फतहसागर की मौजों से टोक्यो के फलक तक: अभावों को चीरकर एशियन गेम्स में भारत का मान बढ़ाएंगे झीलों की नगरी के हर्ष

उदयपुर। कभी फतहसागर की शांत लहरों पर तैरती एक छोटी सी नाव और आँखों में अंतरराष्ट्रीय फलक पर तिरंगा लहराने का अदम्य सपना… आज वही सपना हकीकत बनकर पूरे देश की उम्मीद बन चुका है। झीलों की नगरी के माटी के लाल और कैनोइंग के युवा सितारे हर्षवर्धन सिंह शक्तावत ने वह कर दिखाया है, जिसका इंतजार राजस्थान का खेल जगत बीते चार दशकों से कर रहा था। जापान में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित ‘एशियन गेम्स 2026’ के कैनो स्प्रिंट वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए हर्षवर्धन का चयन हुआ है। यह सिर्फ एक खिलाड़ी का चयन नहीं, बल्कि एक बेटे की अटूट तपस्या, माता-पिता के त्याग और गुरु के विश्वास की जीत है।

हर्षवर्धन का यह सफर किसी तपस्या से कम नहीं रहा। महज 7 वर्ष की अबोध उम्र में पिता निरंजन सिंह शक्तावत अपनी संतान की उंगली थामे बी.एन. तरणताल पहुंचे थे। प्रशिक्षक दिलीप सिंह चौहान ने नन्हे हर्षवर्धन की आँखों में छिपी खेल की भूख को पहली ही नजर में पहचान लिया। 5 साल तक तैराकी के जरिए उसके शरीर को फौलाद बनाया गया और फिर उसे फतहसागर की लहरों के हवाले कर दिया गया। जब शहर नींद की आगोश में होता था, तब यह जांबाज कड़ाके की ठंड और तपती धूप में फतहसागर की छाती पर घंटों चप्पू चलाकर अपनी किस्मत गढ़ रहा था। इसके बाद भोपाल के ‘साई’ सेंटर से लेकर उत्तराखंड के टिहरी डैम की तूफानी लहरों तक, हर्षवर्धन ने हर चुनौती को अपनी जिद के आगे घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया।

राजस्थान कयाकिंग-कैनॉयंग संघ के सचिव दिलीप सिंह चौहान भावुक मन से कहते हैं कि चार दशक पहले जब हमीदा बानो के बाद इस शहर की खेल परंपरा में सन्नाटा पसरा था, तब फतहसागर के किनारे उन्होंने एक सपना बोया था। आज हर्षवर्धन ने उस सपने को वटवृक्ष बना दिया है। संघ के अध्यक्ष भगवान स्वरूप वैष्णव और ड्रैगन बॉट चेयरमैन अजय अग्रवाल का कहना है कि जब कोई बच्चा अभावों और सीमित संसाधनों के बीच से निकलकर दुनिया के सबसे बड़े खेल मंचों तक पहुंचता है, तो वह केवल पदक के लिए नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी की आन-बान-शान के लिए लड़ता है।

वर्तमान में जापान के कोमात्शु शहर की सर्द हवाओं और विदेशी लहरों के बीच हर्षवर्धन 14 सदस्यीय भारतीय दल के साथ दिन-रात पसीना बहा रहे हैं। उनका एक-एक स्ट्रोक अब सिर्फ पानी नहीं काट रहा, बल्कि करोड़ों हिंदुस्तानियों की दुआओं को समेटे हुए स्वर्ण पदक की ओर बढ़ रहा है। मेवाड़ राजपरिवार के डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़, पूर्व संभागीय आयुक्त प्रज्ञा केवलरमानी सहित पूरा खेल जगत आज इस होनहार सपूत की कामयाबी के लिए एक स्वर में प्रार्थना कर रहा है। फतहसागर के पानी से शुरू हुई यह कहानी अब जापान की धरती पर इतिहास रचने को तैयार है।

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