
परिसीमन और जनगणना की शर्त से अलग कर आगामी चुनावों से ही 33% आरक्षण लागू करने की उठाई मांग, वक्ताओं ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
उदयपुर। संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को बिना किसी शर्त तुरंत 33 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग को लेकर गुरुवार को अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) के बैनर तले जिला कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए महिला आरक्षण कानून को जनगणना और परिसीमन की आड़ में टालने का विरोध जताया।
तत्काल प्रभाव से लागू हो आरक्षण: संसद और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को बिना किसी शर्त के तुरंत लागू किया जाए।
संविधान संशोधन विधेयक लाए सरकार: महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन की बाध्यता से अलग करने के लिए तुरंत संविधान संशोधन विधेयक प्रस्तुत किया जाए।
वर्तमान सीटों पर लागू हो व्यवस्था: संसद और विधानसभाओं की वर्तमान सीट संख्या के आधार पर आगामी चुनावों से ही महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिया जाए।
प्रदर्शन के दौरान प्रमुख नेताओं व वक्ताओं के वक्तव्य :
प्रो. फ़रहत बानू (राज्य सचिव, ऐपवा) : उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार परिसीमन को एक जरिया बनाकर राजनीतिक बढ़त सुनिश्चित करना चाहती है, जो देश के संघीय ढांचे और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के सिद्धांतों के खिलाफ है।
कामरेड शंकर लाल चौधरी (राज्य सचिव, CPI-ML) : उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने राजनीतिक हितों के लिए महिला आरक्षण को परिसीमन जैसे विवादास्पद मुद्दे से जोड़कर लगातार टाल रही है। सरकार का ‘नारी शक्ति’ का दावा महज एक नारा साबित हो रहा है।
कामरेड सौरभ नरुका (राज्य सचिव, ऐक्टू) : उन्होंने कहा कि दशकों के लंबे संघर्ष के बाद पारित कानून को जनगणना और परिसीमन की शर्तों में उलझाकर अधूरा बना दिया गया है।
डॉ. कुसुम मेघवाल (इतिहासकार) : उन्होंने कहा कि महिला बिल के क्रियान्वयन में लगातार हो रही देरी उस पितृसत्तात्मक मानसिकता को उजागर करती है जो महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को पीछे धकेलती है।
हिम्मत सेठ (प्रधान संपादक, समता संदेश) : उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार गरीबों के शोषण और चंद पूंजीपतियों के फायदों के लिए नीतियां बना रही है।
विभिन्न संगठनों का मिला समर्थन : प्रदर्शन में पार्षद हिदायतुल्लाह, मुस्लिम महासंघ के मोहम्मद बख्शी और भीम आर्मी के इंद्र मेघवाल ने भी शिरकत की और ऐपवा की मांगों का पुरजोर समर्थन किया। वक्ताओं ने कहा कि नफरत और डर के बल पर कोई शासक लंबे समय तक सत्ता में नहीं रह सकता।
कार्यक्रम के दौरान ऐपवा नेता शकीला, रेहाना, शहजादी, हसीना, लक्ष्मी और प्रेम चौधरी सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों की उपस्थिति रही।
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