उदयपुर नगर निगम चुनाव: जो जीता वो ही सिकंदर… फोटो जर्नलिस्ट कमल कुमावत के कैमरे में कैद प्रत्याशियों और समर्थकों के चेहरे, पढ़िए कौन कितना खुश और क्यों

उदयपुर। सूरजपोल स्थित राजस्थान कृषि महाविद्यालय (RCA) के मतगणना परिसर से जब एक-एक कर नतीजे


उदयपुर। सूरजपोल स्थित राजस्थान कृषि महाविद्यालय (RCA) के मतगणना परिसर से जब एक-एक कर नतीजे बाहर आने शुरू हुए, तो सियासी गलियारों में भावनाओं का समंदर उमड़ पड़ा। कहीं ढोल की थाप पर उड़ता गुलाल था, तो कहीं आंखों में खुशी के आंसू। फोटो जर्नलिस्ट कमल कुमावत के कैमरे ने जीत के इस ऐतिहासिक क्षण में प्रत्याशियों और उनके समर्थकों के चेहरों पर तैरते भावों और सियासी वजहों को संजीदगी से कैद किया है।

प्रमोद सामर, पारस सिंघवी और दिनेश भट्ट (वार्ड 51, 24 व 45): मेयर की दौड़ में मजबूत दावेदारी का गौरव

चेहरे के भाव : संगठन के वरिष्ठ महारथियों वाली नपी-तुली मुस्कान, विक्ट्री साइन और कार्यकर्ताओं के प्रति आभार।

खुशी की वजह: ये तीनों ही चेहरे भाजपा के सबसे कद्दावर नेताओं में शुमार हैं और नगर निगम के महापौर पद के प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। पूर्व शहर जिलाध्यक्ष दिनेश भट्ट ने पहली बार चुनावी रण में उतरकर वार्ड 45 से जीत दर्ज की, वहीं वार्ड 51 से प्रमोद सामर और वार्ड 24 से पारस सिंघवी ने अपनी-अपनी सीटों पर जीत दर्ज की। तीनों दिग्गजों की विजय ने निगम के शीर्ष पद की जंग को बेहद दिलचस्प बना दिया है।

जतिन श्रीमाली (वार्ड 33) : पिता की याद में भीगी पलकें और नई पीढ़ी का जोश

चेहरे के भाव : आंखों में स्वर्गीय पिता प्रो. विजय श्रीमाली की स्मृतियों की नमी और होठों पर जीत का विनम्र अहसास। परिवार और युवा दोस्तों के गले मिलते हुए चेहरे की चमक।

खुशी की वजह : न केवल भाजपा के पारंपरिक गढ़ को अभेद्य बनाए रखा, बल्कि परिवार के वरिष्ठजनों, युवा मित्रों और ‘जेन-जी’ वोटरों के संयुक्त प्रयास से 70.85% वोट हासिल कर अपने पहले ही बड़े चुनावी इम्तिहान में खुद को साबित किया।

डॉ. हितांशी शर्मा (वार्ड 73) : बयानों की तपिश के बीच आत्मसम्मान की जीत

चेहरे के भाव : गरिमापूर्ण मुस्कान और कार्यकर्ताओं के जोशीले नारों के बीच राहत की सांस।

खुशी की वजह : पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. गिरिजा व्यास की भतीजा बहू हितांशी के वार्ड को लेकर चुनाव प्रचार के दौरान काफी तीखी बयानबाजी हुई थी। तमाम ध्रुवीकरण के बावजूद भाजपा की लवली जैन को हराकर जीत दर्ज करना उनके और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए आत्मसम्मान की बड़ी विजय बना।

डॉ. पूनम राठौड़ (वार्ड 17) : कांग्रेस खेमे की सबसे बड़ी राहत

चेहरे के भाव: जीत के प्रमाण पत्र के साथ आत्मविश्वास से भरा चेहरा, समर्थकों द्वारा मालाओं से लाद दिए जाने पर नम्र अभिवादन।

खुशी की वजह : शहर कांग्रेस अध्यक्ष फतेह सिंह राठौड़ की पत्नी होने के नाते यह सीट साख की लड़ाई थी। 505 मतों के अंतर से जीत दर्ज कर उन्होंने संगठन के मान को बचाया और खुद को कांग्रेस की ओर से महिला नेतृत्व के तौर पर मजबूती से स्थापित किया।

खुशबू मेहता (वार्ड 60) : बागी की ललकार और निर्दलीय जीत का जश्न

चेहरे के भाव : उत्साह और बगावत के सफल होने का असीम गर्व, समर्थकों द्वारा गुलाल उड़ाते हुए गगनभेदी नारे।

खुशी की वजह : भाजपा से बगावत कर निर्दलीय मैदान में उतरी थीं। भाजपा विधायक फूलसिंह मीणा के ही गृह क्षेत्र में पार्टी प्रत्याशी को शिकस्त देकर खुशबू ने दिखा दिया कि स्थानीय मुद्दों पर जनता का भरोसा किसी दल के सिंबल से बड़ा होता है।

आकाश वागरेचा और अतुल चंडालिया (वार्ड 5 व 78) : परिवार की साख कायम रहने का सुकून

चेहरे के भाव: संयमित उल्लास और संगठन के कार्यकर्ताओं के साथ विजय तिलक का स्वागत।

खुशी की वजह : पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के परिवार से जुड़ाव के चलते दोनों ही वार्डों पर पूरे प्रदेश की नजरें थीं। दोनों नेताओं ने शानदार जीत दर्ज कर कटारिया के सियासी दबदबे और पारिवारिक साख को मजबूती से बरकरार रखा।

आरसीए परिसर के बाहर दिन ढलने तक ढोल-नगाड़ों की गूंज और मिठाइयों का दौर चलता रहा। कैमरे के फ्रेम में दर्ज ये चेहरे बता रहे थे कि चुनावी अखाड़े में पसीना चाहे किसी ने कितना भी बहाया हो, अंततः सेहरा उसी के सिर बंधता है जिसे जनता अपने दिल में जगह देती है—क्योंकि सियासत का अंतिम सत्य यही है कि ‘जो जीता, वही सिकंदर!’

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