सूरजपोल स्थित मुस्लिम सिंधियान कब्रिस्तान की वक्फ संपत्ति पर कथित अतिक्रमण की जांच और कार्रवाई की मांग

 

इंतजामिया कमेटी ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

ऐतिहासिक शहरकोट को तोड़ने का आरोप: होटलों और दुकानों के निर्माण के दौरान प्राचीन परकोटे को क्षतिग्रस्त कर कब्रिस्तान की भूमि पर 2.5 से लेकर 15 फीट तक पक्का अतिक्रमण करने की शिकायत.

रिकॉर्ड्स की जांच की मांग: मेवाड़ रियासत के समय 100 बीघा में फैले इस कब्रिस्तान की भूमि की वास्तविक स्थिति को ताम्रपत्रों और राजस्व अभिलेखों के आधार पर स्पष्ट करने की अपील.

मकबरा सेक्रेट्री की ओर से दी गई जानकारी: इंतजामिया कमेटी ने कहा—”वक्फ संपत्ति पूरी मुस्लिम कौम की अमानत है, प्रशासन दोषियों पर सख्त कार्रवाई कर इसे अतिक्रमण मुक्त कराए.”

उदयपुर। उदयपुर के सूरजपोल क्षेत्र में स्थित मुस्लिम सिंधियान कब्रिस्तान (मकबरा मस्जिद) की इंतजामिया कमेटी ने जिला कलेक्टर को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर वक्फ संपत्ति पर हुए कथित अवैध अतिक्रमण और निर्माण कार्यों के खिलाफ आवाज उठाई है। कमेटी ने प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषियों के विरुद्ध कड़ी वैधानिक कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की है।

इस पूरे घटनाक्रम और शिकायतों की विस्तृत जानकारी मकबरा सेक्रेट्री शोऐब सिंधी द्वारा सार्वजनिक की गई है।

ऐतिहासिक परकोटा तोड़ने और 15 फीट तक पक्के अतिक्रमण का आरोप

जिला प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन में इंतजामिया कमेटी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सूरजपोल स्थित ऐतिहासिक सिंधियान कब्रिस्तान के चारों ओर बनी प्राचीन शहरकोट (परकोटे) की दीवार को वर्षों पूर्व व्यावसायिक हितों के चलते तोड़ दिया गया था।

कमेटी का दावा है कि आस-पास बनी होटलों और दुकानों के निर्माण के दौरान कब्रिस्तान की वक्फ भूमि के भीतर लगभग 2.5 फीट से लेकर 10 से 15 फीट तक का कथित अतिक्रमण कर लिया गया। इतना ही नहीं, इस विवादित भूमि पर बिना किसी वैधानिक स्वीकृति के बड़े पैमाने पर पक्के निर्माण कार्य भी संचालित कर लिए गए हैं, जो कानूनन गलत है।

निर्माण स्वीकृतियों को सार्वजनिक करने की मांग

कमेटी ने ज्ञापन के माध्यम से जिला प्रशासन के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है। उन्होंने मांग की है कि:

नगर निगम (पूर्व नगर पालिका) अथवा उदयपुर विकास प्राधिकरण (UDA / पूर्व UIT) द्वारा यदि इस विवादित क्षेत्र में होटलों या दुकानों को निर्माण की कोई भी वैध स्वीकृति दी गई है, तो संबंधित विभाग उस दस्तावेज को तुरंत सार्वजनिक करे।

यदि ऐसी कोई वैधानिक स्वीकृति प्रशासनिक स्तर पर जारी नहीं की गई है, तो संबंधित होटल एवं दुकान मालिकों के खिलाफ बिना किसी देरी के नियमानुसार सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाए और पूरी वक्फ संपत्ति को तुरंत अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।

100 बीघा की रियासतकालीन भूमि सिमटी: पुराने रिकॉर्ड्स खंगालने की अपील
इंतजामिया कमेटी ने कब्रिस्तान के ऐतिहासिक संदर्भों का हवाला देते हुए बताया कि मेवाड़ रियासत के शासनकाल के समय यह कब्रिस्तान लगभग 100 बीघा के विशाल भू-भाग में फैला हुआ था। लेकिन प्रशासनिक अनदेखी और अवैध कब्जों के चलते वर्तमान में इसका एक बहुत बड़ा हिस्सा पूरी तरह समाप्त हो चुका है।

कमेटी ने जिला कलेक्टर से विशेष आग्रह किया है कि मेवाड़ रियासत के ऐतिहासिक अभिलेखों, ताम्रपत्रों, पुराने नक्शों और वर्तमान राजस्व (रेवेन्यू) रिकॉर्ड की गहराई से संयुक्त जांच करवाई जाए। इस वैज्ञानिक और ऐतिहासिक जांच के जरिए जमीन की वास्तविक और वैध सीमाएं स्पष्ट की जाएं और जहां कहीं भी अवैध कब्जा पाया जाए, उसे ध्वस्त कर वक्फ संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

“वक्फ संपत्ति कौम की अमानत, प्रशासन निभाए जिम्मेदारी”

ज्ञापन के अंत में इंतजामिया कमेटी के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वक्फ की यह जमीन किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि पूरी मुस्लिम कौम की एक पवित्र अमानत है। इस धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहर की हिफाजत करना जिला प्रशासन, वक्फ बोर्ड और संबंधित नगर विकास विभागों की कानूनी व नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि जिला प्रशासन जनभावनाओं का सम्मान करते हुए इस संवेदनशील मामले में त्वरित और निष्पक्ष कदम उठाएगा।

 

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