
उदयपुर/भीलवाड़ा। राजनीति में हार पर आंसू और जीत पर जश्न का दस्तूर पुराना है, लेकिन उदयपुर नगर निगम चुनाव की बाड़ेबंदी ने लोकतंत्र का एक नया ही अजूबा पेश कर दिया है। सोमवार को जब ईवीएम का ताला खुलेगा, तो हारने वाले प्रत्याशियों को ‘आजादी’ का परवाना मिलेगा और वे चैन से घर लौट सकेंगे; जबकि जीत का सेहरा बांधने वाले अभागे पार्षदों को मेयर चुनाव संपन्न होने तक पार्टी के उसी ‘बाड़े’ में अपनी कैद काटनी होगी।
ईवीएम खुलने से ठीक पहले बाड़ेबंदी का यह पूरा कारवां भीलवाड़ा जा पहुंचा, जहां सभी ने पूज्य आचार्य पुलक सागर महाराज के दरबार में मत्था टेका।
सामने आई पहली तस्वीर में दिख रहे हैं ‘वो 80 प्रत्याशी’, जिन्हें पार्टी ने वोट डलने के बाद से ही अपनी निगरानी के पिंजरे में बंद कर रखा है। न घर जाने की छूट, न समर्थकों से मिलने की फुर्सत। सोमवार की सुबह इनमें से कइयों के लिए सचमुच ‘मुक्ति’ लेकर आएगी, क्योंकि हारते ही पार्टी उन्हें आजाद छोड़ देगी और जीतने वालों की निगरानी और सख्त कर दी जाएगी।
वहीं दूसरी तस्वीर में नजर आ रहे हैं ‘वो 5 दावेदार’, जिनकी नजरें पार्षद की जीत से ज्यादा उस एक ‘मेयर की कुर्सी’ पर टिकी हैं। महाराज श्री के चरणों में खड़े इन पांचों चेहरों की प्रार्थनाएं भले ही ऊपर से जनता की सेवा वाली दिख रही हों, लेकिन अंदरूनी अर्जी सिर्फ यही है कि कल की बाड़ेबंदी का रिमोट कंट्रोल और मेयर का ताज इन्हीं के सिर सजे। अब देखना यह है कि ईवीएम की कृपा से किसे आजादी नसीब होती है और कौन बाड़ेबंदी का पक्का कैदी बनकर कुर्सी की जंग लड़ता है।
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