
उदयपुर। सिनेमा का एक पुराना और आजमाया हुआ फॉर्मूला है—जब शहर नींद की चादर ओढ़कर ख्वाब देख रहा होता है, तब वर्दी जागती है और स्क्रिप्ट का क्लाइमेक्स अचानक सड़कों पर उतर आता है। फिल्मों में हमने अक्सर देखा है कि अँधेरे की आड़ में पनपने वाले किरदार जब खुद को कानून से ऊपर समझने की भूल कर बैठते हैं, तो एक ही झटके में नेपथ्य का पर्दा गिरता है और मंच पर सिर्फ हुक्म की आवाज गूंजती है। कुछ ऐसा ही दृश्य रविवार की भोर में झीलों की नगरी उदयपुर की सरजमीं पर साकार हुआ।
यह कोई तयशुदा पटकथा नहीं थी, बल्कि अपराध की रीढ़ पर किया गया एक सधा हुआ प्रहार था। जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन के निर्देशन में पूरे जिले में एक साथ ‘रेड व एरिया डोमिनेशन’ का महाअभियान छेड़ा गया। इस विशाल ऑपरेशन का सुपरविजन शहर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उमेश औझा, मुख्यालय के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुकुल शर्मा और खेरवाड़ा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रजत बिश्नोई के हाथों में था। जिले के तमाम वृताधिकारियों (डीएसपी) और थानाधिकारियों के नेतृत्व में बनी टीमों ने जब एक साथ संवेदनशील इलाकों और बदमाशी के अड्डों को घेरा, तो शहर की खामोशी में कानून के बूटों की धमक साफ सुनी जा सकती थी।
जीवन के यथार्थ की तरह, यह अभियान भी आंकड़ों की जुबानी अपनी दास्तान खुद कहता है। पुलिस ने कुल 49 नए मुकदमे दर्ज किए और 354 अपराधियों को सलाखों के पीछे धकेल दिया। वर्षों से कानून की आंख में धूल झोंक रहे 61 स्थाई वारंटी, 14 गिरफ्तारी वारंट के आरोपी और 1 इनामी बदमाश को धर दबोचा गया। इसके अलावा, 10 हार्डकोर और 147 हिस्ट्रीशीटरों के घरों पर अचानक दी गई दबिश ने यह साबित कर दिया कि पुरानी फाइलों में बंद चेहरे भी पुलिस की नजर से ओझल नहीं हैं; उनकी मौजूदा गतिविधियों से लेकर संपत्तियों तक का पूरा हिसाब-किताब खंगाला गया।
कार्रवाई के कैनवास पर हर उस बुराई को समेटा गया जो समाज की रगों में जहर घोलती है—चाहे वह आबकारी के 33 नए मामलों में 25 की गिरफ्तारी हो, आर्म्स एक्ट के 6 नए प्रकरणों में 6 अभियुक्तों की धरपकड़, या फिर एनडीपीएस और जघन्य अपराधों के वांछितों पर कसता शिकंजा। 154 पूर्व चालानशुदा बदमाशों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धाराओं में कानूनी पाबंदियों की जंजीरों से बांध दिया गया।
एसपी डॉ. अमृता दुहन का सख्त संदेश भी किसी दमदार संवाद की तरह गूंजता है—मादक पदार्थ, अवैध हथियार, सोशल मीडिया पर बंदूकों की नुमाइश और शांति भंग करने की हिमाकत करने वालों के लिए अब कोई रियायत नहीं होगी।
सिनेमा हमें सिखाता है कि शहर चाहे कितना भी हसीन क्यों न हो, उसकी खूबसूरती तभी सलामत रहती है जब अमन का पहरा मजबूत हो। उदयपुर की इस सुबह ने यही पैगाम दिया कि बुराई का पर्दा चाहे कितना भी बड़ा क्यों न खिंच जाए, कानून के इंसाफ का आखिरी सीन हमेशा सच के पक्ष में ही लिखा जाता है।
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