
उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर में इन दिनों प्रशासनिक दौरों, निरीक्षणों और घोषणाओं का दौर तो तेजी से चल रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। शहर की बुनियादी समस्याएं आज भी मुंह बाए खड़ी हैं और आम जनता त्रस्त है। चाहे आयड़ नदी को कब्जों से मुक्त कराने का मामला हो, मुख्यमंत्री शहरी सेवा शिविरों की समीक्षा हो या फिर सामाजिक आयोजनों की तैयारियां, सरकारी अमला और जनप्रतिनिधि केवल दौरों और कागजी निर्देशों तक ही सीमित नजर आ रहे हैं।
आयड़ नदी में बेखौफ अतिक्रमण : स्मार्ट सिटी की लापरवाही आई सामने
हाल ही में शहर विधायक ताराचंद जैन, जिला कलेक्टर गौरव अग्रवाल और नगर निगम कमिश्नर अभिषेक खन्ना सहित प्रशासनिक अमले ने आयड़ नदी का पैदल दौरा किया। इस दौरान यह चौंकाने वाला सच सामने आया कि आयड़ नदी में 15 से 20 फीट तक पक्के अवैध निर्माण हो चुके हैं।
स्मार्ट सिटी की बड़ी लापरवाही : दौरे के दौरान यह भी खुलासा हुआ कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत नदी पेटे में गलत जगह दीवार बना दी गई, जिसने अप्रत्यक्ष रूप से अतिक्रमणकारियों को बढ़ावा देने का काम किया। खुद कलेक्टर ने माना कि स्मार्ट सिटी ने दीवार गलत बनाई है।
कागजी निर्देश : सीमांकन कर अवैध निर्माणों पर लाल स्याही से क्रॉस का निशान लगाने, नए निर्माण रोकने और फेंसिंग के टेंडर जारी करने के निर्देश तो दिए हैं, लेकिन सवाल यह उठता है कि जब अधिकारी पिछले तीन साल से सीमांकन ही कर रहे थे, तो 90 प्रतिशत नदी क्षेत्र में पक्के निर्माण कैसे हो गए?
इतिहास से सबक नहीं : 1972 की भीषण बाढ़ का उदाहरण सामने होने के बावजूद, जहाँ अशोक नगर श्मशान की चद्दरें तक डूब गई थीं, प्रशासन ने नदी को संकरा होने से रोकने के लिए समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
शिविरों के दावों के बीच फेल साबित हो रहा बिजली-पानी का तंत्र
शहर विधायक ने अंबामाता के अटल सभागार में चल रहे मुख्यमंत्री शहरी सेवा शिविर का निरीक्षण कर पट्टे बांटे और अधिकारियों को जनहित के काम करने के निर्देश दिए। लेकिन इस चमक-दमक के पीछे शहर का असली चेहरा छिपा हुआ है:
स्मार्ट सिटी में वायरलैस योजना में बिजली के तार व खंभे नहीं हटे: स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन शहर की संकरी सड़कों के बीच से अब तक बिजली के पुराने खंभे नहीं हटाए जा सके हैं, जो आए दिन हादसों को आमंत्रण दे रहे हैं।
यातायात व्यवस्था ध्वस्त : सड़कों पर बेतरतीब निर्माण और बिजली के खंभों के कारण शहर का ट्रैफिक पूरी तरह बदहाल हो चुका है। पीक आवर्स में पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को घंटों जाम से जूझना पड़ता है।
बिजली-पानी का संकट : भीषण गर्मी के इस मौसम में शहर का बिजली तंत्र पूरी तरह फेल साबित हो रहा है। अघोषित कटौती और लो-वोल्टेज की समस्या आम है। वहीं, झीलों के शहर कहलाने वाले उदयपुर में कई रिहायशी इलाकों में पेयजल आपूर्ति ठप है या भारी किल्लत बनी हुई है।
दौरों की राजनीति : उदयपुर से अलवर तक की चिंता
एक तरफ जहां उदयपुर की जनता मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है, वहीं जनप्रतिनिधियों का ध्यान अन्य कार्यक्रमों की तैयारियों पर भी बंटा हुआ है। 23 जून 2026 को अलवर में आयोजित होने वाले स्व. सुंदर सिंह भंडारी ट्रस्ट के सम्मान समारोह की तैयारियों के लिए बैठकों का दौर जारी है। इसमें कोई शक नहीं कि सामाजिक मूल्य और वरिष्ठों का सम्मान जरूरी है, लेकिन स्थानीय जनता का यह पूछना लाजिमी है कि उनकी रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान कब होगा?
उदयपुर में चल रहे प्रशासनिक निरीक्षण केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा जनता भुगत रही है। जब तक केवल ‘क्रॉस के निशान’ लगाने और ‘निर्देश देने’ से आगे बढ़कर कड़े एक्शन नहीं लिए जाते, तब तक स्मार्ट सिटी का यह ढांचा केवल एक भ्रम ही बना रहेगा।
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