सभ्य समाज के चेहरे पर कालिख : शराबबंदी के नाम पर युवक को अमानवीय सजा, अपनों ने ही बरगद को बना दिया ‘फंदा’

उदयपुर। कहते हैं कि न्याय व्यवस्था और कानून समाज को सभ्य बनाते हैं, लेकिन जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और न्याय के नाम पर बर्बरता की सारी हदें पार कर दी जाएं, तो इंसानियत का दम घुटना लाजिमी है। राजस्थान के उदयपुर जिले के सायरा थाना क्षेत्र के कमोल गांव से एक ऐसी ही रूह कंपा देने वाली और सभ्य समाज के मुंह पर करारा तमाचा जड़ती घटना सामने आई है। यहाँ तथाकथित पंचों ने न्याय के नाम पर क्रूरता का जो वीभत्स तमाशा रचा, उसने मध्यकालीन बर्बरता की याद दिला दी।

शराबबंदी जैसे सामाजिक सुधार की आड़ में एक इंसान को जानवर से भी बदतर समझा गया। युवक के पैर को रस्सी से बांधकर उसे बरगद के पवित्र पेड़ से उल्टा लटका दिया गया और फिर शुरू हुआ उस निस्सहाय इंसान पर लाठियों और डंडों की बारिश का खौफनाक दौर।

जब बेटे की गलती पर क्रूरता की हद पार कर गए पंच

सायरा थानाधिकारी कानाराम सीरवी से मिली जानकारी के अनुसार, कमोल गांव की भील बस्ती के पंचों ने अपने स्तर पर शराबबंदी लागू कर रखी थी। 11 मई की रात को पीड़ित युवक चूनाराम गमेती ने कथित तौर पर शराब पी और घर लौट आया। नशे की हालत में पिता द्वारा टोकने पर उसने अभद्र व्यवहार किया।

एक बेटे की इस गलती को सुधारने या कानून की मदद लेने के बजाय, अगले दिन 12 मई को पंचों ने खुद को भगवान समझकर अदालत लगा ली।

जुर्माने से भी नहीं भरा मन : पंचायत ने चूनाराम पर 11 हजार रुपये का भारी जुर्माना लगाया।

तालिबानी सजा : लेकिन कानून को हाथ में लेने वाले इन पंचों का मन इतने से नहीं भरा। समाज के ठेकेदारों ने उस युवक को पेड़ से उल्टा लटकाकर सबके सामने बेरहमी से पीटा।

तमाशबीन बना रहा समाज : सबसे दुखद और शर्मनाक बात यह रही कि जब उस युवक की चीखें हवा में गूंज रही थीं, तब वहां मौजूद भीड़ तमाशबीन बनकर चुपचाप खड़ी थी और कुछ लोग इस अमानवीयता का वीडियो बनाने में व्यस्त थे।

न्याय के समांतर ‘अंधेर नगरी’ का खौफनाक सच

यह घटना हमारी व्यवस्था और ग्रामीण इलाकों में पनप रही समांतर न्याय प्रणालियों पर गंभीर सवाल खड़े करती है:

क्या किसी भी समाज या तथाकथित पंचायत को यह अधिकार है कि वह देश के संविधान और कानून से ऊपर उठकर अपनी अदालत चलाए? किसी को इस तरह शारीरिक प्रताड़ना देना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि मानवाधिकारों का घोर हनन है। शराबबंदी जैसे अच्छे उद्देश्य को लागू करने का यह तरीका पूरी तरह गैर-कानूनी और निंदनीय है।

वीडियो वायरल होने पर जागा प्रशासन, 11 आरोपी हिरासत में

यह विडंबना ही है कि यह पूरी घटना 12 मई को घटित हुई थी, लेकिन पुलिस और प्रशासन को इसकी भनक तब लगी जब मंगलवार (14 जुलाई) को इस बर्बरता का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।

वीडियो सामने आने के बाद हरकत में आई सायरा थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मामला दर्ज किया और त्वरित कार्रवाई करते हुए 11 आरोपियों को डिटेन (हिरासत में) किया है। पुलिस अब इस मामले में शामिल अन्य चेहरों को बेनकाब करने और उनसे पूछताछ करने में जुटी है।

उम्मीद है कि कानून हाथ में लेने वाले इन स्वयंभू न्यायविदों को ऐसी सख्त सजा मिलेगी, जो भविष्य में किसी भी पंचायत को ऐसा अमानवीय कृत्य करने से पहले सौ बार सोचने पर मजबूर कर दे।

 

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