आंखों में अंधेरा, पर दिल में सपनों का उजाला : हक की आस में कलक्टर दफ्तर पहुंचे दृष्टिबाधित बच्चे

 

हमें विरोध नहीं, बस शिक्षा और सुरक्षित छत चाहिए—मासूमों की गुहार पर पिघला प्रशासन, कलक्टर ने दिया एक माह में अस्थायी व्यवस्था और स्थायी जमीन का भरोसा

उदयपुर। रोशनी नहीं तो क्या हुआ, हमारे सपनों में तो परवाज़ है… हमें बस सिर छिपाने को एक सुरक्षित छत दे दो, ताकि हम भी पढ़-लिखकर देश का नाम रोशन कर सकें। कुछ इसी दर्द, उम्मीद और अपने अधिकारों की तड़प के साथ गुरुवार को उदयपुर की सड़कों पर एक भावुक कर देने वाला दृश्य देखने को मिला। समिधा संस्थान द्वारा संचालित ‘समिधा दृष्टि दिव्यांग छात्रावास’ के दर्जनों दृष्टिबाधित बच्चे अपनी लाठी के सहारे, एक-दूसरे का हाथ थामे जिला कलक्टर कार्यालय पहुंचे। आँखों में भले ही दुनिया का उजाला न हो, लेकिन अपने बेहतर भविष्य की आस लिए इन बच्चों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज़ बुलंद की।

जर्जर छत और तंग कमरों में घुट रहा बचपन
संस्थान के प्रभारी सखाराम मेघवाल के नेतृत्व में जब बच्चों का प्रतिनिधिमंडल जिला कलक्टर से मिला, तो उन्होंने अपना दर्द बयां करते हुए ज्ञापन सौंपा। वर्तमान में जिस किराए के भवन में ये बच्चे रह रहे हैं, उसकी हालत बेहद जर्जर हो चुकी है। बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन छत छोटी पड़ती जा रही है। बारिश में टपकती छतें और तंग कमरों की बंदिशें इन मासूमों के हौसलों को तोड़ने में लगी हैं। ऐसे में एक स्थायी और सुरक्षित छात्रावास भवन के लिए भूमि आवंटन ही इनकी एकमात्र उम्मीद बन चुका है।

प्रशासन का संवेदनशील रुख, बच्चों की आँखों में झिलमिलाई उम्मीद की किरण
मासूमों की इस मर्मस्पर्शी गुहार और समस्या की गंभीरता को देखते हुए जिला कलक्टर का दिल भी पसीज गया। उन्होंने बेहद संवेदनशीलता दिखाते हुए बच्चों को आश्वस्त किया कि उनकी माँग को हर हाल में पूरा किया जाएगा।

कलक्टर महोदय ने भरोसा दिलाया कि जब तक स्थायी भूमि आवंटन की कागजी प्रक्रिया पूरी होती है, तब तक एक माह के भीतर किसी सरकारी विद्यालय या खाली सरकारी भवन में इन बच्चों के लिए अस्थायी लेकिन सुरक्षित व्यवस्था की जाएगी।

इसके साथ ही, स्थायी छात्रावास के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द पूरा किया जाएगा।

“हमारा संघर्ष किसी के खिलाफ नहीं, बस सम्मान से जीने का अधिकार चाहिए”

प्रशासन के इस मानवीय और संवेदनशील आश्वासन के बाद, दिनभर से परेशान इन बच्चों के उदास चेहरों पर सुकून और उम्मीद की एक नई मुस्कान तैर गई। संस्थान प्रभारी सखाराम मेघवाल ने जिला प्रशासन का सहृदय आभार व्यक्त किया।

धरने पर बैठे दृष्टिबाधित बच्चों ने भावुक होते हुए कहा, “हमारा यह कदम किसी सरकार या प्रशासन के विरोध में नहीं था, यह तो बस हमारी उस तड़प का इजहार था जो हम शिक्षा, सम्मान और एक सुरक्षित आशियाने के लिए सालों से महसूस कर रहे हैं।” इस दौरान कई सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिक भी इन बच्चों का संबल बनने मौके पर मौजूद रहे।

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