्रीमेंट किया है, जिससे उसकी 70% से अधिक बिजली की जरूरतें पूरी होंगी और इसकी शुरुआती सप्लाई भी शुरू हो चुकी है [cite: कंपनी 530 मेगावाॅट के चैबीसों घंटे चलने वाले रिन्यूएबल एनर्जी एग्रीमेंट के जरिए अपनी सस्टेनेबिलिटी परफॉर्मेंस को मजबूत कर रही है। इससे उसकी 70 प्रतिशत से अधिक बिजली की जरूरतें पूरी होने की उम्मीद है और शुरुआती सप्लाई पहले ही शुरू हो चुकी है।
वॉटर रीसाइक्लिंग : कंपनी ने अपने वाटर रीसाइक्लिंग रेट को बढ़ाकर 49 प्रतिशत तक पहुंचा दिया है.
ग्रीन मोबिलिटी: पर्यावरण अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए कंपनी ने अपने ग्रीन मोबिलिटी बेड़े (Fleet) को बढ़ाकर 232 वाहनों तक पहुंचा दिया है, जिसमें इलेक्ट्रिक और एलएनजी (LNG) से चलने वाले वाहन शामिल हैं। और अपने ग्रीन मोबिलिटी फ्लीट को बढ़ाकर 232 वाहन कर लिया है, जिसमें इलेक्ट्रिक और एलएनजी से चलने वाले वाहन शामिल हैं।
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