
कुछ पाकर खोना है, कुछ खोकर पाना है… जीवन का मतलब तो, आना और जाना है।
उदयपुर। गीतकार संतोष आनंद की ये अमर पंक्तियां आज उदयपुर के अंबामाता थाने के लोकप्रिय थानाधिकारी दलपत सिंह राठौड़ के असामयिक निधन पर शत-प्रतिशत सच साबित हो रही हैं। अपने मिलनसार, शालीन स्वभाव के लिए पहचाने जाने वाले दलपत सिंह जी का बुधवार को अचानक निधन हो गया, जिससे पूरे पुलिस महकमे, ‘शायराना उदयपुर’ परिवार और शहरवासियों में शोक की लहर दौड़ गई है।
फतहसागर की पाल पर गाया गाना हुआ अमर : कुछ समय पूर्व दलपत सिंह जी ने उदयपुर की प्रसिद्ध फतहसागर झील की पाल पर बैठकर मशहूर फिल्म शोर का सदाबहार नगमा गाया था…।
“एक प्यार का नगमा है, मौजों की रवानी है…
तू धार है नदिया की, मैं तेरा किनारा हूं…
तूफ़ान तो आना है, आकर चले जाना है…
परछाइयां रह जाती, रह जाती निशानी है…”
उनके अचानक इस दुनिया से चले जाने के बाद यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में उनके द्वारा गाए गए इस गीत के बोल अब उनकी अंतिम याद बनकर हर किसी को भावुक कर रहे हैं।
एक संवेदनशील और कलाप्रेमी पुलिस अधिकारी
दलपत सिंह जी सिर्फ एक कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी ही नहीं थे, बल्कि ‘शायराना उदयपुर’ परिवार से जुड़े एक सहृदय और कलाप्रेमी इंसान भी थे। वर्दी के पीछे उनका मृदुभाषी और प्रेमभाव से भरा व्यक्तित्व हर किसी का दिल जीत लेता था।
उनके निधन पर प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिसकर्मियों और शहर के गणमान्य नागरिकों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे एवं शोकाकुल परिवार को इस असहनीय दुःख को सहन करने का बल दे।
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