
बड़ा मिशन : धरती बचाओ, भविष्य बचाओ (Save Earth. Save Future) के संकल्प के साथ पूरे देश में चलेगा सालभर का अभियान।
राष्ट्रव्यापी नेटवर्क : देश के 21 राज्यों और 101 विश्वविद्यालयों के समन्वय से जुड़ेगी पर्यावरण प्रेमियों की टोली।
डेडलाइन : संस्थान ने सभी समन्वयकों से 30 जून तक मांगी 21-21 वॉलंटियर्स की सूची।
उदयपुर। पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति संवर्द्धन के क्षेत्र में कार्यरत अग्रणी संस्था ‘प्रकृति शोध संस्थान, उदयपुर’ (Prakriti Research Society, Udaipur – PRSU) ने पर्यावरण चेतना को लेकर एक अभूतपूर्व राष्ट्रीय स्तर के मिशन (National Level Mission) की आधिकारिक घोषणा की है। संस्थान के संस्थापक और चेयरमैन प्रोफेसर पी. आर. व्यास द्वारा जारी की गई इस घोषणा के अनुसार, देश की पर्यावरण व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से पूरे भारतवर्ष में एक साल का व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
यह राष्ट्रव्यापी महाअभियान 1 जुलाई 2026 से शुरू होकर 30 जून 2027 तक निरंतर संचालित किया जाएगा।
देश के 21 राज्यों और 101 विश्वविद्यालयों की होगी सहभागिता
विवरण के मुताबिक, इस महाअभियान का खाका बेहद विशाल स्तर पर तैयार किया गया है। इस मिशन के अंतर्गत भारत के 21 राज्यों, देश के 101 प्रमुख विश्वविद्यालयों और कुल 2100 सक्रिय स्वयंसेवकों (वॉलंटियर्स) को सीधे तौर पर एक साझा मंच पर जोड़ा जा रहा है। संस्थान का मुख्य उद्देश्य देश के युवाओं और ग्रामीण-शहरी आबादी में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना जागृत करना है।
समन्वयकों को निर्देश: 30 जून तक भेजनी होगी वॉलंटियर्स की सूची
संस्थान प्रबंधन ने राज्य, क्षेत्रीय, जिला, विश्वविद्यालय, कॉलेज, पंचायत, गांव और वार्ड स्तर पर नियुक्त अपने सभी समन्वयकों (Coordinators) को दिशा-निर्देश जारी कर अपनी-अपनी टीमों को सक्रिय करने का अनुरोध किया है।
सभी स्तर के समन्वयकों को अपने-अपने क्षेत्र से कम से कम 21 योग्य स्वयंसेवकों की एक सूची तैयार कर 30 जून तक अनिवार्य रूप से संस्थान के केंद्रीय कार्यालय को भेजनी होगी।
वॉलंटियर्स की इस सूची में निम्नलिखित महत्वपूर्ण विवरण शामिल करना आवश्यक है-स्वयंसेवक का पूरा नाम और पिता का नाम, आधार कार्ड के अनुसार वर्तमान स्थायी पता, जन्मतिथि, कार्यक्षेत्र और चयनित लोकेशन का विवरण।
पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रमों से संबंधित पूर्व अनुभव या विवरण
‘धरती बचाओ, भविष्य बचाओ’ का मूल मंत्र
प्रकृति शोध संस्थान के चेयरमैन प्रोफेसर पी. आर. व्यास ने बताया कि वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए ज़मीनी स्तर पर काम करना समय की सबसे बड़ी मांग है। 1 जुलाई से शुरू हो रहा यह मिशन भारत के विभिन्न कोनों में पर्यावरण जागरूकता गतिविधियों, वृक्षारोपण और पारिस्थितिक संतुलन को बढ़ावा देने का माध्यम बनेगा।
संस्थान ने इस महाअभियान से जुड़ने और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए आधिकारिक संपर्क सूत्र 9116676627 भी जारी किया है, ताकि पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पित नागरिक इस राष्ट्रीय मुहिम का हिस्सा बन सकें।
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